बड़ी साजिश: चीन की उत्तराखंड में घुसपैठ की कोशिश, मात्र 70 किमी दूर बनाया नया सैन्‍य अड्डा

(मीडिया स्वराज़ डेस्क )

लद्दाख के बाद अब उत्तराखंड में भी चीनी सेना की तैयारियां संदिग्ध हैं. मात्र 70 किमी दूर बनाए उनके नए सैनिक ठिकाने भारत के लिए खतरे की घंटी कही जा सकती है.लद्दाख के बाद उत्तराखंड में जिस तरह से पिछले महीने चीनी सैनिकों की घुसपैठ की खबरें आईं, उसने भारतीय सेना को एलर्ट कर दिया है. इसी बीच मात्र 70 किमी दूर तैयार किए गए उनके नए सैन्य ठिकाने ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि एक बार फिर ड्रैगन किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में तो नहीं!

चीन ने एक बार फिर से सीमा पर जिस तरह की गतिविधियां शुरू कर दी हैं, उससे उसकी मानसिकता साफ हो जाती है. खबरों की मानें तो लद्दाख के बाद इस बार चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के करीब 100 सैनिकों ने अब उत्‍तराखंड के बाराहोती इलाके में करीब 5 किमी अंदर तक घुसपैठ को अंजाम दिया है. 

पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी पर हो रही सकारात्मक प्रगति के बीच उत्तराखंड के इस इलाके में चीन के अतिक्रमण की कोशिश ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है. भारतीय सैन्य अधिकारियों के लिए यह गंभीर मुद्दा बन चुका है. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के बाद भारतीय सेना इसे गंभीरता से ले रही है.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, यह घटना पिछले महीने की है, जब चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाके में बने एक पुल और कुछ अन्‍य आधारभूत ढांचे को नष्‍ट कर दिया. दरअसल, चीनी सैनिकों ने इस घुसपैठ की लंबे समय से प्‍लानिंग कर रखी थी. यही नहीं, पीएलए ने घटनास्‍थल से मात्र 70 किमी दूर अपना नया सैन्‍य ठिकाना भी बना लिया है.

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अनैलिस्ट Detresfa की ओर से जारी की गई सैटलाइट तस्वीरों से यह साफ है कि चीनी सैन्‍य ठिकाना भारत से लगती वास्‍तविक नियंत्रण रेखा से मात्र 70 किमी दूर स्थित है. चीन ने नेपाल-भारत के ट्राइजंक्‍शन पर तकरीबन 4 हजार मीटर की ऊंचाई पर यह नया सैन्‍य ठिकाना तैयार किया है. इसमें पीएलए सैनिकों के लिए नए बैरक भी शामिल हैं. यह सैन्‍य अड्डा तिब्‍बत के जांडा काउंटी में स्थित है. बता दें कि चीन ने वर्ष 2019 में इस इलाके में निर्माण कार्य शुरू किया था.

पीएलए के इस सैन्‍य अड्डे का सबसे नजदीकी एयरबेस नागरी गुंसा है और यह पैंगोंग झील से 250 किमी दूर स्थित है. पीएलए की यह पोस्‍ट 0.166 वर्ग किमी इलाके में स्थित है. चीन ने भारत से लगते एलएसी पर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए इस पीएलए पोस्‍ट का निर्माण किया है. अब यहां बड़े पैमाने पर चीनी सैनिक तैनात हैं. 

हालांकि चीनी सैनिकों की ओर से यह पहली बार नहीं है. इससे पहले भी इस तरह के घुसपैठ की खबरें आती रही हैं. उत्‍तराखंड का बाराहोती इलाका ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं रहा है. सितंबर 2018 में भी चीनी सैनिकों ने यहां 3 बार घुसपैठ की थी. 1954 में यह पहला इलाका था, जहां चीन के सैनिकों ने घुसपैठ की थी. बाद में उन्होंने दूसरे इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश की, जिसके बाद 1962 की जंग लड़ी गई थी. पिछले महीने 30 अगस्त को हुई इस घटना में फेस-ऑफ की स्थिति पैदा नहीं हुई क्योंकि जब तक भारतीय सैनिकों से उनका सामना होता, PLA सैनिक वापस हो चुके थे.

सुरक्षा सूत्रों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि तुन जुन ला पास पारकर 55 घोड़े और 100 से ज्यादा सैनिक भारतीय क्षेत्र में 5 किमी से ज्यादा अंदर आ गए थे. पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में पीएलए की ओर से घुसपैठ की मामूली घटनाएं ही हुई हैं. पिछली बार जुलाई में भी ऐसा हुआ था, इसके बाद नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ गई थीं. पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव पहले से ही बना हुआ है. सरकारी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि चीन के सैनिक सेना के घोड़ों के साथ तुन जुन ला पास पार करके बाराहोती के करीब चारागाह पर आ गए थे.

ऐसा माना जा रहा है कि चीनी सैनिकों का यह ग्रुप करीब तीन घंटे तक वहां मौजूद रहा. चूंकि यह इलाका असैन्यीकृत क्षेत्र (जहां सैनिक नहीं होते हैं) है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पीएलए सैनिकों की मौजूदगी सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए चिंता की बात है. सूत्रों ने बताया कि स्थानीय लोगों ने इस घुसपैठ की जानकारी दी, जिसके बाद ITBP और सेना की टीम इसकी पुष्टि के लिए वहां फौरन पहुंच गई. हालांकि भारतीय गश्ती दल के पहुंचने से पहले चीनी सैनिक इलाका खालीकर लौट चुके थे.
चीन (China) ने इस बार उत्तराखंड (Uttarakhand) में घुसपैठ की कोशिश की है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लगभग 100 सैनिक सीमा का उल्लंघन कर पिछले महीने उत्तराखंड के बाराहोती सेक्टर में घुस आए थे. चीनी सैनिक घुसपैठ के कुछ घंटे बाद बाराहोती से लौट गए. बताया जा रहा है कि चीनी सैनिकों ने लौटने से पहले भारतीय इलाके में कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान भी पहुंचाया. उनके साथ 50 घोड़े भी थे.

बता दें कि, इससे पहले पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया था और इस झड़प में चीनी सेना के कई सैनिक मारे गए थे और फिर चीन को पीछे हटना पड़ा था. चीन की हरकत को देखकर भारत का खुफिया तंत्र पूरी तरह से सक्रिय हो गया है और सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है. इससे पहले 30 अगस्त को भी तकरीबन 100 चीनी सैनिक भारतीय सीमा के अंदर दिखाई दिए थे.

पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्रों में गतिरोध जारी

जवाबी रणनीति के तहत भारतीय सैनिकों ने क्षेत्र में गश्त की. चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में दाखिल होने को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्रों में गतिरोध जारी है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि चीन ऐसी हरकतों से इसे और गंभीर बनाने की कोशिशों में लगा हुआ है. यह भी बताया जा रहा है कि एलएसी पर सर्दियों के मौसम को देखते हुए चीन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है.

भारत ने LAC पर बढ़ाई निगरानी

चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना सीमा पर बड़े पैमाने पर ड्रोन तैनात करने की योजना बना रही है जिसके लिए भारतीय सेना अपने बेड़े में नए इजराइली और भारतीय ड्रोनों को शामिल कर रही है. सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों में सीमा को लेकर अलग-अलग धारणाओं के चलते बाराहोती में उल्लंघन की घटनाएं हो रही हैं. चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास बुनियादी ढांचे का विकास भी तेज कर दिया है. ऐसे में भारत ने पूर्वी लद्दाख में हुए टकराव के बाद एलएसी पर निगरानी बढ़ा दी है.

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