अध्यात्म
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स्वधर्म के सहारे ही उन्नति की राह
*गीता प्रवचन दूसरा अध्याय* विनोबा का गीता प्रवचन प्रस्तुति : रमेश भैया स्वधर्म के सिलसिले में उपनिषद् में एक सुंदर…
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आत्मज्ञान और समत्वबुद्धि
गीता प्रवचन – विनोबा – दूसरा अध्याय विनोबा के गीता प्रवचन की प्रस्तुति : रमेश भैया भाईयों, पिछली बार हमने…
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अथर्ववेद में लोकतंत्र की व्याख्या
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी वैदिक काल में राजा का बेटा ही राजा होगा, ऐसा नहीं था। यह अथर्ववेद के एक मन्त्र…
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ॠजु-बुद्धि का अधिकारी
गीता प्रवचन – विनोबा – पहला अध्याय विनोबा के गीता प्रवचन कीप्रस्तुति : रमेश भैया आगे की सारी गीता समझने…
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आज का वेद चिंतन : वेद और बुद्ध
बुद्ध भगवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा था : भाइयों *न हि वेरेन वेरानि सम्मन्तीध कुदाचंन। अवेरेन च सम्मन्ति एस…
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आज का वेद चिंतन विचार – वेद और ईसाई
ईसाई धर्म के भारत में आने से पहले हिन्दुस्तान में अनेकविध दर्शन विकसित हो गये थे। वेद, उपनिषद, भागवत धर्म,…
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आज का वेद चिंतन विचार
नम इडुग्रं नम आ विवासे नमो दाधारं पृथ्वीमुत् द्याम। नमो ने पृथ्वी और स्वर्ग को धारण किया है। नम्रता ही…
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आज का वेद चिंतन विचार
ऋग्वेद में कवि की व्याख्या बहुत सुंदर की है। ब्रह्मा देवानाम पदवी:कवीनाम ऋषिविप्राणाम महिशो मृगा नाम श्येनो गृध्रानाम स्वधिती…
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श्रद्धा रखो
संत विनोबा का संदेश है – श्रद्धा रखो। इस संबंध में विनोबा का एक किस्सा प्रचलित है। “हमारा ईश्वर के…
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आज का वेद चिंतन विचार
ओ शु स्वसार: कारवे श्र्णोत् ययौ वो दुरादनसा सफेद रथेन नि शू नमध्व भवता सुपारा: अधो अक्षा: सिंधव: स्रोत्याभि: 3.3.11…
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