कोरोना के बाद अब डेंगू की चपेट में भारत, दिल्ली में 221 मरीज भर्ती, UP में 22 की मौत

दिल्ली-NCR में डेंगू का बढ़ता प्रकोप

कोरोना का डर अभी दूर भी नहीं हुआ है और देश में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं. राजधानी दिल्ली में 220 मरीज अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हैं जबकि यूपी में डेंगू से मरने वालों की संख्या 22 हो चुकी है. वैज्ञानिक बताते हैं कि ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाने के कारण यह घुटनों के नीचे ही इंसानों को काटते हैं. अगर इंसान बारिश के मौसम के बाद पूरे शरीर को ढक कर रखें तो मच्छरों के काटने का खतरा कम रहता है.

सुषमाश्री

राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर-उत्तर प्रदेश में सिर्फ रविवार, 17 अक्टूबर को डेंगू से 22 लोगों की मौत हो गई है. उत्तर प्रदेश के कई जिलों को भी अपनी जद में ले रहा है. प्रयागराज और मुरादाबाद में ऐसे मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है. रविवार, 17 अक्टूबर को यूपी के ब्रज इलाके में बुखार और डेंगू वायरल के कारण 22 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है. मरने वालों में 10 एटा, 8 मैनपुरी, 2 फिरोजाबाद और 1-1 आगरा और कासगंज से थे. जिले में डेंगू से मरने वालों की संख्या 95 पहुंच चुकी है.

हालांकि, ताजनगरी आगरा में डेंगू के मामलों में बीते दिनों की अपेक्षा कमी दर्ज की गई है. यहां आगरा के अस्पतालों में बेड्स फुल हैं. बता दें कि एसएस मेडिकल कॉलेज में भर्ती सात और मरीजों में डेंगू की पुष्टि की गई है. इनमें से आगरा के 6 व हाथरस का एक मरीज है. सबसे खराब हालत दिल्ली और पश्चिमी यूपी की है, जहां डेंगू के मामलों में 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है.

नोएडा में रोज भर्ती हो रहे डेंगू 15 से 20 बच्चे

नोएडा में बच्चों में बुखार के साथ डेंगू का प्रकोप अधिक देखने को मिल रहा है. चाइल्ड पीजीआई की कार्यवाहक निदेशक डॉ. ज्योत्सना मदान ने बताया कि डेंगू के रोज 15 से 20 बच्चे भर्ती हो रहे हैं. ठीक होने पर डिस्चार्ज भी किया जा रहा है, लेकिन लगातार डेंगू मरीज आ रहे हैं. कभी कम कभी ज्यादा हो रहे हैं. अभी स्थिति पहले जैसी ही है कुछ परिवर्तन नहीं देखने को मिला है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अब तक यहां पर किसी डेंगू पीड़ित बच्चे की मौत नहीं हुई है.

सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा का कहना है कि जांच बढ़ने से डेंगू मरीज बढ़े हैं. चाइल्ड पीजीआई में निःशुल्क डेंगू जांच इस साल शुरू करवाई गई है.

शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में डेंगू मरीजों का आंकड़ा 300 के करीब पहुंच गया है. बीते 24 घंटे में 12 नए डेंगू मरीज मिलने से संख्या 287 हो गई है. अस्पतालों में डेंगू, बुखार के मरीजों से बेड भरे हुए हैं. प्लेटलेट्स और खून की मांग भी बढ़ती जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू से मृत बच्चे के घर के आसपास के इलाकों में एक सप्ताह तक फॉगिंग की जाएगी. एंटी लार्वा का छिड़काव करके डेंगू से बचाव की अपील की जा रही है.

लगातार बढ़ रहे हैं केस

दिल्ली के अलग अलग अस्पतालों में बड़ी तादाद में डेंगू जैसे लक्षण वाले मरीज पहुंच रहे हैं. हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार और निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व बेड्स की संख्या को कम करके उन्हें डेंगू के मरीजों के लिए उपलब्ध कर दिया है. इस वक्त दिल्ली के अस्पतालों में डेंगू के 221 मरीज भर्ती हैं. दिल्ली में लगातार डेंगू के मामले बढ़ते जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी और उससे सटे एनसीआर यूपी में बढ़ती गंदगी और ​बेमौसम हुई बरसात ने ऐसे हालात बना दिए हैं. नदी-नालों समेत अन्य जगहों में इकट्ठा हुए पानी के कारण ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों ने राजधानी दिल्ली में पांव पसारने शुरू कर दिये हैं.

