किसान आन्दोलन का एक साल : प्राप्तियों का मूल्यांकन

गांव गांव तक गहरा है. इस आन्दोलन ने समाज के सभी वर्गों व जातियों को जिस तरह से एक बार फिर से साथ ला दिया, उसे राजनीतिक दल इन चुनावों में शायद ही बांट पायें.

इस आंदोलन का प्रभाव व्यापक रूप से विश्व के राजनीतिक क्षितिज तक पड़ना लाजिमी है. इस आंदोलन ने सामाजिक न्याय की अवधारणा को नये आयाम दिये हैं. भारत की राजनीति, जो पिछले कुछ दशकों से वृहद सामूहिकता के सरोकारों से इतर धार्मिक आकांक्षाओं व वर्ग प्रतिस्पर्धा पर आन टिकी थी, ये उसके लिये भी प्रवर्तन बिन्दु है.

जगदीप सिंह सिंधु

विजय का भाव मूलतय: स्वयंस्फूर्त होता है. एक अहिंसक संघर्ष की विजय का महत्व अनूठा है. भारत के किसान आन्दोलन ने जहां एक ओर पूरे विश्व को शांतिपूर्वक जनतांत्रिक अन्दोलन में अपने हकों के लिये कुर्बानी का एक नया दृष्टिकोण सौंपा है, वहीं लोकतंत्र में बहुमत से सत्त़ा की स्थापना व अहंकार की अवधारणा को ध्वस्त भी किया है.

भारत के शांतिपूर्वक व्यवस्थित किसान आन्दोलन ने धरती की अस्मिता व कृषक समाज की परंपराओं, कृत, संयम, बलिदान की क्षमता के साथ साथ कृषि के अस्तित्व एवं महत्व को नीतियों और राजनीति के केन्द्र मे स्थापित कर दिया है.

पूंजीपति विचारधारा की पालक सत्ताओं के छद्म विकास व औद्योगीकरण के अर्थिक सिद्धांत के समांतर कृषि अर्थव्यवस्था के महत्व को सैद्धांतिक रूप से पुन: स्पष्ट किया है.

इस आंदोलन का प्रभाव व्यापक रूप से विश्व के राजनीतिक क्षितिज तक पड़ना लाजिमी है. इस आंदोलन ने सामाजिक न्याय की अवधारणा को नये आयाम दिये हैं. भारत की राजनीति, जो पिछले कुछ दशकों से वृहद सामूहिकता के सरोकारों से इतर धार्मिक आकांक्षाओं व वर्ग प्रतिस्पर्धा पर आन टिकी थी, ये उसके लिये भी प्रवर्तन बिन्दु है.

पंजाब में सियासी करवट की पूरी संभावना है. पंजाब किसान बहुल प्रदेश है. किसान जथेबन्दिया आन्दोलन के चलते बहुत सूझबूझ से मजबूत होकर उभरी हैं. 40 विभिन्न जथेबन्दियों को, जो समर्थन पंजाब की कृषि से ज़ुडी जनता ने दिया है, वो विलक्षण है. इस आन्दोलन के प्रभाव आनेवाले विधानसभा चुनावों में एक नयी भूमिका निभायेगा.

जिस प्रकार किसानों ने केन्द्र की सत्ता की चूलें हिला दीं, उसी प्रकार प्रदेश के राजनीतिक दलों को भी कटघरे में खडा करने से चूकेंगें नहीं.

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पूरे पंजाब में हर विधानसभा क्षेत्र में किसान आन्दोलन का प्रभाव गांव गांव तक गहरा है. इस आन्दोलन ने समाज के सभी वर्गों व जातियों को जिस तरह से एक बार फिर से साथ ला दिया, उसे राजनीतिक दल इन चुनावों में शायद ही बांट पायें.

संयुक्त किसान मोर्चा एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा है, जिसका राजनीतिक दल अभी मूल्यांकन नहीं कर पा रहे हैं. किसान आन्दोलन ने जहां एक ओर जनता को उनकी ताकत का अहसास करवा दिया है तो वहीं दूसरी ओर, सत्ता की जवाबदेही को भी सुनिश्चित कर दिया है.

पिछले कई दशकों से चली आ रही पारंपरिक राजनीति व वर्चस्ववादिता को अबकी बार विराम लगाकर नयी राजनीतिक भूमिका की परिभाषा धरातल पर आना तय है. इस आन्दोलन से पंजाब ने अपनी प्रगति व उत्थान के लिये राजनीतिक नेताओं को बाध्य कर दिया है कि कोरे आश्वासनों का समय व भविष्य अब राजनीति में नहीं चलने वाला. सरोकार की प्रतिब्धता व परिणाम ही राजनीति की नयी इबारत है.

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