13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण ही नहीं, बापू की 105 साल पुरानी नाराजगी भी दूर करेंगे PM मोदी

बाबा की नगरी और उनके मंदिर तक पहुंचने के तंग व गंदे रास्तों से होकर जब वे गुजरे तो 1903 की अपनी काशी यात्रा का जिक्र किया. उन्होंने कहा, 13 साल बाद यहां आने का सौभाग्य मिला, लेकिन यहां की गंदगी देख मुझे हिंदुओं की धार्मिक आस्था को लेकर दुख हो रहा है. क्या उन्हें इस बात का जरा भी दुख नहीं कि उनके बारे में दूसरे धर्म के लोग क्या कहेंगे?

कौन भूल सकता है 4 फरवरी 1916 का वह दिन, जब महात्मा गांधी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के लिये बनारस पहुंचे थे. और उद्घाटन सत्र को संबोधित करने से पहले वे त्रिलोकीनाथ भगवान शंकर के पूजन अर्चन के लिये काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे थे. बाबा की नगरी और उनके मंदिर तक पहुंचने के तंग व गंदे रास्तों से होकर जब वे गुजरे तो 1903 की अपनी काशी यात्रा का जिक्र किया. उन्होंने कहा, 13 साल बाद यहां आने का सौभाग्य मिला, लेकिन यहां की गंदगी देख मुझे हिंदुओं की धार्मिक आस्था को लेकर दुख हो रहा है. क्या उन्हें इस बात का जरा भी दुख नहीं कि उनके बारे में दूसरे धर्म के लोग क्या कहेंगे?

बापू ने अगले दिन बीएचयू में सार्वजनिक तौर पर इस पर नाराजगी जताते हुये कहा था, 13 साल बाद भी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र की तंग गलियों में गंदगी देखा. यह सब देखकर मैं बेहद आहत और नाराज हूं.

BHU में अपने संबोधन में महात्मा गांधी ने कहा था कि इस महान मंदिर में कोई अजनबी आए, तो हिंदुओं के बारे में उसकी क्या सोच होगी और तब जो वह हमारी निंदा करेगा, क्या वह जायज नहीं होगी? क्या इस मंदिर की हालत हमारे चरित्र को प्रतिबिंबित नहीं करती? एक हिंदू होने के नाते मैं जो महसूस करता हूं, वही कह रहा हूं. अगर हमारे मंदिरों की हालत आदर्श नहीं है, तो फिर अपने स्वशासन के मॉडल को हम कैसे गलतियों से बचा पाएंगे? जब अपनी खुशी से या बाध्य होकर अंग्रेज इस देश से चले जाएंगे, तो इसकी क्या गारंटी है कि हमारे मंदिर एकाएक पवित्रता, स्वच्छता और शांति के प्रतिरूप बन जाएंगे?

8 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम परियोजना का शिलान्यास करते हुये विश्वनाथ मंदिर से कहा था कि अभी तक बाबा विश्वनाथ मकानों और दीवारों में बंद और जकड़े हुए थे. महात्मा गांधी भी जब काशी आए थे, तो उनके मन में यह पीड़ा थी कि भोले बाबा का स्थान ऐसा क्यों है. BHU के एक कार्यक्रम में बापू अपने मन की व्यथा बताने से खुद को रोक नहीं पाए थे. श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की वजह से अब पूरी दुनिया में काशी की एक अलग पहचान होगी.

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हालांकि, अब 54 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में बनाए गए श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की साफ-सफाई की अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है. इस वजह से धाम क्षेत्र और उसके आसपास दूर-दूर तक गंदगी का नामोनिशान नहीं होगा.

BHU के सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने कहा कि आस्था के स्थल ऐसे होने ही चाहिए कि वह एक विशिष्ट भाव का बोध कराएं. वहां साफ-सफाई से लेकर हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए. काशी तो वैसे भी अनादि काल से ही आस्था और भक्ति का एक बड़ा केंद्र है. मेरी जानकारी में काशी में ऐसा ऐतिहासिक कार्य हुआ है, जिसे लेकर कोई विवाद या मुकदमेबाजी नहीं हुई. अब आज विश्वनाथ धाम की भव्यता देख हर कोई अभिभूत है.

यानि कि अब यह कहना ही होगा कि 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के लिये पहुंचेंगे तो मंदिर के लोकार्पण के साथ साथ वे 105 साल पहले साफ सफाई को लेकर महात्मा गांधी द्वारा जताई गई नाराजगी भी दूर कर देंगे.

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