
(मीडिया स्वराज डेस्क)
देश के 22 लाख मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़ा नीट (NEET) महासंकट अब एक अभूतपूर्व मोड़ पर आ चुका है।शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जो कुछ हुआ, उसने इस देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी यानी NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की साख को पूरी तरह तार-तार कर दिया है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि देश के सॉलिसिटर जनरल ने खुद आज अदालत को बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी (Personally Supervising) कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आगामी 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के पेपर को लीक होने से बचाने के लिए अब देश में **भारतीय वायु सेना (Air Force) के विमानों की मदद ली जा रही है।
सोचिए, जिस लोकतांत्रिक देश में एक प्रवेश परीक्षा कराने के लिए सेना की मदद लेनी पड़े, वहां की पूरी नागरिक प्रशासनिक व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर कितने गंभीर सवाल खड़े होते हैं!
एक तरफ जहां सरकार इस भारी डैमेज कंट्रोल में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रभावित नीट छात्रों के एक ग्रुप से मुलाकात की है। छात्रों का दर्द जानने के बाद विपक्ष लगातार इस नाकामी के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां और NTA की नाकामी
सबसे पहले बात करते हैं कि आज देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट के भीतर क्या हुआ?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई को जुलाई के दूसरे हफ्ते तक टाल दिया है, लेकिन कोर्ट ने केंद्र सरकार और NTA से एक व्यापक ‘स्ट्रक्चरल रिफॉर्म रोडमैप’ (ढांचागत सुधार का ठोस खाका) मांग लिया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां इतनी तीखी थीं कि वो व्यवस्था के गाल पर एक कड़ा तमाचा हैं। कोर्ट ने भारतीय संस्थाओं में कामचलाऊ रवैये (Ad-hocism) पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि संस्थाओं के पास अपनी एक ‘इंस्टीट्यूशनल मेमोरी’ (संस्थागत अनुभव और साख) होनी चाहिए, न कि सिर्फ अधिकारियों के तबादलों के साथ व्यवस्था बदल जाए और बार-बार गलतियां दोहराई जाएं।
अदालत ने NTA को सीधा आईना दिखाते हुए कहा कि उसे UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) जैसी संस्थाओं से सीखना चाहिए, जो बिना किसी पेपर लीक या विवाद के इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाएं सालों से पूरी निष्पक्षता के साथ आयोजित करा रही हैं।
कोर्ट ने एक और बहुत महत्वपूर्ण बात कही। बेंच ने कहा कि जब तक किसी खास व्यक्ति या अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह “बिखरी हुई जिम्मेदारी बनी रहेगी और पेपर लीक का यह सिलसिला नहीं थमेगा। कोर्ट ने दोहराया कि 3 मई को होने वाले पेपर का लीक होना और परीक्षा का रद्द होना छात्रों और उनके परिवारों के लिए ‘बेहद दर्दनाक’ है।
अंदरूनी सुराख और CBI जांच के सनसनीखेज खुलासे
आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा था? NTA के भीतर वो कौन सा सुराख था जिसने 22 लाख छात्रों का भविष्य अंधकार में डाल दिया? सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई (CBI) की जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
सीबीआई इस मामले में अब तक 12 बड़ी गिरफ्तारियां कर चुकी है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह साफ हो गया है कि यह कोई सामान्य या बाहर से हुआ पेपर लीक नहीं था। यह सीधे तौर पर NTA के अंदरूनी तंत्र में लगी बहुत बड़ी सेंधमारी है।
सीबीआई ने जिन लोगों को दबोचा है, उनमें कोई छोटे-मोटे दलाल नहीं, बल्कि खुद NTA द्वारा पेपर सेट करने और ट्रांसलेशन के लिए नियुक्त किए गए टॉप-लेवल एक्सपर्ट्स शामिल हैं।
