Category: Uncategorized
-

Gandhi’s Institutions in Wardha and Sevagram: A Legacy
By Siby K. Joseph Gandhi’s institutions in Wardha and Sevagram represent one of the most remarkable acts of nation-building in modern Indian history. Long before independence, Mahatma Gandhi understood that ideals without organisations are merely words. His journey as an institution-builder began in South Africa — with the Natal Indian Congress (1894) and the British…
-

रोजगार विहीन विकास और पर्यावरण नाश: क्या हम भविष्य बर्बाद कर रहे हैं?
Jobless Development with Ecological Disaster? India’s Growth Model Under Question 📅 6 मई 2025, बुधवार, रात 8 बजे | LIVE YouTube Discussion | @Mediaswarajnews भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है — लेकिन क्या यह विकास टिकाऊ है, या विनाश की ओर ले जा रहा है? GDP के आँकड़े चमकते…
-

UP 2027: Bihar और Bengal के बाद क्या योगी रचेंगे इतिहास — या Akhilesh का PDA पलटेगा बाज़ी?
उत्तर प्रदेश — देश की राजनीति का केंद्र। जो यहाँ जीता, उसकी दिल्ली की राह आसान हो जाती है। 2027 के विधानसभा चुनाव अब साल भर से भी कम दूर हैं। 403 सीटों पर होने वाला यह चुनाव सिर्फ उत्तर प्रदेश का नहीं — पूरे देश की राजनीति का भविष्य तय करेगा। पहले ताज़ा पृष्ठभूमि…
-

भीतरहवा आश्रम में समाप्त हुई ‘जहां पड़े कदम गांधी के’ यात्रा — सर्वोदय को पुनः सक्रिय करने का संकल्प
पटना से चंपारण, 10–22 अप्रैल 2026 | पश्चिमी चंपारण के ऐतिहासिक भीतरहवा आश्रम में 22 अप्रैल को ‘जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ’ यात्रा का समापन हुआ। 10 अप्रैल को पटना से शुरू हुई यह 13 दिवसीय यात्रा मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और वीर औयारा होते हुए चंपारण पहुंची। सर्व सेवा संघ…
-

युद्ध में जीतने वाला भी रोता है: रूस-यूक्रेन से ईरान-इज़राइल तक
डीपी शुक्ल राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ में लिखा है ‘युद्ध नहीं जिनके जीवन में वे भी बहुत अभागे होंगें या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण से भागे होंगें।’ लेकिन शाश्वत सत्य यही है कि युद्ध कभी अंतिम विकल्प नहीं होता। इतिहास ने बार-बार यह सिखाया है कि युद्ध जीतने वाले…
-

हिन्द मज़दूर सभा यूपी की बैठक: चार श्रम संहिताओं पर रणनीति, राष्ट्रीय सहारा मुद्दे पर चर्चा
बैठक में यह चिंता व्यक्त की गई कि नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के बाद श्रमिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, ट्रेड यूनियन गतिविधियों और औद्योगिक संबंधों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे समय में संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को जागरूक करने तथा संयुक्त रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
-

1929 में गांधी की चेतावनी: हरिद्वार की गंदगी और गंगा प्रदूषण पर यंग इंडिया का लेख
विधिवत् पूजा कराने के लिए मुझे गंगा तट पर ले जाया गया। जिस पानी को लाखों लोग पवित्र समझकर पीते हैं, उसमें फूल, सूत, गुलाल, चावल, पंचामृत वगैरा चीजें इस विश्वास से डाली गई कि यह एक पुण्य कार्य है। मैंने इसका विरोध किया तो पण्डित-सुलभ उत्तर मिला कि यह तो युगों से चली आ…
-

Mark Tully: A Foreign Correspondent Who Became India’s Own
Mark Tully was never an armchair journalist. Long before digital reporting became dominant, he insisted on being physically present at the scene of events.
