शिखा पाल के समर्थन में जुटी पार्टियां, एक दिन का सामूहि​क धरना

108 दिनों से पानी की टंकी पर धरने में बैठी शिखा पाल के समर्थन में कई पार्टियां जुटीं और 27 नवंबर 2021 को सभी ने मिलकर एक दिन के सामूहि​क धरने पर बैठने की योजना तैयार की है।

मीडिया स्वराज डेस्क

लखनऊ : 27 नवंबर 2021, शनिवार को सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) और युवा शक्ति संगठन निशातगंज, लखनऊ स्थित शिक्षा निदेशालय पर पानी की टंकी के नीचे, जिस पर शिखा पाल 108 दिनों से सौ फ़ीट की ऊंचाई पर शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन में बैठी हुयी हैं, के समर्थन में एक दिन का धरना करेंगे। यह जानकारी सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के महासचिव संदीप पाण्डेय, युवा शक्ति संगठन के संयोजक गौरव सिंह और सोशलिस्ट युवजन सभा के महासचिव मोहम्मद अहमद खान ने मीडिया को दी है।

भाजपा का चरित्र लोकतंत्र विरोधी है। सिर्फ शिक्षकों की ही बात नहीं है। आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्तियों, रोजगार सेवक, स्वच्छताग्रही की सेवा शर्तों को लेकर अथवा पुलिस, आदि की भर्ती या फिर मंहगाई ऐसा नजर आता है कि सरकारी दावों के विपरीत लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। यदि सरकार ने लोगों की बात नहीं सुनी तो आने वाले चुनाव में जनता अपने आप उसे सबक सिखाएगी।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार नारी के सम्मान और नए भारत की बात करती है और साढ़े चार लाख लोगों, जिसमें डेढ़ लाख महिलाएं हैं, को रोजगार देने का दावा करती है।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार नारी के सम्मान और नए भारत की बात करती है और साढ़े चार लाख लोगों, जिसमें डेढ़ लाख महिलाएं हैं, को रोजगार देने का दावा करती है। किंतु शिखा पाल, जो 26,000 शिक्षकों के रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती हेतु आकांक्षी हैं, अपने साथियों के साथ 157 दिनों से आंदोलनरत हैं एवं खुद 108 दिनों से शिक्षा निदेशालय, निशातगंज, लखनऊ की पानी की टंकी पर जमीन से 100 फीट ऊपर लगातार बैठी हुई हैं, लेकिन योगी सरकार उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। यह साबित करता है कि योगी सरकार सिर्फ दिखावा व खोखले दावे करती है लेकिन वास्तव में जनता के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन है।

यह समझ से परे है कि जब सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है (शहर के पास वाले विद्यालयों को छोड़ शायद ही कोई प्राथमिक विद्यालय ऐसा मिलेगा, जिसमें पांच शिक्षक पूरे मिलेंगे) और हाल के वर्षों में बेरोजगारी से नवजवान/नवयुवतियां और परेशान हुए हैं तो सरकार इन रिक्त पदों को भरने में देरी क्यों कर रही है?

इस संवेदनहीन सरकार से तो हमें कोई उम्मीद है ही नहीं। किसान आंदोलन से साबित हो गया है कि भाजपा का चरित्र है कि जब तक उसे चुनाव हारने का डर नहीं दिखाई पड़ेगा, तब तक वह अपनी मनमानी करती रहेगी।

इस संवेदनहीन सरकार से तो हमें कोई उम्मीद है ही नहीं। किसान आंदोलन से साबित हो गया है कि भाजपा का चरित्र है कि जब तक उसे चुनाव हारने का डर नहीं दिखाई पड़ेगा, तब तक वह अपनी मनमानी करती रहेगी। भाजपा सरकार की नीतियां जन विरोधी होती हैं और सरकारें क्रूर व निर्दयी, जो लोगों में डर पैदा करके सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती हैं। उन्हें किसी भी विरोध की आवाज को सिर्फ दबाना आता है। जब तक उनकी मजबूरी न हो जाए, तब तक वे संवाद नहीं करतीं।

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया), युवा शक्ति संगठन, सोशलिस्ट युवजन सभा व रिहाई मंच शिक्षक पदों के लिए अभ्यर्थियों के आंदोलन का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि उनकी मांग पूरी तरह जायज है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो हम सीधे तौर पर उनके साथ आंदोलन में भी शामिल होंगे।

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