अध्यात्म
-

विनोबा का नवविचार : विकल्पहीनता में विकल्प की आशा
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज। लोकतान्त्रिक राजतंत्र और वाणिज्यतंत्र के हाथों कठपुतली की तरह नाचते हुए आज का मानव एक ऐसी…
Read More » -

आज का वेद चिंतन – तुंजेतुंजे य उत्तरे स्तोमा इंद्रस्य वज्र:
विनोबा जी का आज का वेदन चिंतन विचार * तुंजेतुंजे य उत्तरे स्तोमा इंद्रस्य वज्र:* *न विंधे अस्य सुष्टुतिम्। (1.2.5)*…
Read More » -

वेद चिंतन विचार – प्रमाद
वेद चिंतन विचार यन्ति प्रमादमतंदृा । प्रमाद के कारण हमारे जीवन में प्रगति नहीं होती ,हम रुंध जाते हैं। धर्म…
Read More » -

विनोबा के जयजगत के विचार से होगा संकुचित राष्ट्रवाद का शमन: रमेश भाई ओझा
विनोबा जी के जयजगत विचार की प्रासंगिकता संकुचित राष्ट्रवाद का शमन करने के लिए बढ़ गयी है। आज दुनिया में…
Read More » -

अद्वैत की अवधारणा
डा चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज। द्वैत का अर्थ है दो का भाव, उसमे अ उपसर्ग जुड़ने पर अद्वैत पद की निष्पत्ति…
Read More » -

वेद चिंतन : जो वृद्धों और समान उम्र वालों की सेवा नहीं करता और अकेले खाता है, वह पापी है
विनोबा वेद चिंतन विचार. मोघमन्नं विंदतेअप्रचेता:सत्यं ब्रवीमि वध इत् स तस्य नार्यमं पुष्यति नो सखायम केवलाघो भवति केवालादी । अविवेकी पुरुष…
Read More »








