अध्यात्म
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जबतक जीवन, तब तक काम क्रोध का उद्भव अवश्यंभावी
चतुरश्चिद् ददमानात् बिभीयादा निधातो: न दुरुक्ताय स्पृहयेत् (1.9.6)चज चारों को हतवीर्य करनेवाला जो कोई एक है, देह गिरने तक उससे…
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ऋषि परंपरा के आधुनिक प्रतिनिधि थे विनोबा : उषा बहन
डॉ पुष्पेन्द्र दुबे, लखनऊ (विनोबा भवन) 12 सितम्बर। भारत अरण्य संस्कृति का देश है। यहां के ऋषि-मुनि संस्कृति के उद्गाता…
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गांधी के शब्दों में… श्री विनोबा कौन हैं?
सन 1916 में मेरे हिन्दुस्तान लौटने पर उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया। वे संस्कृतके पंडित हैं। उन्होंने आश्रम में उसकी स्थापनाके…
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विनोबा का नवविचार : विकल्पहीनता में विकल्प की आशा
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज। लोकतान्त्रिक राजतंत्र और वाणिज्यतंत्र के हाथों कठपुतली की तरह नाचते हुए आज का मानव एक ऐसी…
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आज का वेद चिंतन – तुंजेतुंजे य उत्तरे स्तोमा इंद्रस्य वज्र:
विनोबा जी का आज का वेदन चिंतन विचार * तुंजेतुंजे य उत्तरे स्तोमा इंद्रस्य वज्र:* *न विंधे अस्य सुष्टुतिम्। (1.2.5)*…
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वेद चिंतन विचार – प्रमाद
वेद चिंतन विचार यन्ति प्रमादमतंदृा । प्रमाद के कारण हमारे जीवन में प्रगति नहीं होती ,हम रुंध जाते हैं। धर्म…
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