न्याय के लिए पूर्व विधायक के परिजन 53 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर

डीपी मिश्रा

पलियाकलां-खीरी।तीन बार के विजेता पूर्व विधायक निर्वेन्द्र कुमार मुन्ना की एक जमीनी विवाद के चले जबरन कब्जा करने पहुँचे कुछ दबंगों ने पुलिस की मौजूदगी में मारपीट शुरू कर दी जिसमें मुन्ना संग  पुत्र सजीव मिश्रा गम्भीर रूप से घायल हो गए। इसमे उपचार के लिए सरकारी अस्पताल  पलिया लाते समय मुन्ना की रास्ते मे ही मौत हो गई। इस घटना की नामजद रिपोर्ट सजीव ने थाने में लिखवाई लेकिन इसमें एक पुलिस के अधिकारी का नाम शामिल होने के कारण पुलिस अब घटना पर लीपापोती कर रहीं है। यहां तक नामजद हत्यारोपियों की गिरफ्तारी में भी हीलाहवाली करने के साथ ही नामजद पुलिस अधिकारी तत्कालीन सीओ का नाम भी एफआईआर में शामिल कर रही है। पुलिस के लचर रवैये से गुस्साये पूर्व विधायक मुन्ना के पुत्र संजीव व उनके परिजन न्याय दिलवाए जाने की मांग को लेकर लगातार 53 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल आंदोलन चला रहे हैं।लेकिन  शासन-प्रशासन के आला अफसर मूक-बघिर बने हुए है।

ईमानदार और क्रांतिकारी पूर्व विधायक निर्वेंद्र कुमार मुन्ना की हत्या के आरोपियों को गिरफ़्तार करने पर ज़ोर देने के लिए लगातार भुख हड़ताल

उल्लेखनीय है कि पलियाकलां तहसील इलाका के ग्राम त्रिकोलिया में एक जमीन जो कि  विवादित थी, उस जमीनी विवाद में निघासन विधानसभा के जिला लखीमपुर खीरी से लगातार तीन बार विजेता रहे विधायक निरवेंद्र कुमार मिश्र मुन्ना पलिया सीओ के संरक्षण में भूमाफियाओं द्वारा 6/09/2020 को हत्या कर दी गई थी। पूर्व विधायक के आवास से 1 किलोमीटर पर  बिवादित जमीन जिस पर दोनों पक्षों द्वारा न्यायालय में मुकदमा चल रहा था।

भूमाफियाओं द्वारा इसी जमीन पर जिसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।कई बार कब्जा करने का प्रयास कर चुके थे। 6 सितंबर दिन रविवार जिस दिन लखीमपुर खीरी में पूर्ण लॉकडाउन था। उसी दिन 4 ट्रैक्टरों के साथ 10 गाड़ियों में भरे लगभग 60 लोग पलिया सीओ ऑफिस के सामने से बिना किसी राजस्व विभाग के अधिकारी की अनुपस्थितिमें पलिया सीओ कुलदीप कुकरेती की मौजूदगी में विवादित जमीन पर कब्जा लेने आए थे। जब यह बात पूर्व विधायक के सुपुत्र संजीव कुमार मुन्ना को पता चली तो वह अकेले ही विवादित जमीन पर पहुंचकर जमीन पर कब्जा करने का आधार पूछने लगे। इतना पूछने पर ही भू माफियाओं द्वारा सीओ पलिया की मौजूदगी में पूर्व विधायक के बेटे संजीव कुमार मिश्रा पर हमला बोल दिया। इसके उपरांत जब पूर्व विधायक स्वयं विवादित जमीन पर 6 सितंबर दिन रविवार पूर्ण  लॉकडाउन के दिन राजस्व विभाग की गैरमौजूदगी में जमीन पर कब्जा लेने का आधार पूछने पर भू माफियाओं द्वारा सीओ कुलदीप कुकरेती की मौजूदगी में पूर्व विधायक मुन्ना जी के सीने पर लात घुसा से वार करना शुरू कर दिया चुकि एक लोकप्रिय विधायक होने के नाते सभी जानते थे कि विधायक  की ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी है।इसका फायदा लेने की नीयत से  दबंगों ने उनके सीने पर किसी भी प्रकार का जोर पड़ने पर उनकी मृत्यु हो जाएगी। इसी बात का फायदा उठाते हुए भू माफियाओं ने पूर्व विधायक के सीने पर घुसे से प्रहार करके उनको गिरा दिया उसके बाद उनके सीने पर लातों से प्रहार किया । जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

