आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मानव कल्याण — खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा में AI क्या कर सकता है?

AI और हम: एक सामाजिक पड़ताल - भाग 7 

कोई भी तकनीकी उपयोगी होती है — अन्यथा वह बाजार में बिकने लायक नहीं बनती। आज की तकनीकी का सर्वोच्च आविष्कार AI माना जाता है। इस सर्वोच्च आविष्कार की उपयोगिता का हमें अंदाज़ होना चाहिए। उपलब्ध डेटा पर process करने का काम AI करता है। कहा जाता है कि रसोई से लेकर शेयर बाजार तक — व्यक्तिगत से सामाजिक, आर्थिक सभी पहलुओं में AI अब अविभाज्य हिस्सा बन गया है।

खेती में AI:

खेती में मशीनें आ गई हैं। सुविधाजनक औजार हैं। लेकिन खेती का पूरा ऑटोमेशन अभी भी दूर है। ऐसे में AI क्या कर सकता है?

मान लीजिए आपको शहर में रहकर गाँव की खेती करनी है। आजकल खेती के काम के लिए मजदूर नहीं मिलते। आपके पास आम के पेड़ हैं और कपास की खेती है। पानी देना है, liquid form में protein और vitamins देने हैं। कोई बीमारी है तो इलाज करना है।

पानी देने का काम आपके मोबाइल से होगा। आप सेसंर्स को मोबाइल से आदेश देंगे। खेत में टैंक से पानी शुरू होगा। पानी के साथ सब पौष्टिक खाद मिलेगा। फिर मोबाइल के आदेश से ड्रोंस घूमेंगे और आपको मोबाइल पर खेत दिखेगा। जहाँ बीमारी का दाग दिखेगा — सिर्फ वहाँ दवा स्प्रे होगी। हर एक आम का हेल्थ चार्ट AI के पास रहेगा। मिट्टी का विश्लेषण होगा, खाद के बारे में सलाह मिलेगी। मौसम का अनुमान आएगा और उसके हिसाब से पानी देने का समय बदला जाएगा।

स्वास्थ्य में AI:

भारत के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में देश के सभी अस्पतालों का डेटा अपलोड होता है। यह डेटा AI को फीड करने के बाद AI बनेगा — दुनिया का सबसे अनुभवी डॉक्टर।

AI जमा किए हुए डेटा पर प्रोसेस करता है। उसमें से अनेक पैटर्न्स ढूँढता है। आपका एक आधार नंबर है — वह सिर्फ आपका है। उसी नंबर पर आपका medical data feed किया जाए तो देश भर के किसी भी अस्पताल में आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री मिल सकती है। आपका आधार नंबर आपके मोबाइल से कनेक्टेड है।

भविष्य में आपकी sugar कब बढ़ने वाली है, heart attack कब आने की संभावना है, blood pressure की तकलीफ कब होने वाली है — इस तरह की सभी संभावित बीमारियों के बारे में AI आपको मोबाइल पर मेसेज भेजेगा। गाँव के primary health centre में इंटरनेट ज़रिए सबसे बड़े डाक्टर का मार्गदर्शन मिल सकता है। देश में बीमार पड़ने की संभावना कम होगी। बाल मृत्यु न के बराबर होगी। जन्मदर पर नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे।

शिक्षा में AI:

AI की सहायता से हर बच्चे की क्षमता का विचार करके उसके अनुकूल personal curriculum तैयार हो सकता है। हर भाषा में शिक्षा हो सकती है। एक विद्यार्थी कुछ काम कर रहा है — तो उसके चेहरे का analysis करके AI बताएगा कि वह कहाँ घबराया, कहाँ उत्साहित हुआ, हर काम में उसके आत्मविश्वास का स्तर क्या है। इन सब points पर teachers मिलकर काम करेंगे। देश भर में इंटरनेट के जरिए हर स्कूल AI सक्षम होगा ।

कानून में AI:

देश भर में वकीलों कोकेस लड़ने के लिए पुराने मामले पढ़ने पड़ते हैं, उनके नतीजे और संदर्भ अपने केस से जोड़ने पड़ते हैं। इसके लिए जूनियर की मदद लेनी पड़ती है। अब AI ने इस क्षेत्र में प्रवेश किया है। आपको सभी संदर्भ, पुराने मामलों के नतीजे कुछ सेकंड्स में हाजिर होते हैं। साथ में आपकेकेस से सबका संदर्भ क्या है — यह भी लिखकर आता है। कई प्रकार के ready-made drafts उपलब्ध होते हैं।

आम इंसान के जीवन के बहुत सारे क्षेत्रों में AI सुविधाजनक हो सकता है।

लेकिन क्या यह सचमुच होगा?

