क्या खुद शी जिनपिंग है LAC पर तनाव की मुख्य वजह

Anupan Tiwari अनुपम तिवारी, लखनऊ 

सीमा पर तनातनी को सुलझाने की दिशा में मंगलवार को भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों की बैठक अब चुशुल में होगी. यह दोनों पक्षों के बीच LAC पर सैनिक जमावड़ों को कम करने की दिशा में चौथी बैठक है. उधर एक नए खुलासे ने सबको चौंका दिया है कि पिछले दिनों LAC पर गलवान घाटी, पेंगोंग झील समेत कई इलाकों में चीनी सेना ने जो घुसपैठ की थी वह एक सोची समझी साज़िश का हिस्सा थी जिसके लिए एग्जीक्यूटिव आदेश खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दिए थे.

कहा जा रहा है कि मई के महीने मे एक दूसरे से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित इलाकों पर लगभग एक साथ ही किये गए सीमा उल्लंघन बिना किसी लंबी तैयारी और उच्च स्तर की कोऑर्डिनेशन के बिना संभव नही थे. इन्ही घुसपैठों की वजह से कई जगह तीखी झड़पें देखने को मिली. पूरे मई के महीने भर अच्छी खासी तादाद में चीन ने LAC पर सैन्य जमावड़ा तो बढ़ाया ही, साथ ही अंदरूनी इलाकों में भी सेना की तैनाती कर दी.

12 मई को लद्दाख से सटी शिनजियांग-तिब्बत सीमा पर और 13 मई को उत्तरी सिक्किम के नाकु ला में चीनी जमावड़ा देखा गया. नाकु ला में ही 9 मई को भारतीय सेना के साथ झड़प की खबर भी आई थी. इनके अलावा चीनी सैनिकों ने पेंगोंग त्सो झील, गलवान घाटी, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा, चिप चाप, स्पंग्गुर दर्रे, और चांगलुङ्ग ला में भी अपनी तैनाती ठीक उसी समय बढ़ाई थी. इसके अलावा जून आते आते भीतरी इलाकों में भी सेना का जमावड़ा बढ़ा दिया गया था.

अगर गलवान घाटी और पेंगोंग झील के इलाके की बात करें तो यहां चीनी सेना (PLA) के जमावड़े का सिर्फ एक लक्ष्य था कि किसी भी तरह भारत के अधिकार वाली भूमि पर कुछ किलोमीटर अंदर तक वह अपनी स्थायी पकड़ बना ले. इस तरह से LAC को वह भारत की ओर कुछ पीछे करने में सफल हो जाएगा.

गलवान घाटी में सेनाओं के लौटने की प्रक्रिया अभी चालू है, जिसको दोनों सेनाएं अपने अपने स्तर पर वेरीफाई भी कर रही हैं. दूसरी तरफ पेंगोंग झील वाले इलाके में चीन फिंगर 4 से पीछे हट कर फिंगर 5 तक चला गया है, जो कि भारत द्वारा मान्य LAC यानी फिंगर 8 से अब भी काफी अंदर है.

सैन्य अभ्यास की आड़ में LAC पर सैनिक जमावड़ा

LAC पर चीन द्वारा किये जा रहे बड़े सैन्य जमावड़े की शुरुआत जनवरी के महीने में ही हो गयी थी, जिसको तब एक सामान्य सैनिक अभ्यास समझ कर अनदेखा कर दिया गया था. दरअसल लदाख से सटे चीन के शिनजियांग प्रान्त में चीन हर साल इस तरह के सैन्य अभ्यास करता रहा है. परंतु वह सीमा से काफी दूर, भीतरी इलाकों में हुआ करते थे. इसके विपरीत लगभग पूरी LAC पर इस साल अप्रैल तक बहुत बड़ी संख्या में सेना का जमावड़ा कर दिया गया.

सेना के इन सालाना अभ्यासों के लिए राष्ट्रपति जिनपिंग हर साल एक आदेश जारी करते रहे हैं. इस साल जो आदेश जारी किया गया उसमे गत वर्षों से अलग हट कर गाइड लाइन थीं. जिसमें समूचा जोर अपनी सेना को सशस्त्र रूप से, ‘लगभग युद्ध की स्थिति’ के लिए तैयार करना था.

गाइड लाइन में इस बदलाव ने बड़े ही नाटकीय ढंग से सालाना युद्धाभ्यास का स्वरुप बदल दिया. सिर्फ भारत से लगी सीमा पर ही नही, बल्कि दूसरे मोर्चों जैसे जापान, ताइवान और दक्षिणी चीन सागर पर भी चीनी सेना ने तनाव की स्थिति पैदा कर दी.

