राजनीति
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हिंदुस्तान की आज़ादी के बाद का सफ़र
ससे बार बार कहा गया लेकिन हर बार उसने मना कर दिया।जब बहुत देर तक उसने माँ को नहीं बुलाया…
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गांधीवादी या मार्क्सवादी होना नादानी है
, आठ राज्यों में एक साथ कांग्रेससत्ता से बाहर हुई। भाषा, समानता, सादगी, बड़े लोगों कीआय और खर्च पर पाबंदी जैसी सोशलिस्ट पार्टी की नीतियों को जनता से प्रबल समर्थन मिला था।
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बीजेपी और कांग्रेस को पीछे छोड़ने की तैयारी में ‘विजय रथ’ लेकर निकली अखिलेश की ‘साइकिल’
कानपुर में अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में जिस तरीके से कानून को कुचला गया, किसानों को कुचला गया,…
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जेपी-लोहिया की विरासत को मजबूती देता किसान आंदोलन
जेपी और लोहिया, दोनों ही नेताओं ने जनता के बीच जागरूकता पैदा कर लोक शक्ति निर्माण करने को तथा विकेंद्रीकृत…
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गांधी के बाद आज लोहिया ही सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं
लोहियावादियों के बारे में वह जुमला ही चल पड़ा कि वे दल तोड़क होते हैं. खंड-खंड में बंटने को अभिशप्त,…
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 12 अक्टूबर को पूरे भारत में शहीद किसान दिवस
के किसान संगठनों और अन्य प्रगतिशील समूहों से पूरे देश में प्रार्थना और श्रद्धांजलि सभा आयोजित करके शहीद किसान दिवस…
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मोरारजी भाई ने कहा कि जेपी मसीहा बनना चाहते हैं
जेपी की मृत्यु के समय चौधरी चरण सिंह कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे. जेपी का शव श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल के बरामदे में…
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लखीमपुर खीरी हिंसा : किसान मोर्चा ने मंत्री की बर्ख़ास्तगी और गिरफ़्तारी पर दबाव के लिए रेल रोको का आह्वान
संयुक्त किसान मोर्चा लखीमपुर खीरी ने एक बयान में कहा है कि वह , “किसान हत्याकांड में उत्तर प्रदेश सरकार…
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