Tag: महात्मा गांधी
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गॉंधी का कराची प्रस्ताव और आज का भारत: गांधी, मनरेगा कॉर्पोरेट और लोकतंत्र
राम दत्त त्रिपाठी आज जब ग्रामीण रोज़गार योजना मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाया जा रहा है और सरकार अपनी ज़िम्मेदारी राज्यों पर डालते हुए नई योजनाएँ पेश करती है, तो यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं लगता। यह उस सोच में बदलाव का संकेत है, जिस पर आज़ादी के बाद भारत का लोकतंत्र…
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गांधी युग : इतिहास की गवाही देती एक डायरी: हस्ताक्षर और संदेश
-अखिलेश झा भारत के कई हिस्सों में नव वर्ष का आरम्भ दीपावली से होता है। कार्तिक माह को पुण्यतम माह कहा जाता है और साल उसी से शुरू होता है। विशेषकर पश्चिमी भारत में। पारम्परिक व्यवसायी समाज में भी दीपावली पर पुराना हिसाब बराबर कर, हिसाब की नई किताब शुरू की जाती थी। कई घरानों…
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फ़िल्म “मैंने गांधी को क्यों मारा” की रिलीज पर रोक लगाने की मांग
महात्मा गांधी की हत्या करने के बाद भी उनकी आत्मा तृप्त नहीं हुई है. होती भी कैसे? गांधी की हत्या के बाद भी गांधी सबके दिलों में जिंदा रहेंगे, ये बात उन्हें तब मालूम न थी, जब बार बार उन्होंने गांधी की हत्या की योजना बनायी और उसे अंजाम देने की कोशिश की. गांधीजी को…
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भारत सोवियत रूस का नया संस्करण कभी नहीं बनेगा : नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का इतिहास बोध भारत के साथ साथ विश्व इतिहास की गहन समझ से भी लैस था। सुभाष चन्द्र बोस के इतिहास बोध में भारत एक प्राणवान आर्थिक, राजनैतिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक सत्ता है। यहां मैं नेताजी के इतिहासबोध पर चर्चा करूंगा।
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गांधी जी की हत्या के कुल छह प्रयास हुए
1915 में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका छोड़कर भारत आ गये। उस दिन से 30 जनवरी 1948 को मारे जाने के बीच, उनकी सुनियोजित हत्या के कुल छह प्रयास हुए। जो लोग उनकी हत्या के पीछे पाकिस्तान को दिये जाने वाले 55 करोड़ रुपये को वजह बताते हैं, उन्हें जवाब देना चाहिए कि 55 करोड़ का…
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गांधी और धर्म संसद
हिन्दू महासभा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आदि हिंदू संगठनों के पास हिंदू भारत की अपनी कुछ व्याख्या थी जो उस समय स्पष्ट नहीं थी और आज भी बिल्कुल अस्पष्ट हैं। अभी हाल में ही हरिद्वार और रायपुर में संपन्न हुयी धर्म संसद में मुस्लिमों और ईसाइयों के प्रति जो घृणा फैलाई गयी और मरने मारने…
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“भारत – ब्रह्मचर्य, राम और भगवद् गीता का संगम”
जब तक विचारों का इतना अंकुश प्राप्त नहीं होता कि इच्छा के बिना एक भी विचार मन में न आये, तब तक ब्रह्मचर्य सम्पूर्ण नहीं कहा जा सकता। विचार-मात्र विकार हैं, मन को वश में करना; और मन को वश में करना वायु को वश में करने से भी कठिन है।
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13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण ही नहीं, बापू की 105 साल पुरानी नाराजगी भी दूर करेंगे PM मोदी
कौन भूल सकता है 4 फरवरी 1916 का वह दिन, जब महात्मा गांधी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के लिये बनारस पहुंचे थे. और उद्घाटन सत्र को संबोधित करने से पहले वे त्रिलोकीनाथ भगवान शंकर के पूजन अर्चन के लिये काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे थे.

