ओली की ठोरी में अयोध्या की खोज जारी

यशोदा श्रीवास्तव

काठमांडू। पीएम ओली अपनी अयोध्या को लेकर अभी भी सक्रिय हैं। भारत की अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के फौरन बाद पीएम केपी शर्मा ओली अपनी अयोध्या (ठोरी)को लेकर सक्रिय हो गए हैं। उन्होनें चितवन के माड़ी नगरपालिका के वार्ड न.9 के अध्यक्ष शिवहरि सूबेदी से फोन कर ठोरी और राम के विषय में जानकारी हासिल की है। ओली वार्ड अध्यक्ष शिवहरि सूबेदी से जब बात कर रहे थे तब वे भरतपुर के चितवन मेडिकल कालेज में इलाज के लिए गए हुए थे।ओली से हुई बातचीत के बाद माड़ी नगरपालिका के पदाधिकारियों के दल ने शनिवार को पीएम ओली से मिलकर ठोरी की ऐतिहासिकता की जानकारी दी है।

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स्थानीय मीडिया से बातचीत करते हुए वार्ड अध्यक्ष शिवबहादुर सूबेदार ने बताया कि शुक्रवार को पीएम ओली ने उनसे बात की। उस वक्त वे इलाज के लिए भरतपुर के चितवन मेडिकल कालेज में थे तभी उनके नंबर पर फोन आया जो इस अंदाज में था! “नमस्कार, आप कैसे हैं? आप माड़ी नगर पालिका के वार्ड अध्यक्ष शिवहरि सूबेदी हैं? मेरे हां कहने पर उधर से जवाब आया, “मैं प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली हूं।” प्रधानमंत्री ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की और माड़ी अयोध्या के बारे में जानकारी चाही। वार्ड अध्यक्ष सुबेदी ने कहा “प्रधानमंत्री की अयोध्या में रुचि है। मुझे आश्चर्य है कि वे ठोरी के बारे में माड़ी के लोगों से अधिक जानते हैं।

सुबेदी का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं कि भगवान राम का जन्म ठोरी और माड़ी क्षेत्र में हुआ था। हमारे पास वाल्मिकी आश्रम भी है और जनकपुर भी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ओली ने उनसे पूछा कि वह स्थानीय स्तर पर अयोध्या के बारे में क्या सोचते हैं। प्रधानमंत्री ओली और वार्ड के अध्य्क्ष सूबेदी के बीच 6 मिनट तक बातचीत हुई।सुबेदी ने कहा कि उन्‍होंने पीएम ओली से माड़ी में राम जन्मभूमि अयोध्या बनाने के लिए जल्द से जल्द पहल करने का अनुरोध किया है।

बता दें कि ओली के नेपाल में अयोध्या होने के दावे की उनके ही दल के लोगों ने खूब आलोचना की लेकिन इसका उनपर कोई असर नहीं दिख रहा है। भारी आलोचनाओं के बीच उन्होंने ठोरी में पुरातत्व विभाग को खुदाई कर राम से जुड़े सबूत ढूंढने का निर्देश दिया है। इसी के साथ स्थानीय लोगों से भी ठोरी और राम के संबंधों की जानकारी जुटा रहे हैं। ठोरी जिस नगरपालिका क्षेत्र माड़ी में आता है, वहां के अध्यक्ष आदि से ओली की बातचीत और मेलमिलाप भी इसी कड़ी का हिस्सा है।

नेपाल मामलों के जानकार कहते हैं कि दरअसल अपनों में ही अलग थलग पड़ते जा रहे ओली अपनी सरकार बचाने या मध्यवधि चुनाव की स्थिति में पुनः सत्ता में वापसी के लिए कई कार्ड एक साथ खेल रहे हैं। एक ओर भारत विरोध कर स्वयं को राष्ट्रवादी साबित कर रहे हैं तो दूसरी अयोध्या का दावा कर हिंदुत्व की अलख भी जगा रहे हैं।

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