आओ दीप जलायें मिलजुल

डा चन्द्रविजय चतुर्वेदी –प्रयागराज

–प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवाहन पर 5 अप्रैल को रात्रि 9 बजे  होने वाले दीपप्रज्वलन का अभिषेक करते हुए एक कविता –आओ दीप जलाएं -राष्ट्र को समर्पित है .

चंद्र विजय चतुर्वेदी

आओ दीप जलाएं —
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आओ दीप जलाएं
आओ दीप जलाएं संग संग
आओ दीप जलाएं मिलजुल
एक दीप बाहर जलना है
एक दीप अंतस के तम
को भी दिखलायें
ऐसा दीप जलाओ मनुआ
स्नेह में डूबे
मन की बाती
ज्ञान के लौ से
तामस मिटाये
भा –प्रकाश में रत भारत
जगमग जगमग जगमगाये
आओ दीप जलाएं भाई
पाखण्ड द्वेष अहंकार
असहिष्णुता अविश्वास
का मिटे अन्धकार
अमृतत्व प्रकाश का
मानव जीवन में घुल जाये
बाहर भीतर के उजियारे से
जन जन के मन समान हों
चित्त परस्पर जुड़ जाएँ
शिव संकल्प राष्ट्र का दृढ़ हो
नए आस विश्वास जगें
ऊर्जस्वी हो जन जन की आत्मशक्ति
संत्रासों से मानव को मुक्ति मिले
कल्याणमयी भावभूमि पर
आओ दीप जलाएं जन जन
आओ दीप जलाएं
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