India that is Bharat

—ब्रजेश 

जून 2020 प्रथम सप्ताह में उच्चतम न्यायालय दिल्ली ने व्यापारी नामह की याचिका
जो भारत देश का नाम इंडिया के स्थान पर हिंदुस्तान या भारत रखा जाए, जिसे
खारिज करते हुए कहा की संविधान में ‘भारत’ शब्द पहले से मौजूद है, याचिका को
अनावश्यक माना, इस तरह की याचिका 2016 में भी खारिज हो चुकी है ।
भारत शब्द को समझने के लिए हमें उपलब्ध प्राचीन ग्रन्थों, एतिहासिक
साक्ष्यों पर नजर डालनी होगी, तभी भारत शब्द समझा जा सकता है । ऋग्वेद के
प्रसिद्ध दस-राज युद्ध के मुख्य सुदास के पिता दिवोदास के भरतों से संबंध का वर्णन
मिलता है, भरत शब्द भारत शब्द की नीव कहा जा सकता है । पुरू, त्रित्सु और
भरत एक जाति की शाखाएँ थी अथवा भिन्न जातियाँ थी जो कालांतर में एक हो गईं
। दिवोदास को भरत भरत कहे जाने के कारण सुदास भी भरत माना गया । (
Who were Shudras; by Dr. B.R.Ambedkar) 
कई विद्वानों के भिन्न भिन्न मत हैं, प्रसिद्ध कवियत्री, अथर्ववेद एवं प्राचीन
साहित्य की जानकार रति सक्सेना कहती हैं कि वेदों की ऋचाओं और सूक्तों के रचने
में कई वर्षों का समय लगा, तथा कई ऋषियों ने अलग अलग काल में इन्हे
रचा, ऋग्वेद तथा अन्य यजुर्वेद, सामवेद के बाद ब्राहमण रचे गए जिसमें शतपथ
ब्राहमण सबसे प्राचीन माना गया जिसमें दुष्यंत-शकुंतला, नल-दमयंती आदि की
कथाएँ है । दुष्यंत-शकुंतला की कथा में भरत का उल्लेख है, इन्हे दौष्यंती भरत कह
सकते है ।   
इसके बाद पुराणों पर नजर डालते है जिसमें स्वयंभू के पुत्र मनु के एक पुत्र
प्रियंवद और वंशावली में भरत का नाम मिलता है, एक विशेष ध्यान रखने योग्य
बात है की मनु का जिक्र वेदों, ब्राह्मण, पुराण, स्मृति, उपनिषदों में भी मिलता
है, जबकि सारे अलग अलग काल खंड की रचनाए है, तात्पर्य है कि कई मनु हुए
है, ऐसे कई अन्य नाम भी है । इसके अलावा वायु पुराण मुख्य है, इसके संबंध में आगे
वर्णन मिलेगा, महाभारत के भीष्म पर्व में भरत का वर्णन है, सबसे प्रमुख है कवि
कालीदास द्वारा रचित ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ जिसमें  दौष्यंती भरत को प्रमुखता से
दर्शाया है ।      
               एतिहासिक पुरातत्व में फारस के हखमानी सम्राट दारयुवौष के लगभग
525 ई. पू. के पर्सिपोलिश के अभिलेख में Hi n dauv शब्द का उल्लेख मिलता है, पर
इसमें ‘न’ अक्षर को संस्कृत में पढ़ने के लिए रोपित किया गया है, यही से हिन्दू शब्द
की उत्पत्ति मानी गयी है, फारस के लोगों ने हिन्दू शब्द ‘सिंधु क्षेत्र’ के लिए प्रयोग
किया, इसी शब्द को यूनानियों ने ‘इंड’ शब्द की तरह प्रयोग किया ऐसा माना
गया,जिसमें मेगस्थनीज की इंडिका को प्रमुख माना जा सकता है । चीनी यात्री
ह्वेन-सांग ने इन्दु शब्द का प्रयोग किया जिसे चंद्रमा भी कहा गया । बौद्ध साहित्य
में भारत देश को प्रायः जंबूद्वीप के रूप में उदघृत किया गया है । यहाँ ध्यान देने की
बात यह है कि मौर्य शासन के पहले और उपरांत कभी भी भारत देश, आधुनिक
 भारत जैसा नहीं था है, हर काल खंड में अलग अलग प्रान्तों पर अनेकों राजाओं ने
शासन किया, अनेकों आक्रमण हुए । मध्य काल  में मुस्लिमों का शासन रहा । कब