राजधानी दिल्ली डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अस्पतालों में मच्छरदानी वार्ड (Mosquito ward) बनाए गए हैं. अस्पतालों में भर्ती हो रहे मरीजों को इन वार्ड में रखा जा रहा है. दिल्ली नगर निगम के हिंदूराव अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में भी मच्छरदानी वार्ड बनाए गए हैं. हिंदूराव अस्पताल के डॉक्टर विजय प्रताप ने बताया पिछले साल के मुकाबले इस साल डेंगू के मामले में 20 से 25 % की बढ़ोतरी हो रही है. अस्पताल में डेंगू के 1278 सस्पेक्टेड और 473 कन्फर्म केस हैं. डॉक्टर विजय ने बताया की डेंगू के मरीजों को मॉस्किटो नेट में रखा गया है. जिससे लोग सुरक्षित रह सकें और अन्य मरीजों में संक्रमण न हो.

लोकनायक अस्पताल (Lok Nayak hospital) के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में डेंगू के सस्पेक्टेड मरीजों के लिए फ्लू क्लीनिक बनाया गया है. यहां आते ही मरीज की डेंगू जांच की जा रही है. अगर जांच में डेंगू मिलता है तो मरीज की स्थिति के हिसाब से उसको भर्ती किया जाता है. उन्होंने कहा कि डेंगू वार्ड में मरीजों के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई है. इन मरीजों को अन्य रोगियों से अलग रखा जा रहा है. अस्पताल में डेंगू रोगियों के लिए 100 बेड रिजर्व रखे गए हैं.

डॉक्टरों की सलाह

दिल्ली नगर निगम के डॉक्टर अजय कुमार का कहना है कि इस समय लोगों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है. अगर किसी को बुखार आ रहा है और वह दो दिन से ज्यादा बना हुआ है तो तुरंत डॉक्टरों की सलाह लें. अपने खानपान का ध्यान रखें और आसपास सफाई रखें.

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाएंगे कि राजधानी दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां, रह-रहकर अपनी उपस्थिति दर्ज करती रहती हैं.

— साल 2015 में दिल्ली में डेंगू के 14 हजार 889 केस रिपोर्ट हुए थे. 60 लोगों की मौत हुई थी.
— साल 2016 में 3650 केस सामने आए थे, इनमें से 10 लोगों की जान चली गई थी.
— साल 2017 में 3829 मामले दर्ज हुए थे, इनमें से 10 लोगों की मौत हो गई थी.
— साल 2018 में 1595 केस रिपोर्ट हुए थे, जिनमें से 4 लोगों की मौत हो गई थी.
— साल 2019 में 1069 केस सामने आए थे, जिनमें से 2 मरीजों की जान गई थी.
— साल 2020 में 612 मामले सामने आए थे, जिनमें से 1 की जान गई थी.
— हालांकि, इस साल डेंगू ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इस साल 16 अक्टूबर तक ही राजधानी में डेंगू के 723 मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है.

राजस्थान में डेंगू ने पकड़ा जोर

डेंगू ने राजस्थान को भी जकड़ लिया है. पिछले साल यहां डेंगू के 1331 मरीज थे लेकिन इस साल एक ही महीने में आंकड़ा साढ़े 6 हजार को पार कर गया है. राजस्थान के 33 में से करीब 30 जिले डेंगू की चपेट में आ चुके हैं. जयपुर में करीब 1500 मरीज सामने आए हैं. कोटा में डेंगू पेशेंट की संख्या 700 के पार है. कोटा में तो एक ही बेड पर कई लोगों का एक साथ इलाज करना पड़ रहा है. करौली, झालावाड़, अलवर, चुरू में भी डेंगू के डंक से जनता तंग है. अब तक इससे तकरीबन 100 लोगों की जान जा चुकी है.

अंबाला छावनी और यमुनानगर प्रभावित

अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल स्थित आइपीडी ब्लॉक में शुक्रवार को डेंगू के 12 नए मामलों की पुष्टि होने के बाद आंकड़ा 152 तक पहुंच गया है. इनमें प्लेटलेट्स कम होने वाले मरीज भी कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में बीमार होने वाले मरीजों की भरमार है.

वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बैठक हुई. जिसमें डॉक्टरों को डेंगू व संदिग्ध बुखार के मरीजों पर विशेष रूप से निगरानी रखने को कहा गया है. साथ ही कहा कि अगर किसी भी प्राइवेट अस्पताल में डेंगू का कोई मरीज आता है तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को जरूर दें, ताकि उस क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और अधिक चौकन्ना हो जाए और विशेष कार्य करे.

बिगडते हालात के मद्देनजर अंबाला के सीएमओ कुलदीप सिंह ने कहा, हम अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहे हैं. कैंट के पीएमओ को व्यवस्था बनाने के लिए कहा गया है. साथ ही मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

जम्मू और कश्मीर में तीन नए मामले

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. शुक्रवार को शहरी व ग्रामीण इलाकों में तीन नए मामले सामने आए हैं, जिनमें जोजड़ा तालाब, संगूर और जोनू इलाके से डेंगू के मरीजों के मिलने की खबरें आई हैं. इन्हें मिलाकर प्रदेश में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 19 हो गई है.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पर अंकुश लगाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है. बिना जागरूकता के इस पर काबू पाना बहुत मुश्किल है. जिला अस्पताल में बुखार का मामला आने के बाद तुरंत व्यक्ति का डेंगू टेस्ट किया जा रहा है. टेस्टिंग बढ़ाने के साथ लोगों को जागरूक किया जा रहा है. शहरी व ग्रामीण इलाकों में दवाई का छिड़काव भी करवाया जा रहा है.

