मॉं समान गंगा जी से लोग क्यों डरने लगे !

पहले कोरोनावायरस से प्रदूषित लाशें और अब प्रदूषण से  जल गहरा हरा और बदबूदार होने से लोग मॉं समान गंगा नदी का जल इस्तेमाल करने से डरने लगे हैं . वैसे तकनीकी रूप से भी मैदानी इलाक़ों में गंगाजल नहाने या आचमन लायक़ नहीं रहा . गॉंवों के कुएँ और हैंड पंप भी प्रदूषण की चपेट में हैं . लोग तरह तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं . 

गहमर (ग़ाज़ीपुर) के मल्लाह जवाहर चौधरी कहतें हैं, “साहब गंगा से यहाँ का  जीवन चलना है लेकिन पहले लाशें और अब पानी हरा होने से इसका इस्तेमाल करने में डर लग रहा है. हम मल्लाहों का तो जीवन और जीवन दोनों  ही गंगा से जुड़ा हैं पर पचास साल की अपनी उम्र में पहली बार गंगा से डर लग रहा है.”

गहमर के गोविन्दराय पट्टी के अमित सिंह जो की यहाँ की पूर्व प्रधान किरण देवी के बेटे हैं कहते हैं ,  ” गंगा के प्रति सरकार की अनदेखी ठीक नहीं, इसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों तक को भुगतना पड़ेगा. हम इतने जरुरी मुद्दे की अनदेखी कैसे कर सकतें हैं ? “

बारा के निवासी और पत्रकार बाबर खान कहते हैं, पानी में काई लग गई है. नदी की दुर्दशा हो रही है.  पानी से दुर्गन्ध फैल रहा है. गंगा की हालत मानो छोटे तालाबों और नालों जैसी हो गई है.

पड़ोसी बक्सर ज़िले में गंगा का पानी पीते पशु और परेशान पशुपालक

 स्थानीय लोग सरकार से जांच और त्वरित कार्यवाही की माँग कर रहें हैं. बक्सर के महदह ग्राम निवासी अखिलेश तिवारी का कहना था कि, कोरोना का डर तो लगा ही हैं, इसी में गंगा कि इस हालत से मन में एक अनजाना डर बैठ गया. क्या ये दुनिया के अंत कि शुरुआत है ?

 जन जीवन के अस्तित्व का आधार और गंगा राष्ट्र की जीवन रेखा. इस पहले की जीवन रेखा पर संकट आये हमें सचेत होना पड़ेगा. यह समस्या किसी व्यक्ति की नहीं समाज की है और पानी का संरक्षण करके ही समाज ‘पानीदार ‘ बना रह सकता है.

शिवेंद्र प्रताप सिंह

शोध छात्र

गहमर , ग़ाज़ीपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published.

three × 2 =

Related Articles

Back to top button