बसंत पंचमी के दिन स्वराज विद्यापीठ प्रेक्षागृह में कलजुग नाटक का प्रभावशाली मंचन

यह महज़ एक प्रस्तुति भर नहीं है बल्कि हमारे समय और समाज के माथे की आड़ी-तिरछी लकीरें और सलवटें हैं।

समानान्तर एवं स्वराज विद्यापीठ की ओर से वरिष्ठ रंग-निर्देशक अनिल रंजन भौमिक के निर्देशन में आयोजित प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला की प्रस्तुति कलजुग (असली नकली का खेला) नाटक को प्रशिक्षु निर्देशक विक्रांत कुमार एवं गीतांजलि साहू के निर्देशन में स्वराज विद्यापीठ के प्रेक्षागृह में बसंत पंचमी दिवस के अवसर पर दो विभिन्न शैलियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

यह महज़ एक प्रस्तुति भर नहीं है बल्कि हमारे समय और समाज के माथे की आड़ी-तिरछी लकीरें और सलवटें हैं। ‘असली-नकली’ का द्वंद्व तो है ही, साथ-साथ सामाजिक विसंगतियों का वह घटाटोप भी है, जिनके बीच से ज़िंदगी के रास्ते तलाश करने होते हैं।

आम आदमी की जिजीविषा और उसका रोज़मर्रा का संघर्ष ही इस नाट्य-रचना का सच है, जिसमें पात्रों और चरित्रों ने जैसे प्राण फूँक दिये हैं। कलाकारों के पास अपनी रंगभाषा और देहभाषा है, जिसमें बेसुरे समय को भी सुरीला बनाता रंग-संगीत भी शामिल होता दिखता है।

सारा संत्रास नाटक के अंत आते आते तक रेशा-रेशा खुलता चला जाता है। दरअसल, असली और नकली की शिनाख़्त भी इस रचना का अभीष्ट रहा है, जो हमारी सोच और मानसिकता को असल रूप में परिभाषित कर सके।

राजनीति का विद्रूप उजागर करने में इस रचना ने सर्जना के सारे आयामों का एक रचनात्मक उपकरण की तरह इस्तेमाल किया है। व्यवस्था की पोल ही नहीं खोली है, असमाधेय स्थितियों में भी समाधान के दिशासंकेत दिये है।

मौजूदा हालात में इस तरह के मुखर सम्वाद और अभिव्यक्ति की आज बेहद ज़रूरत महसूस की जा रही है। इस अर्थ में अनिल रंजन भौमिक द्वारा रचित यह नाट्य प्रस्तुति पूरी तरह से अर्थवान और अभिव्यंजना से भरी हुई है, जो आदमी और आदमी के बीच टूट गए पुल को फिर से जोड़ती हुई सी नज़र आती है।

प्रस्तुतियों में शिवानी भाटिया, नंदिनी मौर्य, सुमित परिहार, करन कुमार, नवल किशोर पटेल, रजनीश अवस्थी, निधि पांडेय, गीतांजलि साहू, कन्हैया लाल, विनय कुमार त्रिपाठी, वर्तिका केसरवानी, कुमार रवींद्र, प्रिंस यादव, अंजू वर्मा, प्रांजल श्रीवास्तव, विक्रांत केसरवानी, सुमित सागर, विपिन यादव, सिया सिंह ने भाग लिया।

प्रस्तुति मार्गदर्शन प्रो. अनीता गोपेश तथा मंच परिकल्पना एवं सहयोग धीरज कुमार गुप्ता, पूर्ण प्रकाश साहू, अरूप मित्रा का रहा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो रमा चरण त्रिपाठी, (कुलगुरु स्वराज विद्यापीठ) ने प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में इस कार्यशाला के प्रतिभागी रंगमंच के लिए एक धरोहर साबित हों और समाज के लिए इसी तरह की सार्थक प्रस्तुतियां को मंच पर हमेशा साकार करते रहें, यही कामना करता हूँ।

प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रो त्रिपाठी जी एवं श्रीमती सुमन शर्मा जी ने वितरित किये। आभार एवं धन्यवाद प्रो. अनिता गोपेश जी ने दिया।

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