वित्त मंत्री ने अपने बजट के प्रावधान फिर से सुना दिये

आत्मनिर्भर भारत अभियान की तीसरी किस्त

राजेंद्र तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार

राजेंद्र तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार, राँची से 

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने कथा के तीसरे अध्याय (आत्मनिर्भर भारत अभियान की तीसरी किस्त) में १ फरवरी को पेश किये गये बजट के प्रावधानों का ही वाचन कर दिया। कृषि के लिए फार्म गेट इनफ्रास्ट्रक्चर वाली घोषणा में उन्होंने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण व ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को मिलाकर एक लाख करोड़ की फाइनेंसिंग सुविधा का नाम दिया तो दूसरी घोषणा में एमएसएमई व वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट को मिला दिया।

बाकी सभी घोषणाएं मौजूदा वित्त वर्ष के बजट व पहले वाले बजटों से आवंटन समेत ज्यों का त्यों उठाकर पेश कर दीं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में २०२०-२१ के बजट में ३७३७ करोड़ का प्रावधान किया गया था और पांच साल के लिए २००५० करोड़ का प्रावधान। वित्तमंत्री ने इस योजना को जस का तस राहत नंबर तीन के तौर पर पेश कर दिया।

जानवरों में फूट व माउथ डिजीज को नेशनल एनीमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत २०२५ तक के लिए १३३४३ करोड़ का प्रावधान पहले से स्वीकृत है। २०१९-२० के बजट में इस प्रोग्राम के लिए २६२३ करोड़ का आवंटन किया गया था लेकिन खर्च सिर्फ ८११ करोड़ हो पाए। लिहाजा २०२०-२१ के बजट में निर्मला सीतारमन ने इसका आवंटन घटाकर १३०० करोड़ कर दिया था। इसे वित्तमंत्री ने चौथी राहत घोषणा के तौर पर प्रस्तुत किया और आकार १३३४३ करोड़ का ही बताया लेकिन पांच साल की बात उन्होंने छुपा ली।

इसी तरह आपरेशन ग्रीन में भी २०२०-२१ के बजट में ५०० करोड़ का प्रावधान है और इसे भी उन्होंने राहत के तौर पर घोषित किया।डेयरी प्रोसेसिंग एंड इंफ्रा डेवलपमेंट फंड के लिए १११८४ करोड़ आवंटित हैं और डेयरी सेक्टर के प्रमोशन के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने १९ फरवरी २०२० को ४५५८ करोड़ रुपये स्वीकृत किये थे। इसको भी वित्तमंत्री ने राउंड फिगर में लाकर नयी घोषणा के तौर पर रख दिया।

इसी तरह, हर्बल खेती की योजना और गंगा के किनारे ८०० एकड़ में मेडिसिनल प्लांट की खेती की योजना पर काफी पहले से चर्चा होती आ रही है। १० लाख हेक्टेयर में हर्बल खेती का लक्ष्य पहले ही तय किया जा चुका है। इस पर बजटीय आवंटन भी है। मधुमक्खी पालन से जुड़ी योजना के लिए भी पहले से ५०० करोड़ का आवंटन है।

कुल मिलाकर, आज जो राहतें उन्होंने घोषित कीं, वे सब पुरानी और पहले से चली आ रही योजनाएं हैं। अगर राहत के नाम पर यही खेल करना है तो वित्तमंत्री को अपना बजट भाषण ही थोड़ा-मोड़ा एडिट करके पढ़ देना चाहिए।
इस आत्मनिर्भर भारत अभियान कथा का तीसरा अध्याय समाप्त हुआ।

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