यहां यह भी गौरलब कि जिस दिन पलिया सीओ कुलदीप कुकरेती की पोस्टिंग पलिया में हुई थी।उसी दिन पूर्व विधायक के बेटे ने पलिया सीओ के खिलाफ ज्ञापन दिया था। उसी दिन से पलिया सीओ कुलदीप कुकरेती पूर्व विधायक की मौत का षड्यंत्र रचने लगा थे। अपनी मृत्यु के 8 दिन पहले पूर्व विधायक   मुन्ना  सीओ ऑफिस के सामने एक मुद्दे को लेकर धरने पर भी बैठे थे ।जिस पर पलिया सीओ कुलदीप कुकरेती की उच्च स्तर पर निंदा भी की गई थी। परिवार वालों का आरोप है कि इसी के चलते पलिया सीओ कुलदीप कुकरेती ने भू माफिया से मिलकर पूर्व विधायक जी की हत्या का षड्यंत्र रचा।

अभी तक प्रशासन द्वारा इस मामले को लेकर पांच नामजद अपराधियों में से केवल तीन की गिरफ्तारी हुई है और पलिया सीओ कुलदीप कुकरेती पर अभी तक एफआईआर भी नहीं हुई है।

गौरतलब है कि निघासन तहसील में प्रशासन आने वाले फरियादियों के साथ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के साथ-साथ जनता को अपमानित करता था प्रशासन पीड़ितों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार करता था।

इस प्रकार का व्यवहार देख कर पूर्व विधायक  मुन्ना ने भ्रष्ट प्रशासन को उसी भाषा में समझाने के लिए तहसील परिसर में जानवर भरो आंदोलन का आवाहन किया था। जिस पर क्षेत्र के हजारों किसान मजदूरों ने तहसील निघासन को जानवरों से भर दिया था।

इस कार्रवाई से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए थे और क्षेत्रीय जनता का मान सम्मान बढ़ा था। और भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी से भी मुक्ति मिली थी।

इसके अतिरिक्त तहसील निघासन के बड़े भू माफियाओं के साथ जिला प्रशासन और लखनऊ कमिश्नरी के अधिकारी तक सांठगांठ करके जमीनों के सवाल पर गरीब जनता को धोखा दे रहे थे। कागजों में बड़े पैमाने पर हेरा फेरी चल रही थी गरीब मजदूरों गरीब किसानों का हक मारा जा रहा था पैसे का खेल चल रहा था इस व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ 1993 में सत्ता में रहते हुए भी लखनऊ कमिश्नरी में तत्कालीन कमिश्नर  प्रीतम सिंह से नोकझोंक के बाद जब उन्होंने नहीं सुना उसी दिन इससे पहले तत्कालीन सपा सरकार के राजस्व मंत्री स्वर्गीय श्री बाबूराम यादव को भी जमीनी भ्रष्टाचार से अवगत करा चुके थे, परंतु प्रशासन की हठधर्मिता को देखते हुए जनहित में लखनऊ कमिश्नरी के अंदर ही एक दिवसीय धरना दिया था।इससे सपा सरकार संग प्रशासन में हड़कम्प मच गया था।

जिसमें प्रमुख रूप से साथ में अजय तिवारी, वीरेंद्र सिंह, राम शुभम शर्मा, पूर्व प्रधान पट्टीहन रामनरेश मुजहा, रामायण पांडे सहित क्षेत्र के कई लोग मौजूद रहे थे। सपा सरकार के विधयक मुन्ना के धरना को गम्भीरता से लेकर देर रात तत्कालीन मुख्यमंत्री  मुलायम सिंह यादव ने खुद मौके पर पहुंचकर आश्वासन दिया और मुन्ना को अपने साथ ले गये।

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