भुला दी गई फिरोज गांधी की अहम शख्सियत-

अरुण कुमार गुप्ता
अरुण कुमार गुप्ता

एक स्वतंत्रता सेनानी, प्रधानमंत्री के दामाद, पति और पिता रहे रायबरेली से मुखर सांसद स्व. फिरोज गांधी जी का 8 सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया था। वह दो बार रायबरेली से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य रहे थे। सांसद के रूप में वह सदैव विभिन्न विषयों पर बेबाकी से अपनी बात कहने के लिए भी जाने जाते रहे.

दो दिन के अखबार देखे, करीब-करीब सभी न्यूज चैनल भी खंगाल डाले लेकिन कहीं कोई जिक्र नहीं। जिस शख्सियत फिरोज गांधी ने पचास के दशक में अपनी पार्टी की ही सरकार के दौरान कई बार बड़े भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा संसद में कर वित्तमंत्री को इस्तीफा देने को विवश कर दिया हो, जो भारत के एक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का दामाद हो, इंदिरा गांधी एक का पति और एक अन्य राजीव गांधी का पिता.

मीडिया में फिरोज गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने /स्मरण किए जाने संबंधी समाचारों की प्रतीक्षा कर रहा था । यही नहीं, 02 दिनों बाद फिरोज गांधी का जन्मदिन भी है।गुजरात के भड़ौच से मुंबई जा बसे एक पारसी परिवार में  दि. 12/09/1912 में जन्मे फिरोज जहांगीर गांधी (  Ghandy-वह पारसी परिवार के थे न कि मुस्लिम, जैसा सोशल मीडिया में कई जगह वायरल हो रहा है)

पिता के निधन के बाद बचपन में ही फिरोज गांधी मां के साथ इलाहाबाद चले गए थे। मात्र 18 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ कर फिरोज गांधी स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और लगभग डेढ़ साल फैजाबाद जेल में कैद रहे। फिरोज गांधी इस दौरान नेहरू परिवार के निकट आ गये। टीबी की बीमारी से जूझ रहीं स्व. कमला नेहरू के साथ वह पहले भुवाली सेनिटेरियम और फिर उनकी मृत्युपर्यंत Switjarlaind के लासेन में उनकी देखभाल करते रहे।

इस दौरान इंदिरा जी के साथ फिरोज गांधी मित्रता की परिणति 1942 में विवाह के रूप में हुई, जिसके छः महीने बाद भारत छोड़ो आंदोलन में एक साल के लिए दोनों नैनी जेल में निरुद्ध रहे। वह नेहरू जी द्वारा स्थापित एसोसिएटेड जर्नल्स के प्रबंध- निदेशक बने, जहां से नेशनल हेराल्ड व नवजीवन अखबार प्रकाशित होते थे।

फिरोज गांधी रायबरेली से 1952 व 1957 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। एक सांसद के तौर पर उन्होंने बड़े व्यापारी राम कृष्ण डालमिया द्वारा बैंक व बीमा कंपनी के फंड के अपने हित में इस्तेमाल का मामला उठाया, जिसके बाद जीवन बीमा कंपनियों के राष्ट्रीयकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

फिरोज गांधी ने 1958 में हरिदास मूंदड़ा के भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ वित्तीय घोटाले का मामला उठाया, जिसमें घिरी अपनी पार्टी की सरकार के वित्तमंत्री टी टी कृष्णमाचारी को इस्तीफा देना पड़ा था।

स्व. फिरोज गांधी जी का प्रारब्ध ही कहा जाएगा कि भारत के तीन प्रधानमंत्रियों के दामाद, पति व पुत्र होने के साथ-साथ एक मुखर व निर्भीक सांसद होने के बाद राष्ट्र ही नहीं उनका परिवार भी उन्हें लगभग विस्मृत कर चुका है।

 माह सितंबर के दूसरे सप्ताह में उनकी पुण्यतिथि व जन्मदिन के अवसरों पर क्या किसी के पास  उन्हें स्मरणकरने के लिए समय है।मेरी ओर से एक मुखर, निर्भीक व श्रेष्ठ सांसद के रूप में उन्हें आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। 

अरुण कुमार गुप्ता।IPS (retd. IG Police)

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