ईशावास्य
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अध्यात्म

निज-पर के भेद को मिटाना ईश्वर के ज्ञान का फल
संत विनोबा वेद प्रवचन करते हुए कहते हैं कि ईशावास्य – बोध* मंत्र 4 और 5 का एक स्वतंत्र परिच्छेद…
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अध्यात्म

मन को देह से अलग पहचानें
संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद अंश मंत्र आठ का अवशेष भाग बताते हुए कहते हैं कि कहने का तात्पर्य है कि…
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अध्यात्म

अखंड दर्शन से मोह-शोक नहीं होता
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद के 7वें मंत्र पर कहते हैं कि…
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अध्यात्म

ज्ञानी सभी को आत्मस्वरूप देखता है
प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का मंत्र 7 पढ़ते हुए कहते हैं – *यस्मिन सर्वानि भूतानि आतमैवआभ्रद्…
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अध्यात्म

आत्मतत्व : अज्ञानी के लिए दूर, ज्ञानी के लिए पास
प्रस्तुति : रमेश भैया आत्मतत्व के बारे में बताते हुए संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का पांचवा मंत्र पढ़ते हैं –…
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अध्यात्म

प्राण का आधार कभी खंडित नहीं होता
संत विनोबा बताते हैं कि ईशावास्य उपनिषद के अनुसार प्राण का आधार कभी खंडित नहीं होता। इसलिए प्राण तो रहता…
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अध्यात्म

प्रकाश से अधिक गति मन की, ईश्वर सबसे गतिवान
आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद काचौथा मंत्र पढ़ते हैं – अनेजदेकं मनसो जवीयः…
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अध्यात्म

हमें खुद कर्म करना चाहिए
आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद का तीसरा मंत्र पढ़ते हैं – असुर्या नाम…
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अध्यात्म

मुक्ति के लिए कर्म छोड़ने की जरूरत नहीं
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया ईशावास्य उपनिषद जिजीविषेत् शतं समाः – जिजीविषा यानी जीने की इच्छा।…
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अध्यात्म

कर्म करने वाला ही जीने का अधिकारी
संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद मंत्र पढ़ते हैं कि कुर्वनेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतम समा: एवं त्वयि नान्यथेतोअस्ति न कर्म लिप्यते नरे*…
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