उत्तराखंड में राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा को मिल रहा जबरदस्त जनसमर्थन


दो सप्ताह से उत्तराखंड में चल रही राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा का अपेक्षा से अधिक प्रभाव  देखने को मिल रहा है।
उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं मंडल के प्रमुख शहर हल्द्वानी से आरंभ यह 40 दिवसीय सद्भावना यात्रा कुमाऊं मण्डल में आधा सफर कर चुकी है, अब यह यात्रा गढ़वाल मंडल में प्रवेश कर रही है। अभी तक करीब 2500 किलोमीटर से अधिक की यात्रा पूरी कर चुकी है।
इस राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा में ऐतिहासिक संस्मरणों, प्रकरणों, के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखंड की विरासत और उत्तराखंड के जन नायकों के योगदान को केन्द्र में रखकर समाज में सद्भावना, समन्वय, अहिंसा और परस्पर सौहार्द और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने का कार्य किया जा रहा है।
इस यात्रा का अभी तक का अनुभव बहुत सकारात्मक रहा है, लोगों ने स्वेच्छा से इसमें भागीदारी की है और अपने अपने विचारों से राष्ट्रीय सद्भावना के विचारों को मज़बूत किया है। यात्रा में जगह जगह सांस्कृतिक रैली, पैदल मार्च, एकल और बहु पक्षीय जनसंवाद, गोष्ठी, नुक्कड़ सभा, पोस्टर व बैनर प्रदर्शनी, पुस्तक/साहित्य प्रदर्शनी और पत्रकार गोष्ठियों के माध्यम से राष्ट्रीय सद्भावना का संदेश पहुंचाया जा रहा है।
इस यात्रा का मार्ग ऐसा निर्धारित किया गया है कि जिसमें उत्तराखंड के सभी जिलों और अंचलों में सद्भावना का संदेश पहुंचाया जा सके, इस दृष्टि से इस सद्भावना यात्रा में अभी तक नैनीताल, उधमसिंहनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली जिले के विभिन्न अंचलों तक अपना संदेश पहुंचाया है। उपचुनाव के मद्देनजर चम्पावत जिले को छोड़ दिया गया है। जबकि चारधाम यात्रा के रूट को व्यस्तता के कारण अभी स्थगित रखा गया है।
यात्रा के आरम्भिक चरण उत्तराखंड की तराई दिनेशपुर और रामनगर में सद्भावना को केन्द्र में रखकर जो सांस्कृतिक जुलूस निकाले गए उनका जबरदस्त प्रभाव स्थानीय जनता में देखा गया, जुलूस के मार्ग में स्थानीय नागरिकों और दर्शकों ने स्वेच्छा से जुलूस में लगाए जा रहे सौहार्द और एकता के नारों का न केवल स्वागत किया बल्कि स्वयं भी नारे लगाने वालों में शामिल हुए। मुक्तेश्वर, भटेलिया, सालमपट्टी, मुन्सियारी, कौसानी, अल्मोड़ा आदि में हुए सांस्कृतिक जुलूस में स्थानीय जनता की सहभागिता उत्साहजनक रही।
सद्भावना यात्रा के दौरान व्यक्तिगत सम्पर्क, संवाद, सामूहिक चर्चा, गोष्ठियां पत्रकार वार्ता, पोस्टर बैनर प्रदर्शनी, सर्वोदय और गांधी साहित्य के स्टाल और नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से राष्ट्रीय सद्भावना का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया है।
कुमाऊं मण्डल के नैनीताल में बुद्धीजीवियो, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पत्रकारों की गोष्ठी में  सद्भावना यात्रा के सम्भावित लक्ष्यों पर विशद विचार विमर्श हुआ था, जिसमें नैनीताल समाचार के सम्पादक और वरिष्ठ आंदोलनकारी राजीव लोचन साह ने यात्रा की आवश्यकता को इंगित करते हुए इसे समय की मांग बताया था और कहा कि यात्रा से उत्तराखंड की समन्वयवादी सद्भावना मजबूत होगी। 
