भारत को कोरोना मुक्त करने के लिए टीकाकरण ही प्रमुख हथियार बनेगा-डा सूर्यकांत

डॉ. सूर्यकान्त
डा सूर्यकांत

30/12/2019 से कोरोना की यात्रा प्रारम्भ हुयी थी . कहते हैं कि यह वायरस चीन के वुहान शहर की मीट मण्डी से निकला और इसने पूरी दुनियां मे कोहराम मचा दिया। शीघ्र ही इस वायरस का प्रकोप दुनिया के 200 से अधिक देशों में दिखायी देने लगा। 30/01/2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization WHO ने इस महामारी को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया। क्योकि इस बीमारी का पहला रोगी चीन में 2019 मे मिला अतः इसका नाम कोविड-19 रखा गया।

आज भारत में इसकी दूसरी लहर तथा अन्य कई देशों में तीसरी व चौथी लहर भी दिखाई दे रही है। दुनियां में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की कुल संख्या लगभग 17 करोड़ पहुॅच चुकी है, इससे मरने वाले की संख्या लगभग 34 लाख हो चुकी है। यह आपदा 21वीं सदी की अब तक की सबसे बड़ी आपदा साबित हो चुकी है। इसने लगभग 100 साल पहले हुयी एक बड़ी आपदा स्पैनिष फ्लू की याद दिला दी है, जिससे पुरी दुनियां मे लगभग 05 करोड़ लोगो की मैात हुयी थी।

भारत मे भी कोरोना ने अपना विकराल रूप धारण किया हुआ है। अब तक लगभग 2.5 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके है तथा लगभग 2.5 लाख लोगो की मृत्यु हो चुकी है। उत्तर प्रदेष मे कोरोना की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो रही है। उत्तर प्रदेश मे अब तक लगभग 16 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके है तथा लगभग 17 हजार लोगो की मृत्यु हो चुकी है।
पिछले वर्ष कोरोना के प्रकोप के प्रारम्भ में ही भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश मे तीन महीने का सम्पूर्ण लॅाकडाउन लगाया गया था। जिसका उद्देश्य कोरोना की संक्रमण की चेन को तोड़ना था। इस दौरान (25/03/2020 से 25/06/2020) कोरोना संक्रमण भी कम हुआ, वायु प्रदुषण कम हुआ तथा अन्य संक्रामक बिमारियां व दुर्घटनाएं भी कम हो गयी थी लेकिन जैसे ही धीरे-धीरे अनलॅाक की प्रकिया प्रारम्भ हुयी और जुलाई से कोरोना संक्रम्रितो की संख्या बढ़ने लगी तथा 16 सितंबर 2020 को पिछले वर्ष के सर्वाधिक कोरोना रोगी (लगभग 98 हजार) चिन्हित किये गये।

अब तक कोरोना की कोई नयी दवा नहीं विकसित हो पायी है लेकिन कई प्रचलित दवाओं को कोरोना के विरूद्ध अजमाया जा रहा है। इसमें सबसे पहला नाम हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन का आता है . लेकिन थोड़े दिनों मे यह दवा बेकार साबित हुयी।

उत्तर प्रदेश के एक बडे़ चिकित्सा संस्थान मे प्रारंभ में ही स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ को यह दवा कोरोना के बचाव के लिए दी गयी लेकिन लगभग 17 प्रतिशत चिकित्सा कर्मियों मे इस दवा का कोई न कोई कुप्रभाव देखा गया।

इसके पश्चात प्रचलित दवायें जैसे Azithrowmycin,Ivermectin, Doxycycline,Remdisvir तथा अन्य एन्टीवायरल दवांए व Plasma Therapy भी प्रयोग में लायी गयी।

डा0 सूर्यकान्त व भारत के अन्य प्रमुख विषेषज्ञों ने आइवरमेक्टिन में रूचि दिखाई क्योकि यह दवा सस्ती, सहजता से उपलब्ध कुप्रभाव रहित तथा पुरी दुनियां मे पिछले 40 वर्ष से अधिक बहुत सारी बीमारियों मे इस्तेमाल की जा रही थी।

जब प्रयोगशाला में इस दवा को कोरोना वायरस के खिलाफ अध्ययन किया गया तो पाया गया यह दवा कोरोना वायरस को मानव शरीर की कोषिकाओं के अन्दर स्थित न्यूक्लस में प्रवेश नहीं करने देती है और वायरस की संख्या को तेजी से घटाती है। डा0 सूर्यकान्त व उनके साथी विषेषज्ञों ने जुलाई 2020 में आइवरमेक्टिन् के सभी पहलुओँ का अध्ययन करते हुए एक श्वेत पत्र प्रकाशित किया, जिसका संज्ञान विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी बेवसाइट पर प्रदर्शित करते हुए लिया।

उत्तर प्रदेष सरकार ने भी आइवरमेक्टिन मे रूचि दिखाते हुए एक विषेषज्ञ समिति का गठन किया एवं डा0 सूर्यकान्त को इस समिति में External Expert के रूप मे शामिल किया। इस समिति के सिफारिषो के आाधार पर 06/08/2020 आइवरमेक्टिन एवं डॅाक्सीसाइक्लिन प्रोटोकाल को कोविड के asymptomatic and mild symptomatic रोगियों के उपचार के लिए तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं कोरोना रोगी के परिजनों के बचाव के लिए जारी किया।

