न्यूज़ मीडिया का भविष्य पूँजी , तकनीक और सत्ता तय करेगी : राम दत्त त्रिपाठी

न्यूज़ मीडिया को विज्ञापनों के चंगुल से छुटकारा दिलाना होगा

न्यूज़ मीडिया का भविष्य पूँजी, तकनीक और सत्ता तय करेगी. पूँजी तकनीक को अपने हिसाब से चलाती है और सत्ता के साथ मिलकर न्यूज़ मीडिया को कंट्रोल कर रही है. बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी ने न्यूज़ मीडिया पर पूँजी और सत्ता के बढ़ते नियंत्रण से आगाह करते हुए समाज से न्यूज़ मीडिया के लिए टिकाऊ बिज़नेस माडल विकसित करने का आह्वान किया ,क्योंकि स्वतंत्र न्यूज़ मीडिया एक स्वस्थ समाज की बुनियादी ज़रूरत है.

देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार एवं बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी ने मीडिया के छात्रों से “फ्यूचर ऑफ़ न्यूज़ मीडिया” न्यूज़ मीडिया का भविष्य पर चर्चा कर रहे थे. इस वेब चर्चा का आयोजन प्रेस्टीज प्रबंधन शोध संस्थान इंदौर के बी ए जे एम सी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा शुक्रवार 26 फरवरी, 2021 किया गया. यह प्रेस्टीज प्रबंधन शोध संस्थान इंदौर का पन्द्रहवाँ मीडिया मॉनीटर डिस्कशन फोरम था.

राम दत्त त्रिपाठी सर्वोदय आंदोलन और जे पी आंदोलन में सक्रिय रहे हैं और इमरजेंसी का वक़्त उन्होंने नैनी और बनारस की जेलों में गुज़ारा।

राम दत्त त्रिपाठी ने मीडिया के छात्रों से "फ्यूचर ऑफ़ न्यूज़ मीडिया" पर चर्चा कर रहे थे. इस वेब चर्चा का आयोजन  प्रेस्टीज प्रबंधन शोध संस्थान इंदौर के बी ए जे एम सी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा शुक्रवार 26 फरवरी, 2021 किया गया. यह प्रेस्टीज प्रबंधन शोध संस्थान इंदौर का पन्द्रहवाँ  मीडिया मॉनीटर डिस्कशन फोरम था.
राम दत्त त्रिपाठी

राम दत्त त्रिपाठी ने कहा कि न्यूज़ मीडिया का स्वरुप भविष्य में कैसा होगा ये मीडिया के लोग तय नहीं करते बल्कि यह पूँजी और तकनीक तय करेगी। पूँजी तकनीक को अपने हिसाब से चलाती है और तकनीक की ताक़त और सत्ता के साथ मिलकर यही पूँजी आज समाज को कंट्रोल कर रही है।

राम दत्त त्रिपाठी ने अपनी बात के विस्तार में कहा, “दरअसल खबर वह नहीं जो प्रेस नोट के रुप में आपके सामने आये, असली खबर वह है जिसे छिपाया जा रहा हो और एक पत्रकार होने के नाते आप उसे ढूंढ कर जनता के सामने लाएं, बाकी तो सब प्रोपगंडा है।”

उन्होंने अफ़सोस प्रकार किया कि आज न्यूज़ पर प्रोपगंडा हावी है। पूँजी और सत्ता का समाज पर दबाव बढ़ रहा है। पूँजी ऐसी ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जिससे इंसान की भूमिका गौण होती जा रही है, अब न्यूज़ में भी रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पैर पसारने लग गया है, न्यूज़ रूम में पत्रकारों की जगह रोबोट लेने लगे

पत्रकारों की सेवा शर्तें और वेतन निर्धारित करने वाले पुराने क़ानून वर्किंग जर्नलिस्ट ऐक्ट को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है. पत्रकार अल्पकालिक ठेके पर काम कर रहे हैं. आज के जमाने में प्रेस कौंसिल भी बेदम है. नए डिजिटल न्यूज़ मीडिया के लिए पुराने क़ानूनों को संशोधित कर उनका दायरा बढ़ाने की ज़रूरत है, ताकि पत्रकार निडर होकर बेहतर माहौल में काम कर सकें.

न्यूज़ मीडिया का भविष्य विषय पर बोलते हुए बीबीसी के पूर्व पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी ने आगे कहा, ” जब तक न्यूज़ मीडिया विज्ञापनों के भरोसे रहेगा वह जन सरोकार की बात मज़बूती से नहीं उठा पायेगा क्यूंकि वह विज्ञापन देने वाली बड़ी कंपनियों या फिर सरकार के दबाव में होगा। न्यूज़ की इकॉनमी को सेल्फ सस्टेनिंग बनाना होगा, बीबीसी मॉडल की ही तरह न्यूज़ मीडिया को पब्लिक को ओन करना होगा। आप जो समाचार देखते, सुनते या पढ़ते हैं उसके लिए उस पर जो लागत आती है वो मूल्य दें ताकि न्यूज़ मीडिया के सामने अस्तित्व का संकट ना आये।  आपको निष्पक्ष और सही जानकारी मीडिया दे पाए उसके लिए हम सबको न्यूज़ मीडिया को विज्ञापनों के चंगुल से छुटकारा दिलाना होगा।”

मीडिया के छात्रों से राम दत्त त्रिपाठी ने आग्रह किया कि वो इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, साहित्य आदि सबके बारे में खूब पढ़ें, अपनी भाषा पर काम करें, घटनाओं की गहराई में जाकर उनपर चर्चा परिचर्चा किया करें, खूब लिखें, तटस्थ होकर ख़बरों का अवलोकन करें तभी वो एक अच्छे पत्रकार बन पाएंगे. न्यूज़ मीडिया का भविष्य भी तभी सुनहरा होगा जब भावी पत्रकार हर प्रकार से दक्ष होंगे.  

मीडिया मॉनिटर की कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर भावना पाठक ने कहा , “इस डिसकशन फोरम को शुरू करने का मक़सद ही यह था कि इस फोरम के ज़रिये मीडिया के छात्र छात्रायें मीडिया के विविध पहलुओं को बारीकी से समझ पाएं. मीडिया के शिक्षकों एवं मीडिया प्रोफेशनल्स के अनुभवों से कुछ सीख पाएं . और उनके द्वारा दी गयी सीख को अपनी ज़िन्दगी में लागू कर पाएं. हम उस दिशा में बढ़ रहे हैं देखकर ख़ुशी हो रही है.”

बी ए जे एम सी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर जुबेर खान ने कहा, “मीडिया मॉनीटर से बच्चों का दृष्टिकोण व्यापक हो रहा है और उनसे सवाल जवाब करने से उनका हौसला भी बढ़ रहा है, सार्थक संवाद व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए ज़रूरी है.” 

प्रोफ़ेसर भावना पाठक मीडिया मॉनिटर  कोऑर्डिनेटर प्रेस्टीज इंस्टीच्यूट इंदौर
  • प्रोफ़ेसर भावना पाठक मीडिया मॉनिटर कोऑर्डिनेटर प्रेस्टीज इंस्टीच्यूट इंदौर
  • bhavnapathak05@gmail.com

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