Tag: राम दत्त त्रिपाठी
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वरिष्ठ गांधीवादी और पर्यावरण चिंतक डेविड भाई का निधन, लक्ष्मी आश्रम कौसानी से था गहरा जुड़ाव
उनके पास दशकों से संकलित वर्षा, हिमपात और तापमान का विस्तृत डेटा था, जो हिमालयी पारिस्थितिकी को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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India’s Cradle of Civilisation Under Threat: Pollution Crisis in the Ganga–Yamuna River Basin
For millions of residents, particularly the poor who depend directly on local water sources and agricultural produce, exposure to environmental pollution has become part of everyday life.
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हरिद्वार कुंभ से पहले बड़ा सवाल : क्या गंगा, यमुना और गोमती अब भी जीवित नदियाँ हैं?
( राम दत्त त्रिपाठी ) गंगा नदी कई स्थानों पर पहले से ऑंशिक रूप से साफ़ दिखाई देती है। पक्के घाट चमक रहे हैं। बड़ी संख्या में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। नदी पुनर्जीवन पर बड़े अभियान चल रहे हैं। इन सबसे ऊपर से देखने पर लगता है कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन एक…
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कांशीराम के नाम पर सपा-बसपा आमने-सामने, 2027 विधान सभा चुनाव से पहले क्यों बढ़ी सियासी तल्खी?
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांशीराम की विरासत को लेकर नई बहस सपा – बसपा के इस पुराने इतिहास को फिर जीवित कर रही है।
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी: बसपा से सपा तक — और ओवैसी फैक्टर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में शामिल होना केवल एक नेता की वापसी नहीं, बल्कि एक समूहगत राजनीतिक शिफ्ट है।उनकी यात्रा — BSP में “मिनी CM” की हैसियत से लेकर मायावती से टकराव, कांग्रेस चरण और अब सपा में PDA राजनीति के समर्थन तक — उत्तर प्रदेश की बदलती सत्ता संरचना का संकेत देती है।
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SGPGI Lucknow में “गरिमापूर्ण वृद्धावस्था” पर शैक्षणिक कार्यक्रम, बुजुर्गों की सम्मानजनक देखभाल पर जोर
लखनऊ। उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था बुजुर्गों के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए तैयार है? इसी महत्वपूर्ण प्रश्न को केंद्र में रखते हुए Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (एसजीपीजीआईएमएस) के जनरल अस्पताल और अस्पताल प्रशासन विभाग ने 11 फरवरी 2026 को “गरिमापूर्ण वृद्धावस्था: वृद्धावस्था देखभाल हेतु मार्गदर्शन” विषय पर…
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उत्तर प्रदेश में नई विधानसभा इमारत या नई कार्य संस्कृति और प्राथमिकताएँ ?
यही स्थिति इस बहस को और ज़रूरी बना देती है—क्योंकि मामला केवल एक इमारत का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्राथमिकताओं, सार्वजनिक भूमि के उपयोग और सरकारी खर्च की दूरगामी संरचना से जुड़ा है। पच्चीस करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में लाखों शिक्षित और प्रशिक्षित नौजवान रोज़गार की तलाश में भटक रहे हैं, छोटे व्यापारियों के…