PLA के सैनिकों का जमावड़ा जनवरी में उक्त आदेश के पारित होने के बाद से ही शुरू हो गया था. शुरू में इसने 200 किमी लंबे उस क्षेत्र को अपना निशाना बनाया जो पेंगोंग झील से गलवान घाटी तक फैला है. और इसी के फलस्वरूप 5 मई को भारतीय सेना के साथ उनकी पहली झड़प हुई.

अप्रैल के बाद से लगातार भारत साथ कई सैनिक झड़पें

भारत और चीन के बीच जमीन पर सीमा का निर्धारण न हो पाना इन झड़पों की तात्कालिक वजह बन जाती है. लदाख में कम से कम 11 ऐसे बिंदु हैं जिनको लेकर दोनों पक्ष एक राय नही हैं.

गलवान घाटी ऐसा ही एक बिंदु है. चीन अपने आधिकारिक नक्शे में LAC को गलवान और श्योक नदियों के मिलन स्थल, जिसे ‘Y नाला’ कहा जाता है, से गुजरती हुई दिखाता आया है. भारत के अनुसार LAC इसके 1 किमी पूरब में है. भारतीय सैनिक हमेशा से इसी स्थान के आसपास बने अपने पेट्रोलिंग पॉइंट 14 तक गश्त करते रहे है. इसी जगह पर ऐसी ही एक गश्त ने 15 जून की रात को हिंसक रूप ले लिया था.

5 मई की रात को इस स्थान से 200 किमी दूर पेंगोंग झील के उत्तरी छोर पर स्थित एक संकरी पहाड़ी ‘फिंगर 4’ पर भी दोनों पक्षों में झड़प की सूचना मिली थी. यहां पर खास बात यह है कि दोनों पक्ष LAC की समझ के अपने अपने दावे पर बरसों से कायम हैं, किंतु कभी विवाद की स्थिति नही आने पाई थी. एक अनकहा समझौता सरीखा हो रखा था. जहां चीन फिंगर 4 तक कि जगह अपने नक्शे में दिखाता रहा है, वहीं भारत फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करता आ रहा है. फिंगर 1 से 8, दरअसल पश्चिम से पूर्व की ओर एक रेखा में फैली हुई पहाड़ियां हैं.

अप्रैल की शुरुआत से ही चीन ने भारतीय सेना के Y नाला पार करने और पेट्रोलिंग पॉइंट 14 तक आने पर आपत्ति करनी शुरू कर दी थी. अपने इसी दावे के तहत 7 जुलाई को उन्होंने कुछ सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की कि भारत ने Y नाला और LAC के बीच वाले इलाके पर नए पुल का निर्माण शुरू कर दिया है. यह तस्वीरें उसने मई की बताई हैं हालांकि इनकी सत्यता की पुष्टि अभी तक नही हो पाई है.

19 जून को जारी एक बयान में चीनी सरकार ने भारतीय सेना पर, 5 मई की रात LAC पार करने का आरोप भी लगाया था. चीन का आरोप है कि हाल ही में भारत ने LAC के अपनी तरफ सड़क निर्माण सरीखी जो गतिविधियां की हैं उसके माध्यम से वह सीमा का अतिक्रमण करना चाहता है. और इस आरोप के तहत वह गलवान घाटी में हुई 15 जून की उस झड़प को भी उचित ठहराने की कोशिश करता है जिसमे 20 भारतीय और कई चीनी सैनिक शहीद हो गए थे.

1960 में सीमा को ले कर चीन के दावे को लगभग स्वीकार करते हुए LAC पर सहमति बनी थी. किंतु अब चीन LAC के पश्चिम में भी कुछ दूर तक अपना दावा ठोंकने लगा है. Y नाला में उसका दावा इसी सोच को दर्शाता है. भारत के कड़े रूख का कारण भी यही है.

अब जब कि दोनों सेनाओं के लौटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, PLA की यह व्यापक रणनीतिक मोर्चेबंदी यही दर्शाती है कि चीन कई कदम आगे बढ़ कर कुछ कदम पीछे लौट रहा है. चूंकि सैन्य जमावड़े की तैनाती से सम्बंधित चीनी राष्ट्रपति का आदेश 2021 तक प्रभावी रहेगा, निकट भविष्य में तो दोनों पक्षों के बीच सीमा पर तनाव कम होता नही दिख रहा है. संभव है कि इसके जवाब में भारत भी सीमाओं की रक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाए. जैसे स्थायी रूप से लेह में पहले से तैनात 14वीं कोर के साथ ही सेना अपनी एक डिवीज़न की तैनाती और कर दे, या सीमा के निकट अपने हवाई बेड़े को स्थायी रूप से वहीँ तैनात रखे.

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