एक किशोर स्वप्न का दुखान्त 

पैदल चलने की मजबूरी में मर गयी 12 साल की जामलो

 

बारह साल की किशोरी जामलो मडकामी की सांसे तब थम गयीं जब वह अपने देस से मात्र 50 किलोमीटर  रह गयी थी।जामलो छत्तीसगढ़ के बस्तर की मुडि़या आदिवासी परिवार की वह गर्वीली बालिका थी जो अपने माता-पिता और परिवार की आर्थिक मदद के लिए मजदूरी करने अपने गांव आडेड जनपद बीजापुर से 200 किलोमीटर दूर तेलंगाना गयी थी खेत मजदूरी करने ।  

तेलंगाना के ग्राम कन्नीगुडम जनपद-मुलुगू में मिर्च तोडा़ई के लिए 200 रुपये रोज पाने के लिए अपने गांव के लोगों व अन्य बच्चों के साथ वह पहुंची थी । वह खुश थी अपने कोमल हाथों में पेन्सिल पेन की जगह लाल मिर्च की हाथ में जलन पैदा करने वाली फलियों को तोड़ते हुए, ताकि वह अपने प्यारे पिता के हाथों कुछ नकद पैसे दे पायेगी । मिर्च तोड़ते उसे हाथों की जलन कम , माता-पिता की नजरों में नकद पैसे पाकर होने वाली चमक ज्यादा महसूस हो रही थी। इस सपने के लिए उसका हौसला गांव-घर से दूर , माता-पिता की स्नेहिल छाया से दूर तपते खेतों तक खींच लाया था । पर  कोविड 19 की कली छाया में उसका सपना ही नहीं जीवन भी अकाल काल-कवलित हो गया । 

24 मार्च को देश में लाॅक डाऊन की घोषणा होने से ट्रेनें, बसें ,कार्य-व्यापार खेती किसानी सब पर पर कर्फ्यू लग गया तो मिर्चों की तुडा़ई भी बन्द हो गयी और कमाई पर भी ग्रहण लग गया। हताश जामलो और गांव 11 अन्य लोगों नेअपने देस वापस लौटने का निर्णय किया । 

लाॅकडाउन से ट्रांसपोर्ट न होना एक बाधा थी. जामलो सहित उसके अन्य साथियों ने पैदल चलने का संकल्प लिया। 

वे चल पडे़ पर उन्हे मालूम था कि सड़क का रास्ता बन्द है अतः वे जंगल के रास्ते चल पडे़ । जाहिर है कि जंगल के रास्ते  में भोजन , पानी, चाय व चिकित्सा कुछ भी न मिला । 

जामलो  की शोक में डूबी मां सुखमती ने बताया कि जब वह मुलुगम जिले के पेरूरु गांव तक पहुंची थी तब उसने फोन कर घर वापस आने की सूचना  दी थी । फिर दूसरा फोन उसका नहीं उसके साथियों का था कि वह मर गयी है। 

सुखमती ने बताया कि वे लोग पैदल ही 140 किलोमीटर पैदल आ गये थे । अब उनका गांव मात्र 50-60 किलोमीटर रह गया था सो थके मांदे लोगों में अब जल्दी हीं घर पहुंच जाने की आशा थी कि 18 अप्रैल को 9 बजे वह सिर दर्द, पेट दर्द से गिर कर मर गयी। गिरने से  उसकी एक हड्डी भी टूट गयी ।उसकी मृत्यु की सूचना पर बीजापुर के मुख्य स्वास्थ्य व मेडिकल आफीसर बीआर पुजारी ने बताया कि 18 अप्रैल  को 11 बजे उसकी मृत्यु की सूचना मिली थी । उसका शव एम्बुलेंस भेजकर मंगा लिया गया । वह कोरोना निगेटिव पायी गयी थी । उसके साथ के अन्य 11 लोगों को कोरेन्टाइन में भेज दिया गया है।  जामलो का शव पोस्ट मार्टम के बाद उसके परिवार जनों को दे दिया गया है।।

Courtsey : https://ruralindiaonline.org/articles/jamlos-last-journey-along-a-locked-down-road/

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