 इतिहासकार पद्मश्री प्रो शेखर पाठक ने यात्रा के दौरान उत्तराखंड के जननायकों के कार्यों को रेखांकित करते हुए यात्रा से यह अपेक्षा की , यह यात्रा  उत्तराखंड के सांस्कृतिक धार्मिक और भाषाई विविधता में एकता के बारे में लोगों से संवाद स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में विविधता की फितरत है, यहां का भूगोल, जलवायु और सांस्कृतिक विविधता हमें एकता का संदेश देती है,  उत्तराखंड में करीब डेढ़ दर्जन भाषा और बोली बोलने वाले हैं जो आपसी सदभाव से रहते हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा सामाजिक जातिगत और धार्मिक मुद्दों को पर जन सामान्य से बातचीत करके वर्तमान परिस्थितियों में समन्वय और सद्भाव की बात करे। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संवैधानिक व्यवस्था है जिसको हर हाल में बढ़ाया जाना चाहिए। यात्रा में असंगठित मजदूरों व महिलाओं की स्थिति , किशोर- किशोरियों व युवाओं के मुद्दे व समस्याओं, पशुधन की स्थिति, प्राकृतिक संसाधनों की हिफ़ाज़त जैसे मुद्दों पर मौजूदा हालात का जायजा लिया जायेगा। इस यात्रा से कोई पाठ या सीख भी निकलनी चाहिए। 
अभी तक की यात्रा में यात्री दल ने उत्तराखंड की भाषाई, भौगौलिक, धार्मिक सांस्कृतिक विविधता में एकता का प्रत्यक्ष अनुभव भी किया है।
रामगढ़ मुक्तेश्वर की फलपट्टी में जहां जलवायु परिवर्तन से फलोत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव को प्रत्यक्ष अनुभव किया गया। वहीं खेतों और बगीचों की जमीनों पर बनने वाले होटल रिजोर्ट और बड़े बड़े निर्माण से स्थानीय  संरचना पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को भी महसूस किया गया। इसको लेकर स्थानीय निवासियों ने अपनी चिन्ताओं को यात्रीदल के साथ साझा किया था। रामगढ़ क्षेत्र के फलोत्पादन, और स्वरोजगार के अच्छे प्रयोगों और अनुभवों को दूसरे स्थानों पर साझा भी किया गया।
नथुवाखान और जैंती की सालम पट्टी में स्वतंत्रता सेनानियों के क्षेत्रों में उनके कार्यों और प्रभावों का अनुभव लेकर दूसरे इलाकों में शेयर किया गया। यात्रा में ऐसा गांव भी मिला जहां  लगभग 32 स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के आंदोलन में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। ब्रिटिश सरकार के ज़ुल्म से गांव के गांव खाली हो गए थे। इन इलाकों के जननायकों के योगदान को यात्रा में जगह जगह याद किया गया।जैंती में यात्री दल को वरिष्ठ सर्वोदयी व पर्वतीय ग्राम स्वराज मण्डल की मंत्री कर्मयोगी देवकी देवी का सानिध्य और आशीर्वाद मिला। 
पिथौरागढ़ में स्वतंत्रता सेनानियों के गांव हुड़ैती में सद्भावना यात्रा का जोरदार स्वागत हुआ, स्थानीय निवासियों ने राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा की मूल भावना का समर्थन किया यह कहा कि जननायकों ने सभी वर्गों और धर्मों के लिए देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की यादों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हुड़ैती गांव में एक राष्ट्रीय स्मारक और एक पुस्तकालय बनाने की मांग की।
राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा का दन्या, अस्कोट, जौलजीबी, मुन्यारी, नाचनी, मुवानी , पांखू, हिमदर्शन धरमधर कपकोट, बागेश्वर, में स्वागत किया गया और वहां स्थानीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। मुवानी में पीपलतड़ के रहवासी केन्द्र में स्थानीय समुदाय द्वारा आत्मनिर्भरता क्षेत्र में किए जारहे कार्यों और उनके अनुभव यात्री दल ने साझा किए।
अनासक्ति आश्रम कौसानी में वरिष्ठ सर्वोदयी और राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा की संरक्षिका राधा बहन के सानिध्य और अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम बहुत प्रभावकारी रहे,जिसमें पोस्टर- बैनर प्रदर्शनी, गोष्ठी और सांस्कृतिक जुलूस में विद्यालय की छात्राओं, स्थानीय निवासियों व्यापार मण्डल के प्रतिनिधियों के अलावा पर्यटकों ने भी भागीदारी की। राधा दीदी ने राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा को समय की ज़रूरत बताते हुए समाज,देश की एकता और सद्भावना और विश्व बंधुत्व की भावना बढ़ाने पर जोर दिया।
