चांडिल बांध विस्थापितों का आंदोलन: कॉरपोरेटाइजेशन और पुनर्वास हक पर जंग का ऐलान

 विस्थापित मुक्ति वाहिनी की हुंकार: चांडिल बांध पर्यटन को कॉरपोरेट के हवाले करने का विरोध

चांडिल (सरायकेला-खरसावां , झारखंड ): स्वर्णरेखा परियोजना के चांडिल बांध विस्थापितों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। गुरुवार को चांडिल बांध स्थित नौका विहार स्थल पर विस्थापित मुक्ति वाहिनी (विमुवा) की एक अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में सरकार की पर्यटन नीतियों और विस्थापितों की अनदेखी के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट किया गया।

 विकास की वेदी पर तीन पीढ़ियों का बलिदान

 स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के तहत 80 के दशक में चांडिल बांध का निर्माण हुआ था। इसके लिए 100 से अधिक गांवों को जलमग्न होना पड़ा और हजारों परिवारों ने अपनी उपजाऊ जमीन और पुरखों का घर देश के विकास के लिए त्याग दिया। हालांकि, चार दशक बीत जाने के बाद भी विस्थापितों के पुनर्वास और अधिकारों की लड़ाई अधूरी है। वर्तमान में चांडिल बांध न केवल सिंचाई का स्रोत है, बल्कि झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र भी बन चुका है।

पर्यटन के ‘कॉरपोरेटाइजेशन’ का विरोध

विस्थापित मुक्ति वाहिनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में  आरोप लगाया है कि स्वर्णरेखा परियोजना प्रशासन अब विस्थापितों के पुनर्वास अधिकारों को शिथिल करने का प्रयास कर रहा है।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि चांडिल बांध में पर्यटन के संचालन का अधिकार किसी विस्थापित समूह के बजाय एक गैर-विस्थापित बाहरी एजेंसी को सौंप दिया गया है।

संगठन का दावा है कि केंद्र सरकार ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के तहत सरकारी खर्च पर विकसित पर्यटन क्षेत्रों को पीपीपी मॉडल के बहाने बड़े कॉरपोरेट घरानों और बाहरी व्यापारियों के हवाले करने की साजिश रच रही है।

आगामी आंदोलनों की रूपरेखा

विस्थापितों ने अपने हक के लिए संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया है, जिसके तहत निम्नलिखित कार्यक्रम तय किए गए हैं:

 * 30 अप्रैल (जोयदा शहादत दिवस): शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद एक जत्था पदयात्रा करते हुए चांडिल बांध पहुंचेगा और अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेगा।

 * बिरसा मुंडा शहादत दिवस: इस अवसर पर चांडिल स्थित स्वर्णरेखा परियोजना कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।

 * आंदोलन के 40 वर्ष: वर्ष 2027 में विस्थापित आंदोलन के 40 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष ‘संघर्ष और निर्माण’ कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं विस्थापित

 * कृतज्ञता पैकेज और पुनर्वास स्थलों का स्पष्ट सीमांकन।

 * विस्थापित परिवार के बच्चों के लिए मॉडल आवासीय विद्यालय की स्थापना।

 * चांडिल पॉलिटेक्निक में विस्थापित बच्चों के लिए 50% सीटों का आरक्षण।

 * लिफ्ट इरिगेशन, डीप बोरिंग और पालना जलाशय योजना को अविलंब पूरा करना।

बैठक में इनकी रही उपस्थिति:

इस बैठक में मुख्य रूप से श्यामल मार्डी, नारायण गोप, देवेंद्र महतो, अरविंद अंजुम, विकास कुमार, किरण बीर, डोमन बास्के और अन्य सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जो अधिकार संघर्ष से हासिल किए गए हैं, उनकी रक्षा भी संघर्ष के जरिए ही की जाएगी।

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 “चांडिल बांध के पास ‘होटल आहार सृजन’ के सामने खड़े विस्थापित मुक्ति वाहिनी (विमुवा) के सदस्यों का एक समूह। वे अपने हाथों में विरोध प्रदर्शन के पोस्टर और बैनर पकड़े हुए हैं, जिन पर ‘पर्यटन का कॉरपोरेटाइजेशन बंद करो’ और ‘विस्थापितों का पुनर्वास हमारा हक है’ जैसे नारे लिखे हैं। तस्वीर में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट होकर खड़े नजर आ रहे हैं।”

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