इस तरह उत्तर प्रदेष भारत का पहला राज्य बना जिसने आइवरमेक्टिन आधारित प्रोटोकाल को उपचार एवं बचाव के लिए शासनादेश जारी किया।उत्तर प्रदेश की इस पहल के बाद आज भारत मे कई राज्य (महाराष्ट्र, गोवा , पष्चिम बंगाल, आसाम, केरल, कर्नाटक आदि) आइवरमेक्टिन आधारित प्रोटोकाल को कोविड उपचार एवं बचाव के लिए प्रयोग कर रहे है। इण्डियन कांउन्सिल अॅाफ मेडिकल रिसर्च के नये कोविड ट्रीटमेन्ट प्रोटोकाल मे भी शामिल किया गया है, जबकि बहुचर्चित दवायें जैसे रेमडेसविर, प्लाज्मा थेरेपी तथो टोसिलीजुमैब को कोरोना के मुख्य धारा उपचार से हटाकर आफ लेविल ट्रीटमेन्ट में रखा गया है। दुनियां मे इस समय सबसे ज्यादा शोध आइवरमेक्टिन पर ही हो रहा है। इससे संम्बंधित 40 क्लीकिल ट्रायल अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर एवं 08 भारत मे चल रहे है। हैरानी की बात ये है विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी आइवरमेक्टिन को क्लीनिकल ट्रायल मे प्रयोग करने को ही बढ़ावा देने को कहा है। जबकि भारत, बंगला देष जैसे विकासशील देश व आस्ट्रेलिया , स्पेन, इटली आदि विकसित देषो में आइवरमेक्टिने बडे़ पैमाने पर प्रयोग किया जा रहा है।
हॅाल ही मे कई अन्र्तराष्ट्रीय एजेन्सियों ने यह साफ लिखा है कि कोरोना रोगियों की जान रेमडेसविर से नही बचती है बल्कि रोगी की जान बचाने मे अॅाक्सीजन व स्टीराॅयड ज्यादा कारगर साबित हो रहे है।
कोविड के बचाव मे सबसे मजबूत हथियार तो कोविड वैक्सिन ही है, जो कि इजराइल के उदाहरण से स्पष्ट है। इजराइल ने अपनी 81 प्रतिषत जनसंख्या को टीकाकरण कराकर अपने देष को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया है। जबकि अभी भी भारत के दुनियंा के कई देषो मे लॅाकडाउन का प्रयोग किया जा रहा है। के0जी0एम0यू0 के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष व आई0एम0ए0-ए0एम0एस0 के राष्ट्रीय वाॅयस चेयरमैन डा0 सूर्यकान्त ने कोविड टीकाकरण के शुभाआरम्भ के पहले दिन ही 16/01/2021 ने कोविड टीकाकरण की पहली डोज तथा बाद मे 15/02/2021 को दूसरी डोज लगवाकर सभी को यह संदेश देने की कोशिश की है की भारत को भी कोरोना मुक्त करने के लिए टीकाकरण ही प्रमुख हथियार बनेगा। नेशनल हेल्थ मिषन ने कोविड टीकाकरण की एडवोकेसी के लिए डा0 सूर्यकान्त को अपना ब्रान्ड एम्बेसडर ही बनाया है। डा0 सूर्यकान्त का मानना है कि देश में शीघ्र ही लगभग 90 करोड़ लोगो को कोविड टीका की दोनो डोज (अर्थात कुल 180 करोड़ डोज) जब लग जायेंगी, जिसके फलस्वरूप कोरोना के विरूध सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जायेगी तब भारत भी कोरोना मुक्त हो सकेगा।

कृपया इसे भी देखें :


अतः डा0 सूर्यकान्त सभी से यह अपील करते है कि वैक्सीन को चुने वायरस का नही तथा वैक्सीन के पहले एवं बाद में भी घर से बाहर निकलने पर लोगो से 02 गज की दूरा बनाकर रखे, मिलने पर नमस्ते करे (हाथ न मिलायें), हाथ साबुन पानी से धुलते रहे व मास्क अवश्य लगायें । भीड़- भाड़ इलाके से घर वापस अपने पर साबुन पानी से स्नान करे व भाप प अवश्य लें । अपने खान पान मे हरी सब्जियां और मौसमी फल अवष्य शामिल करे। बुजर्ग बीमार, गर्भवती महिलाये व बच्चो का विषेष ध्यान रखे। परिवार के साथ मस्ती एवं खुशी का वातावरण बनाये रखे और गरीब कोविड रोगियों को प्लस अॅाक्सीमीटर, दवायें व ऑक्सीजन की यथासम्भव सहायता करे।

डा0 सूर्यकान्त
प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग, के0जी0एम0यू0 लखनऊ
नेशनल वाॅयस चेयरमैन, आई0एम0ए0 एकेडमी अॅाफ मेडिकल स्पेशलटिज
ब्रान्ड एम्बेसडर, कोविड टीकाकरण, नेषनल हेल्थ मिशन।

support media swaraj

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eighteen − 1 =

Related Articles

Back to top button