समय से आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल कर ब्लैक फंगस से बचा जा सकता है

कोविड मरीज़ ब्लैक फ़ंगस का शिकार होने से कैसे बचें !

समय से आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल कर ब्लैक फंगस से बचा जा सकता है . ब्लैक फ़ंगस ज़्यादातर उन्हीं मरीज़ों को हो रहा है , जो तबियत बिगड़ जाने पर अस्पताल में आक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर जाते हैं . अगर आयुर्वेद की वाला , कालमेघ , अमृत धारा एवं अन्य औषधियों का प्रयोग किया जाये तो नब्बे फ़ीसदी मरीज़ घर पर ठीक हों जायेंगे और अस्पताल जाने की नौबत ही नहीं आयेगी. 

ब्लैक फंगस को लेकर आजकल चर्चा काफी हो रही है। कोविड के बाद ब्लॅक फंगस का डर अब लोगों में छा रहा है। सरकार इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी कर चुकी है। 

ऐसे में मीडिया स्वराज ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में ब्लैक फंगस से निजात पाने के उपायों पर एक परिचर्चा ऑनलाइन प्लेटफार्म यूट्यूब के मीडिया स्वराज चैनल पर आयोजित किया। 

बीबीसी के पूर्व संवादददाता रामदत्त त्रिपाठी ने इन चिकित्सकों से ब्लैक फंगस के निवारण पर चर्चा की। 

परिचर्चा में डॉ इस्टर्न सांइटिस्ट के संपादक व आयुर्वेद चिकित्सक डॉ राम अचल छत्तीसगढ़ के सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा डॉ संतोष कुमार गुप्ता रांची से न्यूरो सर्जन डॉ सुरेश अग्रवाला और महाराष्ट्र से आयुर्वेद के पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ उदय कुलकर्णी शामिल हुए।

परिचर्चा में ब्लॅक फंगस को चर्मरोग का प्रकार बताते हुए आयुर्वेद में इसके निदान के उपायों को विद्वानों ने बताया। 

मुम्बई से डॉ उदय कुलकर्णी ने ब्लैक फंगस (म्यूकस माइकोसिस) रोग की गंभीरता की चर्चा करते हुए बताया कि यह मुंह में नॉक में या नॉक से होकर आंख या ब्रेन में भी पहुंच सकता है। 

उन्होंने इसके इलाज के लिए नेति विधि से दवाओं का सेवन करने पर जोर दिया। 

वहीं राँची से डॉ सुरेश अग्रवाला ने ब्लैक फंगस को लेकर आयुर्वेद की पुरानी दवाई अमृताधारा समेत अन्य आयुर्वेदिक योगों की चर्चा की और चिकित्सकों को प्रयोग के लिए उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। 

छत्तीसगढ़ से डॉ संतोष कुमार गुप्ता ने ब्लैक फंगस को चर्म रोग की श्रेणी में रखते हुए इसकी चिकित्सा पर जोर दिया। 

साथ ही कोविड के इलाज के लिए आयुर्वेद को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति के तौर पर प्रयोग करने पर बल दिया। 

देवरिया से डॉ राम अचल ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मरीज को शुरुआती दौर में ही 

आयुर्वेदिक चिकित्सा शुरू करने की सलाह दी। इससे सौ प्रतिशत निरोग होने की संभावना रहेगी। 

सभी चिकित्सक एकमत नजर आये कि  हर प्रकार से समृद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को सरकारी स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए अभियान चलाया जाये . 

बड़ी संख्या में कोविड-19 मरीज़ साथ में जानलेवा ब्लैक फ़ंगस का शिकार हो रहे हैं . कोविड रोगी आईसीयू अस्पताल में भर्ती होने के बाद म्यूकोर्मिकोसिस यानी ब्लैक फ़ंगस और अन्य बैक्टीरियाके संक्रमण का शिकार हो रहे हैं . यह ब्लैक फ़ंगस क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है , मीडिया स्वराज में आज की चर्चा इसी विषय पर. चर्चा में शामिल हैं डा उदय विजय कुलकर्णी, डा संतोष कुमार गुप्ता, डा सुरेश कुमार अग्रवाला और डा आरअचल . चर्चा का संचालन कर रहे हैं – बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी.

आज की चर्चा का पैनल

रामदत्त त्रिपाठी, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक , सामाजिक कार्यकर्ता , विधिवेत्ता  और सूचना संचार के विशेषज्ञ हैं. राम दत्त त्रिपाठी ने इक्कीस वर्षों तक बी बी सी लंदन के लिए कार्य किया और वह एक प्रकार से भारत मे बी बी सी की पहचान बन गये.वह उन गिने चुने पत्रकारों में से हैं , जो समाज सेवा के मिशन के लिए पत्रकारिता में आये.श्री त्रिपाठी युवावस्था में सर्वोदय और जे पी आंदोलन से जुड़े और लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के चलते इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे.

Dr. Suresh Kumar Agarwalla,  MBBS, MS ( Surgery) Engaged in clinical research,  integrating Biomedicine(Allopathy ) and Ayurveda  for nearly 30 years.     Area of special interest immunology. Founder of Amrita Family Health Centre at Ranchi.

Dr santosh kumar gupta ,MD Dravyaguna, Govt ayurveda college  patna ,Presently  working under chhattisgarh govt., As ayurveda medical officer since 10 years  ,Posted at govt ayurveda dispensary  rengalpali  raigarh Chhattisgarh

 Dr.Uday Vijay Kulkarni

M. D.  (Kaychikitsa).. Gold medalist..Nasik college

*Diploma in buisness management ..welingkar

*Diploma in Yog Education

डॉ.आर.अचल देवरिया,उ. प्र., आयुर्वेद चिकित्सक(BAMS),लोक, प्राच्यविद्याओं व विज्ञान अध्येता, कवि, लेखक,विचारक,समाजसेवी, फ्रीलांसरमुख्यसंपादक-ईस्टर्न साइन्टिस्ट जर्नल,क्षेत्रीय संपादक-साइंस इण्डिया मासिक(भोपाल), महासचिव-स्वदेशी विज्ञान संस्थानम्सदस्य-राष्ट्रीय संयोजक समिति-वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस.

कृतियाँ-काव्यसंग्रह-लोकतंत्र और नदी,लोकतंत्र और रेलगाड़ी, जरा सोच के बताना,Just tell to thinking,कोरोना काल की कवितायें

*इतिहास-महान गणराज्य गढ़मंडला,

*तंत्र-श्रीविद्या चक्रार्चन महायाग्-वैज्ञानिक विमर्श एवं विधि

*उपन्यास-कोरोना काल कथा-स्वर्ग में सेमीनार,

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