बीबीसी हिंदी के सम्पादक कैलाश बुधवार की जीवन यात्रा

आपने कल एक दुखद खबर सुनी कि जाने-माने प्रसारक और बीबीसी हिंदी सेवा के प्रमुख रहे कैलाश बुधवार का शनिवार की सुबह लंदन में निधन हो गया.
88 वर्ष के कैलाश बुधवार पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. 1969 में बीबीसी में काम शुरू करने से पहले वे करनाल के सैनिक स्कूल और राँची के विकास विद्यालय में अध्यापक भी रह चुके थे.रंगमंच का शौक़ उन्हें मुंबई भी ले गया था जहाँ कुछ समय तक उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के साथ पृथ्वी थिएटर में भी काम किया.

अपनी बुलंद आवाज़ के लिए पहचाने जाने वाले कैलाश बुधवार हिंदी और तमिल सेवा के प्रमुख बनने वाले पहले भारतीय थे, उनसे पहले इस भूमिका में अँग्रेज़ अधिकारी हुआ करते थे.कैलाश बुधवार 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में हिंदी और तमिल सेवा के प्रमुख बने थे, और 1991 में रिटायर हुए थे.

उन्होंने एक शानदार जीवन  जिया. ब्रिटेन में बसे कैलाश बुधवार भारतीय मूल के हिंदी लेखक थे । बी.बी.सी. हिंदी सेवा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कैलाश बुधवार पहले भारतीय थे  जो बी.बी.सी. रेडियों में हिन्दी एवं तमिल विभागों के अध्यक्ष रह चुके हैं। एक लम्बे अर्से तक बी.बी.सी. रेडियो में काम करने के पश्चात आजकल वे कथा यू. के. के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे । लंदन का शायद ही कोई ऐसा कार्यक्रम होगा जिसमें वे भागीदारी या अध्यक्षता न कर चुके हों। हिन्दी के कर्मठ सिपाही कैलाश बुधवार कविता भी लिखते थे और मंच पर कवि सम्मेलनों का संचालन भी करते थे । मंच से उनका रिश्ता पृथ्वी थियेटर के दिनों से रहा है। पृथ्वीराज कपूर का असर उनके रेडियो प्रसारण एवं नाटक दोनों ही क्षेत्रों में महसूस किया जा सकता है। NRIfm.com के सम्पादक विजय राणा के साथ बीबीसी के अपने आरंभिक दिनों की याद करते हुए कैलाश बुधवार |

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