परिश्रम न करनेवाला खाने का अधिकारी नहीं ।
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अध्यात्म

वेद चिंतन : जो वृद्धों और समान उम्र वालों की सेवा नहीं करता और अकेले खाता है, वह पापी है
विनोबा वेद चिंतन विचार. मोघमन्नं विंदतेअप्रचेता:सत्यं ब्रवीमि वध इत् स तस्य नार्यमं पुष्यति नो सखायम केवलाघो भवति केवालादी । अविवेकी पुरुष…
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