उधमपुर के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहम्मद यासीन बताते हैं कि जिन इलाकों से डेंगू के मामले सामने आ रहे है, वहां दवाई का छिड़काव करवाया जा रहा है. इलाके में जमा पानी को हटाया जा रहा है. लोगों को सफाई रखने और स्वास्थ्य को लेकर जागरुक करने के प्रयास भी किये जा रहे हैं. विभाग ने डेंगू के उपचार की पूरी व्यवस्था कर रखी है.

हिमाचल प्रदेश में डेंगू के 261 मामले

हिमाचल प्रदेश के शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजाना डेंगू के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. जनवरी से लेकर अभी तक हिमाचल प्रदेश में डेंगू के 261 मामले सामने आ चुके हैं. सोलन जिला में डेंगू का ज्यादा प्रकोप है. यहां औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन से नए मामले ज्यादा आ रहे हैं.

डेंगू की जांच के लिए अभी तक 2400 से ज्यादा सैंपल लिए गए, जिनमें से 261 लोग संक्रमित मिले. हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक एक भी मरीज की जान नहीं गई है. हिमाचल में ठंड शुरू हो चुकी है. स्वास्थ्य विभाग कयास लगा रहा है कि ठंड बढ़ने के साथ-साथ डेंगू का प्रकोप भी कम हो जाएगा. जिन क्षेत्रों में डेंगू के मामले ज्यादा आ रहे हैं, वहां पर लोगों को एहतियात बरतने के लिए कहा जा रहा है. घरों के आसपास सफाई बनाए रखने व पानी जमा न होने देने की भी हिदायत दी जा रही है.

साफ पानी में पनपता है डेंगू का मच्छर

लोगों में यह गलत धारणा है कि डेंगू का मच्छर गंदगी में फैलता है, लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत डेंगू का मच्छर साफ खड़े पानी में पनपता है. जब बारिश या अन्य तरह का पानी एक जगह एकत्रित हो जाता है तो डेंगू के मच्छर के लिए यह अंडे देने का बेहतर स्थान होता है. साफ पानी में अंडे देने के बाद डेंगू का मच्छर दो सप्ताह में तैयार हो जाता है. इतना ही नहीं घरों में रखे गमलों समेत फ्रिज के पीछे एकत्रित होने वाले पानी में भी डेंगू के मच्छर पनप जाते हैं. ऐसे में अपने घर के आसपास पानी एकत्रित न होने दें और पानी के बर्तनों को भी ढक कर रखना चाहिए, ताकि मच्छर उसमें अंडे न दे सकें. गंदे पानी में केवल मलेरिया का मच्छर पनपता है.

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डेंगू होने पर शरीर में होती है प्लेटलेट्स की कमी

डेंगू होने पर शरीर में प्लेटलेट्स की कमी होनी शुरू हो जाती है. प्लेटलेट्स छोटी रक्त कोशिकाएं होती हैं, जो खासतौर पर बोनमैरो में पाई जाती हैं. शरीर में प्लेटलेट्स की कमी इस बात को दिखाती है कि खून में बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो रही है. स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सामान्य प्लेटलेट्स काउंट 1 लाख 50 हजार से 4 लाख 50 हजार प्रति माइक्रोलीटर होते हैं. अगर यह 1 लाख 50 हजार से नीचे आ जाए तो लो प्लेटलेट्स माना जाता है.

कैसा दिखता है डेंगू का मच्छर

डेंगू फैलाने वाला एडीज इजिप्ट एक छोटे गहरे रंग का मादा मच्छर है, जिसकी टांगें बंधी हुई होती हैं. इस वजह से यह मच्छर ज्यादा ऊपर नहीं उड़ पाते और यही मादा मच्छर डेंगू फैलाती हैं. दूसरे मच्छरों की तुलना में ये छोटी होती हैं. इसके शरीर पर चीते जैसी धारियां बनी होती हैं जबकि नर मच्छर के पैर पर सफेद रंग की धारियां होती हैं. यह मच्छर कभी भी काट सकता है, जब इसे भूख लगी हो. वैज्ञानिक बताते हैं कि ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाने के कारण यह घुटनों के नीचे ही इंसानों को काटते हैं. अगर इंसान बारिश के मौसम के बाद पूरे शरीर को ढक कर रखें तो मच्छरों के काटने का खतरा कम रहता है.

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