
(मीडिया स्वराज डेस्क )
राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले दान में कथित चोरी और गबन के आरोपों ने करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गहरा आघात पहुँचा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद अब आम जनता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
राम मंदिर का निर्माण करोड़ों हिंदुओं के लिए एक सपना पूरा होने जैसा है, लेकिन दान में हुए कथित भ्रष्टाचार की खबरों ने इस पवित्र अभियान की गरिमा पर सवाल खड़ा कर दिया है। आज 13 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने इस मामले को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और नया नोटिस
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 13 जुलाई को मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब केवल ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को अपनी जांच की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा कि इस कथित घोटाले के कारण दुनिया भर में फैले हिंदू समाज को गहरी मानसिक ठेस पहुँची है। लोगों की भारी नाराजगी इस बात को लेकर है कि मामले की लीपा-पोती की जा रही है। आम जनमानस में यह आम धारणा बन गई है कि केवल निचले स्तर के छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर गिरफ्तार किया जा रहा है, जबकि मुख्य साजिशकर्ताओं और बड़े ओहदे पर बैठे लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्पक्ष जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस घोटाले की जांच सीबीआई (CBI) जैसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और मंदिर के खातों का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट हो। लोगों का मानना है कि यदि इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी के हाथ में नहीं दी गई, तो सच कभी सामने नहीं आ पाएगा।
न्यायपालिका से क्या उम्मीदें हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वे जांच की प्रगति का अवलोकन कर रहे हैं। अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को निर्धारित है। कोर्ट का यह हस्तक्षेप इस मायने में महत्वपूर्ण है कि इसने उन लोगों के बीच एक भरोसा पैदा किया है जो महसूस कर रहे थे कि मंदिर के नाम पर हुए इस कथित भ्रष्टाचार को दबा दिया जाएगा।
देश के करोड़ों दानदाताओं की मेहनत की कमाई, जो उन्होंने आस्था के चलते मंदिर के लिए दी थी, उसकी सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अब न्यायपालिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। 20 जुलाई की सुनवाई में SIT की रिपोर्ट यह तय करेगी कि यह मामला सीबीआई के हवाले होगा या नहीं। करोड़ों हिंदुओं की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या सच में दोषियों को सजा मिलेगी या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।
राम मंदिर दान घोटाले की स्वतंत्र जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट नोटिस और इस मसले से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण सवालों पर बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी की एडवोकेट अनूप प्रकाश अवस्थी से गहन चर्चा यहाँ सुनें :
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