फ़िल्टर बबल और एको चैम्बर क्या होते हैं ?

फ़िल्टर बबल से कैसे बचें

फिल्टर बबल उस स्थिति को कहते हैं जहां सर्च इंजन और ब्राउजर्स आपकी पसंद और नापसंद को तय करने लग जाते हैं और ऐसा वो आपके इन्टरनेट सर्च बिहेवियर, पास्ट सर्च हिस्ट्री, परचेसिंग हिस्ट्री के आधार पर अल्गोरिदम की मदद से करते हैं जिस कारण इंटेलेक्चुअल आइसोलेशन की स्थिति पैदा हो जाती है और आप एको चैंबर में रहने के भी आदी हो जाते हैं। 


इस टर्म को 2010 में इन्टरनेट एक्टिविस्ट एलाई पैरइजर ने दिया था और उनका मानना है कि इन्टरनेट धीरे धीरे एको चैंबर में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने कहा फिल्टर बबल लोगों को मैनिपुलेशन और प्रोपेगंडा का शिकार बना सकते हैं। ये सूचनाओं को ऑल्टर और टेलर्ड करते हैं और एक तरफा जानकारी झूठ से कम नहीं होती। फ़िल्टर बबल कन्फर्मेशन बायस और एको चैंबर को बढ़ावा देते हैं। 


फिल्टर बबल को एक उदहारण से समझते हैं, मैं एक मीडिया एजुकेटर हूं और अगर मैंने सोशल मीडिया पर मीडिया एजुकेटर के ग्रुप्स को सर्च या ज्वॉइन किया तो अगली बार वो वेबसाइट मुझे और मीडिया एजुकेटर के ग्रुप्स के ऑप्शन दिखाएगी। 


एलाई पैरइजर ने एक इंटरव्यू में फिल्टर बबल से संबंधित अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि एक बार उन्होंने फेसबुक पर कुछ कंजर्वेटिव्स को फेसबुक फ्रेंड्स बनाया और अगले दिन उन्होंने देखा कि वो सारे दोस्त उनकी फ्रेंड लिस्ट से गायब थे। फेसबुक ने उन्हे सलाह दी कि क्योंकि उनका रुझान प्रोग्रेसिव है और वो वैसी ही चीजों को लाइक करते हैं इसलिए उनके दोस्त प्रोग्रेसिव माइंडसेट के होने चाहिए। फेसबुक ने एलाई पैरइजर के पूर्व पोस्ट, लाइक्स, कमेंट्स और इंटरनेट बिहेवियर के आधार पर उनके बारे में उनकी पसंद नापसंद का पता लगा लिया था। 


अगर आप फिल्टर बबल से बचना चाहते हैं, नहीं चाहते कि इंटरनेट आप पर निगरानी रखे तो आपको सर्च इंजन या ब्राउजर पर कुछ भी सर्च करने के बाद अपनी सर्च हिस्ट्री डिलीट कर देनी चाहिए। इनकॉन्गनिटो ब्राउजर्स का इस्तेमाल करना चाहिए, कुकीज़ को ब्लॉक या डिलीट कर देना चाहिए। 

प्रोफ़ेसर भावना पाठक , इंदौर


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