सत्ताधारी लोगों और सरकार को आम इंसान का जीवन सुधारने की इच्छा हो तो काम हो सकता है। लेकिन इसके लिए AI से जुड़ी तकनीकी और उसका डेटा — इस पर सरकार की मालकियत चाहिए। तभी यह संभव है। Private investors सिर्फ अपना फायदा देखेंगे।

सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि तकनीकी सरकारी हो या निजी — काम करने वाले मजदूर से लेकर शिक्षित कर्मचारी तक सब लोग अपने काम से बेदखल होने वाले हैं। वे कहाँ जाएंगे? उनका भविष्य क्या होगा?

अगले भाग में: AI और UBI — बेरोजगारी का जवाब या नया जाल?

विजय तांबे : सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक। मराठी में चार कथासंग्रह प्रकाशित। गोरा की किताब An Atheist with Gandhi का मराठी अनुवाद। चौथी औद्योगिक क्रांति और AI के सामाजिक परिणामों के अध्ययन में विशेष रुचि। वर्तमान में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा के सचिव।

“AI का वर्तमान विमर्श देश की असली समस्याओं और उनके कारणों से आपको दूर ले जाना है। इसे कभी तो रोकना होगा। यह लेख श्रृंखला उसे रोकने की शुरुआत है — और आपके सोचने की भी।”

AI और हम: एक सामाजिक पड़ताल

इस श्रृंखला के पिछले  भाग

भाग 1: Science और Technology का फर्क — और AI की असली चुनौती
Science और Technology को एक ही समझने की गलती हम अक्सर करते हैं। किसी प्रतिष्ठित technologist को हम scientist कह देते हैं, या किसी scientist को technologist बना देते हैं। AI की चुनौती को समझने के लिए दोनों के बीच का फर्क समझना जरूरी है।
https://mediaswaraj.com/science-technology-difference-ai-challenge/

भाग 2: क्या AI सिर्फ एक और कंप्यूटर प्रोग्राम है? नहीं।
प्रोग्रामिंग में इंसान कंप्यूटर को हर कदम का निर्देश देता है। AI में मशीन बड़ी मात्रा में डेटा से पैटर्न सीखती है और नए निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। यही फर्क आज की तकनीकी क्रांति की जड़ में है।
https://mediaswaraj.com/slug-programming-vs-ai-neural-network-explained/

भाग 3: AI और रोजगार — विकास या Jobless Growth?
कौन से रोजगार नष्ट होंगे, किस क्षेत्र में कितने प्रतिशत कामगारों पर असर होगा—यह World Economic Forum से लेकर NITI Aayog तक सबने बताया है। लेकिन नए रोजगार कितने बनेंगे, इस पर सबकी चुप्पी है।
https://mediaswaraj.com/ai-employment-jobless-growth-india/

भाग 4: AI और विषमता — क्या तकनीक असमानता बढ़ा रही है?
AI की वजह से आर्थिक असमानता क्यों बढ़ रही है? Oxfam Report क्या कहती है? Jobless Growth का मतलब क्या है? और लाचार समाज कैसे बन रहा है?
https://mediaswaraj.com/slug-ai-economic-inequality-india-hindi/

भाग 5  : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोचना . क्या हमारा दिमाग़ जंग खा रहा है? 

भाग 6 AI और राजनीति: कैसे बदलता है सोशल मीडिया आपका मन? 

आर्टिफिशियल   इंटेलिजेंस पर  विजय ताम्बे की लेखमाला 

📞 9869019727 | ✉️ vtambe@gmail.com

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