राजनीति
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सुनिए 1975 इमर्जेंसी के किस्से उन लोगों की ज़ुबानी जिन्होंने लोकतंत्र बचाने के लिए सब कुछ झेला
(मीडिया स्वराज़ डेस्क ) 26 जून 1975 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपनी सरकार को बचाने के…
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बुखार और आपातकाल सूचना देकर नहीं आते, लक्षणों से ही समझना पड़ेगा
-श्रवण गर्ग, पूर्व प्रधान सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नई दुनिया, इंदौर से कुछ लोगों को ऐसा क्यों महसूस हो रहा…
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इमर्जेंसी : जब काग़ज़ के पुर्ज़े ही क़ीमती स्मृति चिन्ह बन जाते हैं !
-श्रवण गर्ग, पूर्व सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नई दुनिया पच्चीस जून ,1975 का दिन।पैंतालीस साल पहले।देश में ‘आपातकाल’ लग चुका था।हम…
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इंदिरा गांधी चुनाव केस, जब रिपोर्टर हाईकोर्ट की छत से कूद गया
राम दत्त त्रिपाठी, राजनीतिक विश्लेषक 12 June 1975 तब आज की तरह टीवी चैनल्स नहीं थे. मोबाइल फ़ोन और इंटर्नेट…
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प्रधानमंत्री मोदी की सीधी आलोचना पर कांग्रेस में मतभेद, राहुल सख़्त
(मीडिया स्वराज डेस्क) प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी आलोचना को लेकर कांग्रेस के बड़े नेताओं में एक राय नहीं…
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वे दिन वे लोग : राव बीरेंद्र सिंह की साफ़गोई
— त्रिलोक दीप, वरिष्ठ पत्रकार राव बीरेंद्र सिंह मेरे बहुत अच्छे मित्र थे। बेशक़ वह कई बार केंद्रीय मंत्री भी…
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चीन से हिंसक झड़प : जनता से भी तो पूछिए कि वह क्या चाहती है !
-श्रवण गर्ग, पूर्व प्रधान सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नई दुनिया पूर्व सेना प्रमुख और वर्तमान में केंद्रीय सड़क,परिवहन एवं राष्ट्रीय…
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