क्या चीन की युद्ध नीति आज भी ढाई हज़ार वर्ष पूर्व के दार्शनिक की नीति पर ही आधारित है ?

—डा चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज

चंद्र विजय चतुर्वेदी

ईसा पूर्व पांचवी शताब्दी में चीन में एक विचारक हुए -सुन त्सु जो युद्ध के प्रसिद्द रणनीतिकार सेना के जनरल और दार्शनिक के रूप में ख्यातिप्राप्त की । इनकी एक प्रसिद्द पुस्तक है -दी -आर्ट आफ वार जो पचीस सौ वर्ष पूर्व लिखी गई ,जो चीनी युद्धकला ,सैनिक कूटनीति के साथ राजनीतिक तत्वज्ञान के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और चीनी सभ्यता के मार्गदर्शक सिद्धांतों को भी समेटे हुए है। इस पुस्तक के ज्ञान का उपयोग चीन पिछले पच्चीस सौ वर्ष से न केवल युद्धकला और राजनीती के बुनियादी तत्वों के समझने में करता है वल्कि व्यापार और दैनिक जीवन के मार्गदर्शन के लिए भी उपयोगी समझता है।

सुन त्सु ने चीन को इस पुस्तक के माध्यम से एक मूलमंत्र दिया की कैसे दुश्मन की ताकत को बिना उसके जाने तोडा जाए और बिना लड़े युद्ध जीत लिया जाए। इस पुस्तक का सारतत्व यदि कुछ वाक्यों में व्यक्त किया जाए तो कहना पड़ेगा —

यह जानो कब युद्ध करना है और कब नहीं। जो दुश्मन की मजबूती हो उसे नजरअंदाज करते रहो ,उसकी कमजोरी पर निरंतर प्रहार करते रहो। आप अपनी शक्ति और कमजोरी को खूब समझ कर तय करो की कब धोखा दिया जाए। तुम जब मजबूत हो तो अपने को कमजोर दिखलायो और जब कमजोर हो तो मजबूत साबित करो। तुम अपने साथ साथ दुश्मन को भी समझते रहो। सौ युद्ध जीत लेना बहादुरी नहीं है बहादुरी है कूटनीति या अन्य माध्यमों से शत्रु को पराजित कर देना।

दी आर्ट आफ वार -पुस्तक क नौ महत्वपूर्ण बिंदु हैं —

1 -अपने युद्ध का चयन खुद करो। जीतेगा वही जो यह जानता है की कब लड़ना चाहिए और कब नहीं

2 -सबसे महत्वपूर्ण है युद्ध के समय का चयन।

3 – अपने देश को तो जानते रहो पर जिस जिस देश से युद्ध करना है उसे हर स्तर पर जानते रहो।

4 -योजना बनाओ जिसे कोई जान न पाए जैसे ही कोई जाने दूसरी योजना चला दो।

5 -हमेशा कोई न कोई विशेष योजना बनाते रहना चाहिए।

6 -युद्ध में लड़ना नहीं जीतना जरुरी होता है।

7 -अवसरों को बदलते रहो।

8 -सफलता से ही सफलता जन्मता है।

9 -लम्बे युद्ध से किसी को भी लाभ नहीं होता।

चीन अपने सोचे समझे युद्धनीति से केवल सीमा पर ही युद्ध नहीं कर रहा है वह केवल देश की भौगोलिक सीमा का ही अतिक्रमण नहीं करना चाहता। वह देश के आर्थिक , सामाजिक ,बौद्धिक सीमाओं पर भी अतिक्रमण कर रहा है ऐसी स्थिति में देश के हर नागरिक को चीन से युद्ध करने के लिए कृतसंकल्प रहना चाहिए। देश के रणनीतिकारों को ऐसे अवसर पर चाणक्य नीति का प्रयोग करना चाहिए —

1 – अपने घनिष्ट मित्रों को चीन से जूझने के लिए प्रेरित करना होगा ऐसी कूटनीतिक स्थिति उत्पन्न करनी करानी होगी।
2 -चीन के शत्रुदेशों को चीन से जुझाने में दिलचस्पी लेनी होगी।
3 -चीनी वस्तुओं के वहिष्कार के साथ साथ देश की आतंरिक आर्थिक स्थिति को मजबूत करना होगा।

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