बेका समझौते का मतलब क्या है?

बेका
पंकज प्रसून, वरिष्ठ पत्रकार

भारत और अमरीका के बीच हुए नये ‘बेका’ समझौते के बाद भारत अब अमरीका के और करीब आ जायेगा। जिसके दक्षिण एशिया और हिन्द- प्रशांत  क्षेत्र की भू-राजनीति पर व्यापक और दूरगामी परिणाम मिलने की संभावना है।

इस समझौते का नाम है Basic exchange and cooperation agreement, संक्षेप में बेका।

इसके तहत भारत को अमेरिका की उच्च तकनीक का लाभ मिलेगा और ज़मीन पर भूस्थानिक जानकारी मिलेगी। दोनों देश भौगोलिक नक्शे और उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों का भी आदान-प्रदान करेंगे।जो भारतीय वायुसेना के लिये काफ़ी लाभदायक होगा।

साझा बयान में अमरीकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में भारत और अमरीका के बीच मजबूत होती दोस्ती एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम है ।

उन्होंने बताया कि चीन की ओर से दुनिया के लिये खतरा बढ़ता जा रहा है। जिसका मुकाबला करने के लिये बडे़ देशों को साथ आना होगा।

उन्होंने जानकारी दी कि भारत, जापान और अमेरिका साथ में कई सैनिक ऑपरेशन करेंगे । मालाबार एक्सरसाइज़ भी की जायेगी ।

बेका के अलावा भू विज्ञान में तकनीकी सहयोग, नाभिकीय सहयोग को बढ़ाना, डाक सेवा में सहयोग और आयुर्वेद और कैंसर अनुसंधान में सहयोग पर भी समझौते किये गये ।

भारत और अमरीका के बी सन. 2016 में logistics exchange memorandum of agreement हो चुका है। जिसके तहत दोनों देश एक दूसरे के मिलिट्री बेस और बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सवाल यह उठता है कि अमरीका को भारत के साथ समझौता करने की इतनी हड़बड़ी क्या थी कि 3 नवंबर को अमरीका के नये राष्ट्रपति का चुनाव होने से सिर्फ सात दिन पहले वहां के विदेश मंत्री माइक पोंपियो और रक्षामंत्री मार्क एस्पर को दिल्ली आना पड़ा ।

इसकी वजह अमरीका की घरेलू राजनीति है। वहां निबंधित भारतीय-अमरीकियों  की पहली पसंद जो बाइडेन हैं।

“द हिन्दू “में 27 अक्टूबर को प्रकाशित एक सर्वेक्षण के अनुसार 72% भारतीय अमरीकी नागरिक जो बाइडेन को वोट करेंगे।

उनका मानना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी भारत-अमेरिका संबंधों को बेहतर तरीके से निभाती है। और रिपब्लिकन पार्टी का अल्पसंख्यकवाद के प्रति रवैया ठीक नहीं है।

इस नये समझौते के जरिये टूंप प्रशासन यह जताना चाहता है कि वह भारत को बहुत अहमियत देता है।

 हालांकि बीच-बीच में ट्रंप भारत विरोधी बातें करने से तनिक भी गुरेज नहीं करते।

पिछले दिनों हुए प्रेसिडेंशियल डिबेट में उन्होंने भारत की यह कह कर भर्त्सना की कि यहां का वायुमंडल जहरीला है।

अमरीकी वीज़ा नियमों में भी उन्होंने वैसे बदलाव किये हैं जिनका भारतीय लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। यह तब है जब अमेरिका में हाऊ डी मोदी और भारत में केमचो टूंप समारोहों का आयोजन हुआ।

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