जाके प्रिय न राम वैदेही ….राम नगीना मिश्र

राम मंदिर के लिए एक लाख रु का दान

…राम नगीना मिश्र, पूर्व सांसद 

मैंने कांग्रेस में रहते हुए राम जन्मभूमि का मुद्दा संसद में 1988 मे  ही उठाया था। उस समय कांग्रेस में जब यह राम जन्मभूमि का मुद्दा मेरे द्वारा उठाया गया तब कुछ लोगों ने मेरा भारी विरोध किया।मैंने उस समय यह बात कही थी कि राम मंदिर अगर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या क़ाबा में बनेगा ?

इस पर मेरे ऊपर असत्य  के भाषण के लिए  प्रिविलेज मोशन का प्रस्ताव रखा गया और दंडित करने की बात भी की गई। इसके उत्तर में मैंने स्वयं अयोध्या जाकर पूरी सत्यता के प्रमाण जुटाकर गर्भगृह में निर्मित चबूतरा एवं देवी देवताओं की मूर्ति का साक्ष्य प्रस्तुत किया और यह बात प्रमाणित की कि वहाँ राम मंदिर को तोड़कर बाद में मस्जिद बनायी गई थी। तब जाकर मेरे ऊपर लगे प्रिविलेज मोशन को ख़ारिज किया गया।

उस समय संसद में भारतीय जनता पार्टी के केवल दो सदस्य थे, जिन्होंने मेरा समर्थन किया. मैंने कांग्रेस पार्टी को यह प्रस्ताव दिया था कि अपने घोषणा पत्र में अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का प्रस्ताव शामिल करें , किन्तु मेरी यह बात नहीं मानी गई। अतः मैंने दुखी और असंतुष्ट होकर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल से मुलाक़ात की , जिन्होंने मेरा स्वागत करते हुए एक राम भक्त के रूप में मेरा सम्मान किया।

मैंने कांग्रेस पार्टी छोड़ते समय रामचरितमानस कि यह चौपाईजाके प्रिय न राम बैदेही,तजिये ताहि कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेही  प्रेस कांफ्रेंस में कही थी जिसमें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री माननीय अटल बिहारी बाजपेयी जी श्री लालकृष्ण आडवाणी जी एवं डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी जी उपस्थित थे।

मैंने इसी मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी छोड़ देने का विचार किया । जैसे ही लोगों को पता चला कि मैं कांग्रेस पार्टी छोड़ रहा हूँ तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी ने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को मुझे मनाने के लिए भेजा जिनमें ,श्री नारायण दत्त तिवारी जी, श्री लोकपति त्रिपाठी जी एवं श्री जीतेंद्र प्रसाद जी मेरे पास आए और मुझसे वापस पार्टी में बने रहने का अनुरोध किया।

पद का प्रलोभन 

राम नगीना मिश्रा

इस निमित्त मुझे पद का प्रलोभन भी देने का प्रयास किया गया ।पर चूँकि बात राममंदिर निर्माण की थी तो मैंने सभी प्रकार के पद प्रलोभन को ठुकरा दिया । मेरे लिए जीवन में राम मंदिर का निर्माण सबसे बड़ी प्राथमिकता थी. जिसके लिए मैं आजीवन प्रयासरत रहा .इसके लिये मैंने जीवन मे कभी कोई समझौता नही किया ।

 विश्व हिंदू परिषद के साथ मिलकर राम मंदिर बनाने का संकल्प लेकर मैंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की थी. १९९१ में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पडरौना लोक सभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर मैंने विजय हासिल की. तब से लेकर  सन 2004 तक मैं पडरौना के सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व करता रहा

अंततः सत्य की विजय हुई.  यह जानकर कि पाँच अगस्त को भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी राम मंदिर कहा अयोध्या में शिलान्यास करेंगे ,  मेरा वर्षों का संकल्प और सपना पूर्ण हुआ है। मैं लगभग 93 में वर्ष का हो चुका हूँ और अभी तक तो मैं केवल राम मंदिर का सपना लेकर ही जीवित हूँ।

एक लाख रुपए का दान 

मुझे ख़ुशी है कि राम मंदिर निर्माण की यह प्रक्रिया आरंभ हो रही है। मैं सभी राम भक्तों को इस ऐतिहासिक अवसर के लिए बधाई देता हूँ. राम सदा से हम भारतवासियों के लिए आदर्श रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे है। मैं राम मंदिर निर्माण की इस प्रक्रिया में है 1, लाख रुपया की धनराशि देने की घोषणा करता हूँ , जिससे राम मंदिर के निर्माण में ख़र्च किया जाए ऐसी मेरी इच्छा है।

पुनः पुनः मैं राम मंदिर निर्माण के लिए वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी तथा इस निर्माण की प्रक्रिया में लगे सभी कार सेवकों को संतों एवं भारत के सभी नागरिकों को आशीष देता हूँ कि भगवान राम उनका कल्याण करें.

राम नगीना मिश्रा, विनय कटियार एवं अन्य सांसदों के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलते हुए

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