अभी तक यात्रा के दौरान सबसे प्रभावकारी नुक्कड सभाएं रहीं जिनमें यात्रीदल ने विभिन्न विषयों पर आमजन से सम्भाषण किया और सद्भावना की आवश्यकता को लोगों के सामने रखा। गोपाल भाई के जन गीतों से आरंभ होने वाली नुक्कड़ सभाओं में यात्रीदल के संयोजक भुवन भट्ट, उत्तराखंड सर्वोदय मण्डल के अध्यक्ष इस्लाम हुसैन चिपको आंदोलन के साहब सिंह सजवाण ने अपनी बात रखी वहीं अल्मोड़ा, कठपुड़िया,रानीखेत, द्वाराहाट, और चौखुटिया गनाई में राज्य आंदोलनकारी व जुझारू नेता पीसी तिवारी ने राज्य के विभिन्न मुद्दों पर जनपक्ष की बात रखते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि सद्भावना के माहौल में ही राज्य का विकास हो सकता है। और लोगों से विभाजनकारी साम्प्रदायिक तत्वों के ख़िलाफ़ खड़े होने का आह्वान किया। द्वाराहाट में हुई नुक्कड़ सभा में यात्रा के संयोजक उत्तराखंड सर्वोदय मण्डल के अध्यक्ष इस्लाम हुसैन ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के महान योगदान को याद करते हुए द्वाराहाट की महान विभूतियों विशेषकर स्व हरिदत्त काण्डपाल द्वारा सार्वजनिक जीवन में स्थापित उच्च मापदंडों की चर्चा की।
उत्तराखंड आंदोलनकारियों के लिए श्रद्धा का केन्द्र रहे गैरसैंण में राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा का स्वागत करते हुए जुझारू नेता कामरेड इंद्रेश मैखुरी ने सभी विभाजनकारी और साम्प्रदायिक शक्तियों का मुकाबला करने का आह्वान किया।
यात्री दल में सम्मिलित पद्मश्री बसंती बहन ने अपने हर सम्बोधन में लैंगिक सद्भावना को स्वस्थ्य समाज की निशानी बताते हुए जल जंगल जमीन की लूट और नशे के बढ़ते प्रचलन को देश और प्रदेश के लिए घातक बताया और इसे रोकने की अपील की। जगह जगह उनके कोसी नदी घाटी में किए गए कार्यो व अनुभवों को सुना और सराहा गया। स्कूलों में छात्र छात्राओं को इस बात से ख़ास ख़ुशी हुई कि उनके बीच पद्मश्री से सम्मानित बसंती बहन  पहुंची हैं।
कुमाऊं मंडल की यात्रा के आखिरी हिस्से में सल्ट खुमाड़ में राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा का स्थानीय निवासियों ने बहुत जोश़ के साथ स्वागत किया। स्थानीय श्रमयोग की टीम और रचनात्मक महिला मंच द्वारा सल्ट की वीर बलिदानियों की स्मृति में बने शहीद स्थल में आयोजित सभा में सल्ट की जनता की ओर से राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा का स्वागत किया गया, श्रमयोग के अजय जोशी ने सल्ट के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को विलक्षण बताते हुए राष्ट्रीय सद्भावना यात्रा को समय की आवश्यकता और स्वतंत्रता सेनानियों और बलिदानियों के आदर्श के अनुरूप बताया।
आदर्श इंटर कालेज देवायल सल्ट में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों, अध्यापकों और छात्रों ने यात्री दल द्वारा लगाई पोस्टर बैनर और पुस्तक प्रदर्शनी से यात्रा के उद्देश्यों को समझा, वहां आयोजित सभा में लोकगायक गोपाल भाई ने जनगीत और अपनी बातचीत से यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।इस यात्रा दल के संयोजक भुवन पाठक ने अभी तक इस यात्रा को जो जनसहयोग मिला है उसका सभी सहयोगी सामाजिक कार्यकर्ताओं, और जनसंगठनों, का आभार व्यक्त किया है। इस यात्रा में अभी तक जो लोग सम्मिलित रहे हैं उनमें चिपको आंदोलनकारी साहिब सिंह सजवाण, उत्तराखंड सर्वोदय मण्डल से रीता इस्लाम, सुरेन्द्र बरोलिया,। नरेंद्र कुमार, राजीव गांधी फाउन्डेशन से विजय महाजन, परमानंद भट्ट, हिदायत आज़मी, प्रयाग भट्ट, रजनीश और रेवा सम्मिलित रही हैं।

इस्लाम हुसैन

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