कैसे इस देश को भारत नाम मिला और अनुसंधान की आवश्यकता है । यह भी कहा
जा सकता है कि यदि इंडिया और भारत को अलग अलग दृष्टि से देखा जाएगा तो
अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्राचीन इतिहास, साहित्य, शिक्षा और व्यापार पर
प्रभाव अवश्य पड़ेगा, हर स्तर पर बदलाव फौरी तौर पर संभव नहीं है, इसीलिए
संविधान सभा की बहस में India that is Bharat को स्वीकृत कर लिया गया ।
                आजादी के समय सरदार पटेल, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू
एवं संविधान प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष बाबा साहब डा. बी. आर. अंबेडकर एवं अन्य
ने कई प्रान्तों को एकत्र कर संघीय रूप दिया, जिसके लिए संविधान सभा की बहस
का अध्ययन करना आवश्यक है – यथा
संविधान सभा की बहस
रविवार, 18 सितंबर, 1949
भारत की संविधान सभा – वॉल्यूम IX
तत्कालीन संविधान सभा के अध्यक्ष, राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डा.
बी. आर. अंबेडकर, एम. तिरुमलराव, के. एम . मुंशी, बृजेश्वर प्रसाद, एच . वी.
कामत, एस. नागप्पा, मौलाना हसरत मोहानी एवं अन्य कई सदस्य उपस्थित ।
बाबा साहब ने संविधान के आर्टिकल-1 में ‘India that is Bharat’ को लिखा
जिसके संबंध में चर्चा हो रही थी, कुछ प्रमुख बिन्दु –      
सेठ गोविंद दास – * भारत शब्द हमारी प्राचीन पुस्तकों में नहीं है । जब यूनानी
भारत आए तो इसका प्रयोग होने लगा । उन्होंने हमारी सिंधु नदी का नाम सिंधु
रखा और भारत सिंधु से प्राप्त हुआ । विश्वकोश ब्रिटानिका में इसका उल्लेख है ।
इसके विपरीत यदि हम वेदों को देखें, उपनिषद ब्राह्मणों और हमारी महान और
प्राचीन पुस्तक महाभारत है तो हमें भरत नाम का उल्लेख मिलता है । (भीष्म पर्व)
विष्णु पुराण में भी हमें भारत; का उल्लेख मिलता है ।
ब्रह्म पुराण में भी हम इस देश को ;भारत के रूप में वर्णित किया गया है । ह्वेन-
सांग नाम के एक चीनी यात्री ने अपनी ट्रैवल बुक में इस देश को भारत के रूप में
संदर्भित किया है ।
                जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री और अन्य माननीय सदस्य कहते हैं, मेरी
सभा को इन प्राचीन मामलों की याद दिलाते हुए यह नहीं समझा जाना चाहिए कि
मैं पिछड़ा हुआ हूं । मैं आगे देखना चाहता हूं और मैं यह भी चाहता हूं कि इस देश में
वैज्ञानिक आविष्कार होने चाहिए । लेकिन अपने देश को भारत का नाम देकर हम
ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं जिससे हम आगे बढ़ने से रोक सकें । हमें वास्तव में अपने
देश को ऐसा नाम देना चाहिए जैसा कि हमारे इतिहास और हमारी संस्कृति के लिए
उपयुक्त हो सकता है । यह बहुत खुशी की बात है कि आज हम अपने देश का नाम
भारत बता रहे हैं । मैंने पहले भी कई बार कहा था कि यदि हम इन मामलों के संबंध
में सही निर्णय नहीं लेते हैं तो इस देश के लोग स्वशासन के महत्व को नहीं समझेंगे ।

श्री कल्लूर सुब्बा राव (मद्रास) : महोदय, मैं दिल से भारत नाम का समर्थन करता
हूं, जो प्राचीन है. भारत नाम ऋग्वेद में है (ऋग्वेद 3, 4, 23.4 के माध्यम से) वायु
पुराण में भी भारत की सीमाएं दी गई हैं-
"इदम तु मध्यम चित्रम शुभाशुभ फलोदायम ।
उत्तरम यत्स्मुद्रस्य हिम वन दक्ष्नम चयत ।।
Idam tu madhyamam chitram shubhashubh phalodayam
Uttaram yatsmudrasya hima vana dakschnam chayata."
(Vayupuran U45-75).
इसका अर्थ है कि हिमालय के दक्षिण और महासागर के उत्तर में स्थित भूमि को
भारत कहा जाता है । इसलिए भारत नाम बहुत प्राचीन है । इंडिया नाम सिंधु नदी
से आया है, और अब हम पाकिस्तान को हिंदुस्तान कह सकते हैं क्योंकि सिंधु नदी
वहीं है ।  सिंध हिंद बन चुका है क्योंकि संस्कृत का ;स प्राकृत में ;ह; के रूप में
उच्चारित होता है । यूनानियों ने हिंद को इण्ड के रूप में उच्चारित किया ।  इसके बाद
यह सही और उचित है कि हमें इंडिया को भारत के रूप में संदर्भित करना चाहिए ।
मैं सेठ गोविंद दास और अन्य हिंदी मित्रों से अनुरोध करूंगा कि वे हिंदी भाषा को
भी भारती नाम दें, मुझे लगता है कि हिंदी को भी भारती नाम से प्रतिस्थापित किया
जाना चाहिए, क्योंकि भारती विद्या की देवी को दर्शाता है ।

Mr. President : It was ruled out of order.
     The question is :
That for clauses (1) and (2) of article 1 the following clauses be substituted:
(1 ) India, that is, Bharat shall be a Union of States.
     (2) The States and the territories thereof shall be the States and their territories for the
time being specified in Parts I, II and III of the First Schedule.; "
The amendment was adopted.
     Mr. President : The question is :
    That article 1, as amended, stand part of the Constitution."
The motion was adopted.
Article 1, as amended, was added to the Constitution.
CONSTITUENT ASSEMBLY OF INDIA DEBATES (PROCEEDINGS) -VOLUME IX
Sunday, the 18th September 1949

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles