संत राम का ठीहा : भगवान अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेते

यह कहानी  एक दार्शनिक रिक्शा चालक संत राम की है. बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी की मुलाक़ात  संत राम ६७ वर्ष और उनके मित्र मिश्री लाल ८० वर्ष से विक्रमादित्य मार्ग फुट पाठ पर हुई थी.

अंगूठा छाप होने के बावजूद  संत राम भारत की श्रुति और स्मृति परम्परा से धर्म, दर्शन की गूढ़ बातें जानते हैं. हर हाल में खुश रहने का इनका स्वभाव है और ईश्वर में अद्भुत अटूट निष्ठा. साथ में यह सारी दुनियादारी भी जानते हैं.

वह  एक बार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से उनके बंगले पर मिल भी चुके हैं. ये हर रोज़ कमाते हैं, हर रोज़ खाते हैं. ईंटे का चूल्हा रोज़ बनते हैं, बिगाड़ते हैं. शौच के लिए हज़रत गंज जाते हैं. नाले के बग़ल में बम्बे से पानी लेते और नहाते हैं. मेहनत करते हैं और स्वस्थ रहते हैं.

वह विक्रमादित्य मार्ग पर राजनीतिक दलों की प्रचार सामग्री बेंचने वाली दुकान के पास रहते हैं.  संत राम के अड्डे पर अनेक लोग उनसे मिलने आते हैं. ये लोग सरकार की तमाम सुविधा राशन कार्ड, जन धन खाता या नक़द सहायता से वंचित हैं. मज़े की बात है कि ये बड़े लोगों के बारे में  जानते सब हैं.

संत राम पूर्वी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जहां से लाखों गरीब लोग, खेतिहर मज़दूर और छोटे किसान रोज़ी रोटी की तलाश में राजधानी लखनऊ आते हैं. 

 इस अड्डे की यह आख़िरी किश्त है. लिखिएगा , कुल मिलाकर अब तक की बातचीत कैसी लगी. आपने क्या ग्रहण करने लायक़ समझा.

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