अध्यात्म
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कर्म करने वाला ही जीने का अधिकारी
संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद मंत्र पढ़ते हैं कि कुर्वनेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतम समा: एवं त्वयि नान्यथेतोअस्ति न कर्म लिप्यते नरे*…
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भक्ति ही भक्त का स्वधर्म है
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय* 32 फल-त्यागके दो उदाहरणसंतजनों ने अपने जीवनके द्वारा यह बात सिद्ध कर दी है। तुकाराम के…
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जीवन दो भाग त्याग और एक भाग भोग
विनोबा का आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया ईशावास्य उपनिषद अंश तेन त्यकतेन भुनजीथा, यह धर्मसूत्र है…
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त्याग जीवन का मूल तत्व
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद अंश पढ़ते हुए कहते हैं कि ईशावास्यम…
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पूर्ण से पूर्ण की ओर आत्मविकास का सनातन सूत्र
संत विनोबा का आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया ईशावास्य उपनिषद – शांति मंत्र – पूर्णमद: पूर्णमिदम्…
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सत्य – दर्शन कब होगा
आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा कहते हैं कि ईशावास्य उपनिषद ने कहा है कि…
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फल की बजाय प्रत्यक्ष कर्म में आनंद
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा गीता प्रवचन में कहते हैं कि यदि निष्काम कर्म की…
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विज्ञान और आत्मज्ञान का समन्वय जरूरी
विनोबा का आज का वेद चिंतन प्रस्तुति : रमेश भैया ईशावास्य उपनिषद बताता है कि पश्चिम में व्यूह और भारत…
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एकाग्रता और समग्रता
विनोबा का आज का वेद चिंतन विचार प्रस्तुति : रमेश भैया मैं अक्सर कहता हूं कि चित्त की एकाग्रता कौन…
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मंत्र का भाष्य हर व्यक्ति के लिए पृथक
प्रस्तुति : रमेश भैया संत विनोबा भावे ने कहा कि “ईशावास्य उपनिषद मंत्र ऋषि के काबू में नहीं रहता”, इस…
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