श्रद्धा रखो

“हमारा ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं है।” एक युवा ने विनोबा जी से कहा।
“तुम्हारी माँ है न ?”
“जी हाँ, है।”
“मां पर विश्वास है न ?”
“जी हाँ!”
“तो बस है उतना। देखो, तुम्हारी भगवान पर श्रद्धा भले न हो, भगवान तुम पर श्रद्धा रखता है।”
खामोशी छा जाती है।
फिर से उस जवान से विनोबा जी पूछते है – “न्यूयार्क शहर तुमने देखा है ?”
“जी नहीं!”
“फिर कैसे मानते हो कि न्यूयॉर्क नाम का शहर है ?”
“जिन्होंने न्यूयार्क देखा है, उनसे सुना है।”
“यानी जिन्होंने वह शहर देखा है, उन पर तुम्हारी श्रद्धा है। वैसी ही श्रद्धा उन साधु-संतों पर रखो, जिन्होंने ईश्वर का दर्शन किया है। श्रद्धा रखो!”

मैत्री, ब्रह्म विद्या मंदिर, पवनार, वर्धा

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