कोविड – 19 का प्रसार और उसके सबक़

सन्तोष कुमार, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर 

पिछले वर्ष का अंतिम महीना एक अंतहीन से प्रतीत होने वाले संकट से दो -चार करा गया। अचानक मीडिया में एक रहस्यमय वायरस का ज़िक्र होने लगा। लोगों ने इस वायरस को भी मर्स, सार्स, निपाह और इबोला जैसे ही लिया। उम्मीद भी यही थी कि इन विषाणुओं की तरह इसका भी आंशिक असर होगा। किन्तु चीन के वुहान से शुरू होकर आज यह वायरस 210 देशों में जा पहुंचा है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि लगभग पूरे ग्रह में फैलने में इसे 4 माह से भी कम समय लगा है। इससे अब तक लगभग 15 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या 80 हज़ार से अधिक है।

संतोष कुमार

कोरोना विषाणुओं के एक परिवार का नाम है। इसमें कई वायरस शामिल किये जाते हैं। एक प्रचलित थ्योरी के मुताबिक कोरोना वायरस चमगादड़ से इंसानों में पहुंचा है। दक्षिण – पूर्व एशिया में पेंगोलिन नामक एक जीव पाया जाता है। जंगल में यह चमगादड़ के मल -मूत्र के संपर्क में आया। इसी कारणवश यह संक्रमित हुआ और इसने अन्य जानवरों को भी संक्रमित किया। बाद में यही जानवर वुहान की मंडी में लाये गए। माना जाता है यही वह जगह है जहाँ पर मनुष्य पहली बार इस वायरस से संक्रमित हुआ और उसने अन्य लोगों को भी संक्रमित किया। इस मत की पुष्टि होनी बाकी है। हाल ही में एक ब्रिटिश अख़बार डेली मेल ने ब्रिटिश एजेंसी के रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि वास्तव में यह वुहान की विषाणु विज्ञान संस्थान से लीक हुआ है। जो बाद में महज़ कुछ मील दूर वुहान के पशु बाजार में पहुँच गया।

जब रहस्यमय वायरस (कोरोना/ कोविड 19 ) को लेकर मीडिया में  ख़बरें आयीं थीं तो यही लगा था कि मर्स, सार्स, निपाह और इबोला की तरह यह भी होगा। लेकिन देखते -देखते इसका फैलाव दुनिया के 200 से अधिक देशों में हो गया है। किन्तु इसका फैलाव और दुष्प्रभाव दो अलग – अलग बातें हैं। चीन, इटली, ईरान, स्पेन, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका में इसने काफी नुकसान किया है तो बड़ी संख्या ऐसे देशों की है जहाँ यह नियंत्रण में है। जिन देशों ने बचाव को कठोरता से लागू किया वे आज या तो इससे मुक्त हैं या इसको मज़बूती से नियंत्रित किये हुए हैं। ताइवान, चीन का एक निकटतम पडोसी है लेकिन वहां जिस प्रकार से सरकार ने काम किया, वह प्रशंसनीय है।  द्वीपीय देश ताइवान में इस बीमारी के पहुँचने की आशंका को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय सरकार ने वायरस के प्रसार को  प्रभावी तरीके से काबू किया। यही वजह है कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक यहाँ महज़ कुछ सौ केस ही रिपोर्ट हुए थे। जबकि यहाँ की आबादी लगभग ढाई करोड़ है।  दक्षिण कोरिया के प्रयासों की प्रशंसा पूरे विश्व में हो रही है। यह देश भी चीन का पडोसी है और यहाँ संक्रमण के आरम्भिक मामले चीन से आये लोगों के ज़रिये फैले। इस देश का डेगू शहर इस संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित रहा। अचानक बड़ी संख्या में हज़ारों की तादाद में मामले आने लगे। लेकिन यहाँ की मशीनरी लगातार सही दिशा में काम करती रही। सबसे महत्वपूर्ण था कि अधिक -से- अधिक टेस्टिंग के ज़रिये इसे रोका जाये। दक्षिण कोरिया की प्रोएक्टिव सोच ने इस देश को भारी तबाही से बचा लिया।

विएतनाम जैसे देशों का प्रबंधन भी अनुकरणीय है। वियतनाम ने कोरोना प्रसार से निबटने के लिए  कठोर तरीकों का सहारा लिया। विदेश से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को ट्रैक किया गया। हालाँकि वियतनाम के इन प्रयासों की आलोचना भी हुई किन्तु वहां कोरोना पर समय रहते काबू पा लिया गया।  वहीँ ईरान, इटली, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और स्पेन में गंभीर क्षति के पीछे एक ही कॉमन बात सामने आ रही है। यह है बचाव के पर्याप्त उपाय न हो पाना या उनके क्रियान्वयन में लापरवाही।

