साहित्य
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दिल्ही आने के पैसे नही, पद्मश्री डाक से भिजवा दो
हलधर नाग – जिसके नाम के आगे कभी श्री नही लगाया गया, 3 जोड़ी कपड़े, एक टूटी रबड़ की चप्पल,…
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जीवन यह कविता बन
जीवन यह कविता बन भावों और विचारों की गति में विमल नीर सा बहता जाए कालचक्र में इधर बहे या…
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अनगढ़ किरदार को गढ़ती “तू जमाना बदल”
राजीव कुमार ओझा। काव्या पब्लिकेशन्स अवधपुरी भोपाल से प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार राजेश पटेल की पुस्तक एक निहत्थी क्रांति ” तू…
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केनोपनिषद : कौन है ब्रह्म
डॉ. चन्द्रविजय चतुर्वेदी। केनोपनिषद का पांचवां मन्त्र है — यन्मनसा न मनुते एनाहुर्मनो मतम। तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते।…
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Hindi as the Lingua Franca
Hindi or Hindustani, because of its richness, popularity and wide use and acceptance, once held the promise of becoming the…
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एक बेमिसाल साहित्यिक जोड़ी
यह सन् 1963-64 की बात है। किसी पंजाबी पत्रिका में अफ़ग़ानिस्तान पर कर्नल नरेंद्र पाल सिंह का एक आलेख पढ़ा।…
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आभा
चौमासी माह सावन हरे भरे खेत और मैदान, ढलकती शाम की बुंछेरी बूंदे बीती रात की नम ओस की बूंदे, …
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सन्नाटे में आवाजें
सन्नाटे में भी आवाजें हैं, चीखें और चिल्लाहटे हैं ।। यह सन्नाटा गहरा है बड़ा, नेपथ्य में है कोहरा घना…
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