नेपाल साहित्य संसार में सदैव अमर रहेंगे राष्ट्र कवि घिमिरे

 यशोदा श्रीवास्तव

काठमांडू। दीर्घायु जीवन का श्रेय “प्रेम”को देने वाले नेपाल के राष्ट्र कवि माधव प्रसाद  घिमिरे का मंगलवार शाम को काठमांडू उनके आवास पर निधन हो गया। उन्होंने 101वर्ष की लंबी आयु प्राप्त कर अंतिम सांस ली। वेशक वे लंबे समय तक नेपाली साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर रहे बावजूद इसके उनका निधन नेपाली साहित्य जगत के लिए बड़ा सदमा है। 

    माधव जी अपने स्वास्थ और दीर्घायु जीवन का श्रेय “प्रेम “को देते थे। उत्साह और सकारत्मकता उनके लंबे जीवन का आधार था। वो स्वच्छंदतावादी भावधारा और परिष्कारवादी शैली के कुशल नेपाली कवि ,साहित्यकार व गीतकार थे।स्व.घिमिरे की कई नेपाली साहित्य एक से बढ़कर एक है।इसी में उनकी रचित”अश्वत्थामा” के अंग्रेजी अनुवाद को नेपाल एकेडमी  ने नोबल प्राइज के लिये अपनी संस्तुति के साथ भेजा है। यह एक गीत काव्य नाटक है।

   घिमिरे जी की बचपन से ही साहित्य में अभिरुचि थी। कविता ,खंडकाव्य,गीत,नाटक,कथा ,अनुवाद लेख आदि अनेकों विधाओं में वे बौद्धिक संपदा संपन्न शख्सियत थे।वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे लेकिन उनके लेखन का मूल केंद्र विंदु कविता काव्य ही था।

  14 वर्ष की उम्र में उनकी पहली रचना “ज्ञान पुष्प “शीर्षक से गोरखा पत्र समाचार पत्र में प्रकाशित हुई थी। उनकी शिक्षा दीक्षा वाराणसी में हुई।हिंदी के प्रति भी उनका लगाव था।वे चाहते तो अपनी रचना संसार को हिंदी में भी बसा सकते थे लेकिन उनका उद्देश्य अपनी रचनाओं के जरिए नेपाल में लोगों को साहित्य के प्रति जागरूक करना।कहना न होगा कि वे अपने मकशद में काफी हदतक काम याब रहे।वे एक नामचीन पत्रकार भी थे। नेपाल के प्रतिष्ठित  समाचार पत्र गोराखपत्र में काफी दिनों तक सहायक संपादक भी रहे।वे नेपाल राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान के पहले सदस्य फिर आजीवन सदस्य के रास्ते उप कुलपति फिर कुलपति भी रहे।
उनका काव्य संग्रह नवमंजरी, घाम पानी,नया नेपाल,किन्नर किन्नरी आदि काफी चर्चित रहा।नेपाली खंडकाव्य के विकास में भी उनका विशिष्ट योगदान था।उनका खंडकाव्य राम विलास, जीवन संगीत,सुदामा चरित्र आदि काफी लोक प्रिय हुए। पत्नी गौरी से विवाह के क्षण को सबसे ज़्यादा खुशी देने वाला लम्हा करार दिया था।जब उनकी धर्मपत्नी  का निधन हुआ तब वो बहुत दुखी थे। पत्नी गौरी के निधन से आहत उन्होंने गौरी खंडकाव्य की रचना की  जो न केवल काफी चर्चित हुई,यह उनकी विशिष्ट कृति साबित हुई।”राष्ट्र निर्माता”जैसे खंडकाव्य लिखने वाले घिमिरे नेपाल साहित्य संसार मे हमेशा अमर रहेंगे।

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