आर्थिक प्रतिबंधों से खस्ताहाल हुए ईरान में विषाणु के प्रसार में परम्पराएं सारथी के रूप में सहायक हुईं। ईरान, आर्थिक प्रतिबंधों के चलते पहले ही काफी टूट चुका है। कोरोना ने जब यहाँ दस्तक दी तो शुरुआत में घोर लापरवाहियां की गयी।  सबसे बड़ा कारण ऐसी परम्पराएं थीं जिससे लोग – एक दूसरे के संपर्क में आये। जब तक इस पर नियंत्रण लगाया जाता, यह संक्रमण देश को जकड  चुका था। मार्च के तीसरे सप्ताह तक लगभग दो हज़ार लोग मारे जा चुके थे। ईरान की कमज़ोर स्वस्थ्य सेवाओं को इसके लिए ज़िम्मेदार माना जाता है।  इटली में जब तक प्रभावी कदम उठाये जाते, यह अनेक क्षेत्रों में विस्तार पा चुका था।इस देश में शुरू में बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया गया। लोग बेरोक -टोक घूमते -फिरते रहे। परिणाम यह निकला कि इटली एक बड़ी मुसीबत में फंस गया। उत्तर का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है जहाँ हज़ारों  की  संख्या में लोग मारे गए हैं। सेवा में लगे चिकित्सकों को यह तय करना पड़ रहा है कि किसे वेंटीलेटर पर रखा जाये और किसे नहीं ? इटली में अब तक सत्रह हज़ार लोग इस संक्रमण से अपनी जान गवां चुके हैं।

ब्रिटेन का विश्वास हर्ड इम्युनिटी पर अधिक था। ब्रिटेन भी कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी इससे संक्रमित है और सघन केयर में भर्ती हैं। ब्रिटेन के अलावा फ्रांस, स्पेन और जर्मनी कोरोना की गिरफ्त में  चुके हैं। स्पेन में हज़ारों लोग मारे गए हैं और वहां की 85 वर्षीय राजकुमारी की भी इससे मौत चुकी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो मानते हैं कि यह एक गंभीर आपदा है और इससे निबटने के लिए कठोर निर्णय लिए  जाने की ज़रूरत है। यूरोप में  अपवाद स्वरुप जर्मनी है जहाँ संक्रमितों की बड़ी संख्या होने के बावजूद भी मृत्यु दर में भारी कमी देखी जा रही है।

अमेरिका कठोर उपाय न अपनाकर आर्थिक क्षति से बचना चाहता था। इसी कारण अमेरिका की स्थिति बेकाबू हो चली है। यहाँ संक्रमितों की संख्या 4 लाख को पार कर गयी है जबकि मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हज़ार से अधिक हो गयी है। यहाँ न्यूयार्क सबसे अधिक प्रभावित है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्थिति को काबू में लाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से जहाँ  दवाई के  निर्यात में ढील देने को कहा है वहीँ बड़ी संख्या में वेंटीलेटर के निर्माण की बात भी कही है।

इन सबके बीच भारत ने लम्बे समय  तक  इस विषाणु के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण रखा। केंद्र और राज्यों की सरकारों  ने  त्वरित और समय रहते पर्याप्त प्रयास किये। राजनीतिक और प्रशसनिक नेतृत्व ने सही निर्णय लिए। प्रशासनिक मशीनरी की सक्रियता के चलते भीलवाड़ा जैसे स्थान आदर्श मॉडल बन कर उभरे। हालाँकि देश में पॉजिटिव केस तेज़ी से बढे हैं किन्तु अन्य देशों की तुलना में यह संख्या काफी कम है। सरकार के पास पूरा मौका है कि वह इस वायरस की रोकथाम के लिए पर्याप्त प्रयास कर सके। देखा यही गया है कि जिन देशों ने बचाव के बेहतर उपाय किये वहां इस विषाणु को नियंत्रित कर लिया गया है जबकि लापरवाही करने वाले देशों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गयी है। भारत ने लॉक डाउन किया तो उसका असर भी दिख रहा है। किन्तु यह पर्याप्त नहीं है। अभी भी बहुत काम शेष है। ज्यादा- से- ज़्यादा लोगों की टेस्टिंग की जाये। हॉटस्पॉट वाले इलाकों को चिन्हित कर विशेष निगरानी में लाया जाये I उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत में भी इसका तेज़ी से प्रसार रुक जाये। नीति आयोग के अनुसार भारत में अभी 400 ऐसे जिले हैं, जहां पर कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। अधिकतम केस समूह के तौर पर ही रिपोर्ट हुए हैं। भारत के अब तक अस्सी फीसदी केस मात्र बासठ ज़िलों से हैं।

 

 

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