पहला खुलासा (केमिस्ट्री लीक) लातूर के रहने वाले केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को पुणे से गिरफ्तार किया गया, जो NTA के आधिकारिक पैनल में थे। इन्होंने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में अपने घर पर गुपचुप तरीके से छात्रों को इकट्ठा किया और हूबहू वही सवाल और विकल्प उनकी कॉपियों में लिखवा दिए, जो 3 मई के असली पेपर में आए थे।
दूसरा खुलासा (बायोलॉजी लीक):मॉडर्न कॉलेज, पुणे की बॉटनी लेक्चरर मनीषा मंदहारे को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास बॉटनी और जूलॉजी के पेपर का पूरा एक्सेस था।
तीसरा खुलासा (फिजिक्स लीक): अभी हाल ही में पुणे के एक स्कूल की प्रधानाचार्या) मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया गया है। ये NTA की तरफ से फिजिक्स पेपर की आधिकारिक ट्रांसलेटर थीं। इन्होंने मोबाइल के जरिए फिजिक्स के सवाल लीक किए और सबूत मिटाने के लिए बाद में चैट डिलीट कर दी और अपने नोट्स तक जला डाले।
चौथा खुलासा सीबीआई ने कोर्ट में जो सबसे हैरान करने वाला खुलासा किया है, वह है 12वीं गिरफ्तारी। एक ऐसे रसूखदार छात्र को गिरफ्तार किया गया है जिसका नंबर इस रैकेट के दूसरे आरोपियों ने अपने फोन में ‘God’ भगवान नाम से सेव कर रखा था। इसी छात्र को प्रधानाचार्य मनीषा हवलदार ने सीधे फिजिक्स के सवाल मुंहजबानी रटवाए थे, जिसके बदले लाखों रुपयों का लेन-देन हुआ।
इस जांच की आंच अब महाराष्ट्र के लातूर, नांदेड़ और परभणी के कई बड़े और रसूखदार डॉक्टरों तक पहुंच गई है। सीबीआई कई डॉक्टरों से पूछताछ कर रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी मेडिकल विरासत को आगे बढ़ाने के लिए, अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए इन दलालों और पेपर सेट करने वाले एक्सपर्ट्स को लाखों-करोड़ों रुपए खिलाए। इसके अलावा जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से भी कई बिचौलिए दबोचे गए हैं।
विपक्ष का हमला और राहुल गांधी का दखल
जहाँ एक तरफ सीबीआई की गिरफ्तारियां और सरकार की तरफ से वायुसेना को लगाने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले ने भारी राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रभावित नीट अभ्यर्थियों के एक समूह से मुलाकात की है।
राहुल गांधी ने इन पीड़ित छात्रों को पूरा भरोसा दिलाया है कि वे सड़क से लेकर संसद तक इस आवाज को पूरी ताकत से उठाएंगे और सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं ।
निष्कर्ष और बड़े सवाल
अंत में हमें सोचना होगा और सरकार से यह कड़े सवाल पूछने होंगे—
क्या सिर्फ एयरफ़ोर्स लगा देने से या सुरक्षा कड़ी करने से देश की परीक्षा प्रणाली सुदर जाएगी? जब तक कोचिंग माफिया, रसूखदार डॉक्टरों, सरकारी अधिकारियों और पेपर लीक करने वाले इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट का गठजोड़ पूरी तरह जमींदोज नहीं किया जाएगा, तब तक हमारे देश के मेधावी छात्रों का भविष्य कभी सुरक्षित नहीं हो सकता।
21 जून को होने वाले री-एग्जाम को लेकर 22 लाख छात्र अभी भी भारी असमंजस और तनाव में हैं। ऊपर से जून के महीने में जब उत्तर भारत भीषण हीटवेव (लू) की चपेट में है, इन छात्रों को दोबारा परीक्षा केंद्र पर बैठाना उनके स्वास्थ्य के साथ भी एक बड़ा रिस्क है। सरकार को हर केंद्र पर कूलर, पानी और मेडिकल किट की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी।
क्या सरकार इस बार बिना किसी दाग के परीक्षा करा पाएगी? और क्या जुलाई के दूसरे हफ्ते में जब सुप्रीम कोर्ट दोबारा बैठेगा, तब तक NTA का यह पूरा सड़ा हुआ ढर्रा बदला जा चुका होगा?
आपका इस पूरी व्यवस्था, सीबीआई के खुलासों और कोर्ट की टिप्पणियों पर क्या सोचना है, हमें कमेंट में जरूर बताएं।



