कर्नाटक का मां चामुंडेश्वरी देवी मंदिर, यहां गिरे थे माता सती के बाल

मां चामुंडेश्वरी देवी मंदिर

51 शक्तिपीठों में से एक, मां चामुंडेश्वरी देवी का यह मंदिर कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर से 13 किमी दूर चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित है. यह मंदिर मां दुर्गा के ही एक स्वरूप मां चामुंडेश्वरी को समर्पित है. यह स्थान हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक स्थान है और चामुंडेश्वरी देवी को दुर्गा जी का ही रूप माना जाता है.

चामुंडेश्वरी मंदिर को 18 महाशक्तिपीठों में से एक माना जाता है क्योंकि मान्यताओं के अनुसार यहां देवी सती के बाल गिरे थे. स्थानीय निवासियों की मानें तो शक्तिपीठ की रक्षा के लिए कालभैरव भी यहां सदैव विराजमान रहते हैं.

चामुंडी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर मां दुर्गा के हाथों राक्षस महिषासुर के वध का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि देवी ने जिस जगह पर राक्षस महिषासुर का वध किया था, वहीं आज मां चामुंडेश्वरी देवी मंदिर है.

चामुंडी पहाड़ी पर महिषासुर की एक ऊंची मूर्ति है और उसके बाद मंदिर है. पौराणिक काल में यह क्षेत्र क्रौंच पुरी कहलाता था. इसी कारण दक्षिण भारत में इस मंदिर को क्रौंचा पीठम नाम से भी जाना जाता है.

मंदिर की वास्तुकला

यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का एक अच्छा नमूना है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित देवी की प्रतिमा शुद्ध सोने की बनी है. मंदिर की इमारत सात मंजिला है, जिसकी कुल ऊंचाई 40 मीटर है. मुख्य मंदिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित एक छोटा सा शिव मंदिर भी है, जो 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है.

पहाड़ की चोटी से मैसूर का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है. यहां के लोगों का मानना है कि मैसूर शहर के लोगों पर मां चामुंडा की खास कृपा है. उनके आशीर्वाद से ही मैसूर शहर हर सदी में तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. मैसूर के दशहरे के मौके पर निकाली जाने वाली झांकी में मां चामुंडा की प्रतिकृति को ही राजा की जगह पालकी पर आसीन किया जाता है.

चामुंडेश्वरी मंदिर को 18 महाशक्तिपीठों में से एक माना जाता है क्योंकि मान्यताओं के अनुसार यहां देवी सती के बाल गिरे थे. स्थानीय निवासियों की मानें तो शक्तिपीठ की रक्षा के लिए कालभैरव भी यहां सदैव विराजमान रहते हैं.

चामुंडेश्वरी मंदिर से जुड़ी कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर को ब्रह्माजी का वरदान प्राप्त था कि वह केवल एक स्त्री द्वारा ही मारा जाएगा. इसके अलावा अन्य कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता था. वर प्राप्त करने के बाद महिषासुर ने देवताओं और ऋषियों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया. इससे दुखी देवताओं ने महिषासुर से छुटकारा पाने के लिए महाशक्ति भगवती की आराधना की.

देवी भगवती ने देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर उन्हें महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया. इसके बाद देवी भगवती और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ. देवी ने सभी असुरी सेना का वध कर अंत में महिषासुर का मस्तक काट ​दिया. देवी के इस रूप को चामुंडा का नाम दिया गया.

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नवरात्रि में विशेष दर्शन

दक्षिण के अन्य मंदिरों की तरह ही चामुंडेश्वरी मंदिर में सामान्य दर्शन के अलावा विशेष दर्शन का भी कूपन उपलब्ध रहता है. चामुंडा देवी के दर्शन के लिए रोज देश भर से हजारों श्रद्धालु वहां पहुंचते हैं. नवऱात्रि के समय मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है. चामुंडा पहाड़ी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला में आवास की सुविधा उपलब्ध है. यहां अन्न क्षेत्र का भी संचालन होता है, जहां आप भोजन ग्रहण कर सकते हैं.

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कैसे पहुंचें चामुंडेश्वरी देवी मंदिर

रेल मार्ग
बैंगलोर रेलवे स्टेशन सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है. बैंगलोर से मैसूर के बीच अनेक रेलें चलती हैं. शताब्दी एक्सप्रेस मैसूर को चेन्नई से जोड़ती है.

सड़क मार्ग
कर्नाटक सड़क परिवहन निगम और पड़ोसी राज्यों के परिवहन निगम तथा निजी परिवहन कंपनियों की बसें मैसूर से विभिन्न राज्यों के बीच चलती हैं.

वायु मार्ग
नजदीकी हवाई अड्डा बैंगलोर 139 किलोमीटर है. यहां से सभी प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें आती जाती हैं.

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