विनोबा
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अध्यात्म

अंत की सत्ता से परे करता है आत्मज्ञान
संत विनोबा कठोपनिषद अंश पर प्रवचन करते हुए कहते हैं कि हे अंतक, तुम तो खुद ही अंत करने वाले…
Read More » स्वधर्म पालन अत्यंत आवश्यक
संत विनोबा गीता प्रवचन में कहते हैं कि भाइयो, पिछले अध्याय में हमने निष्काम कर्मयोग का विवेचन किया। स्वधर्म को…
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अध्यात्म

अखंड दर्शन से मोह-शोक नहीं होता
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद के 7वें मंत्र पर कहते हैं कि…
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अध्यात्म

ज्ञानी सभी को आत्मस्वरूप देखता है
प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का मंत्र 7 पढ़ते हुए कहते हैं – *यस्मिन सर्वानि भूतानि आतमैवआभ्रद्…
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अध्यात्म

कर्म वही, परंतु भावना-भेद से आता है अँतर
संत विनोबा गीता प्रवचन करते हुए कहते हैं कि कर्म वही, परंतु भावना-भेद से उसमें अंतर पड़ जाता है। परमार्थी…
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अध्यात्म

आत्मतत्व : अज्ञानी के लिए दूर, ज्ञानी के लिए पास
प्रस्तुति : रमेश भैया आत्मतत्व के बारे में बताते हुए संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का पांचवा मंत्र पढ़ते हैं –…
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अध्यात्म

फलत्याग को मिलता है अनंत फल
संत विनोबा कर्मयोग पर कहते हैं कि फलत्याग को अनंत फल मिलता है। भाइयो, गीता के दूसरे अध्याय में हमने…
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अध्यात्म

प्राण का आधार कभी खंडित नहीं होता
संत विनोबा बताते हैं कि ईशावास्य उपनिषद के अनुसार प्राण का आधार कभी खंडित नहीं होता। इसलिए प्राण तो रहता…
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अध्यात्म

प्रकाश से अधिक गति मन की, ईश्वर सबसे गतिवान
आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद काचौथा मंत्र पढ़ते हैं – अनेजदेकं मनसो जवीयः…
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अध्यात्म

साधना की सभी युक्तियों में भक्ति जोड़ने से स्थितप्रज्ञ की स्थिति
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि वह साधना की अपनी सब युक्तियाँ काम में लाये, और फिर…
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