अध्यात्म
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साधना की सभी युक्तियों में भक्ति जोड़ने से स्थितप्रज्ञ की स्थिति
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि वह साधना की अपनी सब युक्तियाँ काम में लाये, और फिर…
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संयम मूर्ति होता है स्थितप्रज्ञ
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि ‘स्थितप्रज्ञ’ यानी स्थिर बुद्धिवाला मनुष्य, यह तो उसका नाम ही बता…
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हमें खुद कर्म करना चाहिए
आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद का तीसरा मंत्र पढ़ते हैं – असुर्या नाम…
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नाना रूप धरा देवी ने
नवरात्रि आ गयी है यानी कि 9 दिनों तक शक्ति की उपासना के लिए देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा…
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मुक्ति के लिए कर्म छोड़ने की जरूरत नहीं
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया ईशावास्य उपनिषद जिजीविषेत् शतं समाः – जिजीविषा यानी जीने की इच्छा।…
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भक्ति प्राप्त करने को मिलता है जन्म
संत विनोबा कहते हैं कि पुंडलीक के उदाहरणसे यह मालूम हो जाता है कि फल-त्याग किस मंजिल तक पहुँचने वाला…
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कर्म करने वाला ही जीने का अधिकारी
संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद मंत्र पढ़ते हैं कि कुर्वनेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतम समा: एवं त्वयि नान्यथेतोअस्ति न कर्म लिप्यते नरे*…
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भक्ति ही भक्त का स्वधर्म है
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय* 32 फल-त्यागके दो उदाहरणसंतजनों ने अपने जीवनके द्वारा यह बात सिद्ध कर दी है। तुकाराम के…
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जीवन दो भाग त्याग और एक भाग भोग
विनोबा का आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया ईशावास्य उपनिषद अंश तेन त्यकतेन भुनजीथा, यह धर्मसूत्र है…
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त्याग जीवन का मूल तत्व
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद अंश पढ़ते हुए कहते हैं कि ईशावास्यम…
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