अध्यात्म
-

कर्म वही, परंतु भावना-भेद से आता है अँतर
संत विनोबा गीता प्रवचन करते हुए कहते हैं कि कर्म वही, परंतु भावना-भेद से उसमें अंतर पड़ जाता है। परमार्थी…
Read More » -

आत्मज्ञानी को होता है अखंड दर्शन
आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा आत्मज्ञानी के बारे में बताते हुए ईशावास्य उपनिषद अंश का…
Read More » -

चार धाम कपाट बंद करने की तिथि तय
हरिद्वार। प्रथा के हिसाब से आज विजय दशमी के दिन बद्रीनाथ , केदारनाथ , गंगोत्री और यमनोत्री धाम के कपाट…
Read More » -

आत्मतत्व : अज्ञानी के लिए दूर, ज्ञानी के लिए पास
प्रस्तुति : रमेश भैया आत्मतत्व के बारे में बताते हुए संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का पांचवा मंत्र पढ़ते हैं –…
Read More » -

फलत्याग को मिलता है अनंत फल
संत विनोबा कर्मयोग पर कहते हैं कि फलत्याग को अनंत फल मिलता है। भाइयो, गीता के दूसरे अध्याय में हमने…
Read More » -

प्राण का आधार कभी खंडित नहीं होता
संत विनोबा बताते हैं कि ईशावास्य उपनिषद के अनुसार प्राण का आधार कभी खंडित नहीं होता। इसलिए प्राण तो रहता…
Read More » -

अष्टशक्तियों की अवधारणा का निहितार्थ
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी शास्त्रों में अष्टशक्तियों का उल्लेख आता है जो अपने वाहनों से शक्ति का संचरण ,सम्प्रेषण करती हैं।…
Read More » -

प्रकाश से अधिक गति मन की, ईश्वर सबसे गतिवान
आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद काचौथा मंत्र पढ़ते हैं – अनेजदेकं मनसो जवीयः…
Read More » -

साधना की सभी युक्तियों में भक्ति जोड़ने से स्थितप्रज्ञ की स्थिति
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि वह साधना की अपनी सब युक्तियाँ काम में लाये, और फिर…
Read More » -

संयम मूर्ति होता है स्थितप्रज्ञ
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि ‘स्थितप्रज्ञ’ यानी स्थिर बुद्धिवाला मनुष्य, यह तो उसका नाम ही बता…
Read More »





