अध्यात्म
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संकुचित देह-बुद्धि स्वधर्म में बाधक
स्वधर्म हमें इतना सहज प्राप्त है कि हमसे अपने-आप उसका पालन होना चाहिए। परंतु अनेक प्रकार के मोहों के कारण…
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दलित चेतना के अग्रदूत : क्रांतिकारी संत बसवेश्वर
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी क्रन्तिकारी संत बसवेश्वर का जन्म सन 1127 के आसपास वर्त्तमान कर्नाटक के बीजापुर जनपद के इंगालेश्वर बागेवाड़ी…
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शेख निज़ामदुद्दीन औलिया: शांति एवं सामाजिक सद्भाव के युगद्रष्टा
9 अक्टूबर जन्मदिवस पर विशेष डॉ. मोहम्मद आरिफ़ (लेखक जाने माने इतिहासकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं) भारत के सांस्कृतिक और…
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ईशावास्य उपनिषद में समग्र जीवन का दर्शन
विनोबा का आज का वेद चिंतन : ईशावास्य उपनिषद प्रास्ताविक प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा भावे कहते हैं कि…
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स्वधर्म के सहारे ही उन्नति की राह
*गीता प्रवचन दूसरा अध्याय* विनोबा का गीता प्रवचन प्रस्तुति : रमेश भैया स्वधर्म के सिलसिले में उपनिषद् में एक सुंदर…
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आत्मज्ञान और समत्वबुद्धि
गीता प्रवचन – विनोबा – दूसरा अध्याय विनोबा के गीता प्रवचन की प्रस्तुति : रमेश भैया भाईयों, पिछली बार हमने…
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अथर्ववेद में लोकतंत्र की व्याख्या
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी वैदिक काल में राजा का बेटा ही राजा होगा, ऐसा नहीं था। यह अथर्ववेद के एक मन्त्र…
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ॠजु-बुद्धि का अधिकारी
गीता प्रवचन – विनोबा – पहला अध्याय विनोबा के गीता प्रवचन कीप्रस्तुति : रमेश भैया आगे की सारी गीता समझने…
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आज का वेद चिंतन : वेद और बुद्ध
बुद्ध भगवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा था : भाइयों *न हि वेरेन वेरानि सम्मन्तीध कुदाचंन। अवेरेन च सम्मन्ति एस…
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आज का वेद चिंतन विचार – वेद और ईसाई
ईसाई धर्म के भारत में आने से पहले हिन्दुस्तान में अनेकविध दर्शन विकसित हो गये थे। वेद, उपनिषद, भागवत धर्म,…
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