बनारस में काढ़े का ट्रायल शुरू, कोविड का पूरा आयुर्वेदिक प्रोटोकॉल आयुष मंत्रालय में क़ैद

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुन्दर लाल अस्पताल ( एलोपैथिक) में कोविड के मरीज़ों पर आयुर्वेदिक शिरीषादी क्वाथ – काढ़े इस्तेमाल आज से प्रारंभ किया गया , लेकिन आयुर्वेदिक फ़ैकल्टी द्वारा साल भर पहले भेजा सम्पूर्ण प्रोटोकॉल अब भी आयुष मंत्रालय और नीति आयोग की फ़ाइलों में बंद है .

आयुर्वेद का स्टाफ़ काढ़ा पिलाने अस्पताल में

इस काढ़े का इस्तेमाल भारत सरकार द्वारा दिये गये प्रोजेक्ट के अनुसार माडरेट से सेवेयर कोरोना वायरस संक्रमण में किया जाना है.
इस प्रोजेक्ट मे पी आई प्रोफेसर जया चक्रवर्ती को पी आई प्रोफेसर वाई बी त्रिपाठी , वैद्य सुशील कुमार दुबे एव डाक्टर अभिषेक पाण्डेय है ।

काढ़े की रिसर्च टीम

वैद्य सुशील कुमार दुबे ने बताया कि इस आयुर्वेदिक काढे का शोध 1982 मे स्वर्गीय प्रोफेसर एस एन त्रिपाठी के द्वारा बी एच यू के आयुर्वेद संकाय मे किया गया था जिसका लाभ सॉंस , खांसी , जुकाम एव एलर्जिक रोगो पर बहुत ही अच्छा परिणाम मिलता है ।

इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु मरीज को त्वरित लाभ हो साथ ही उनको कमजोरी न हो आक्सीजन का सहारा जल्द छूट जाए और पोस्ट कोबिड कोई ज्यादा परेशानी न हो इत्यादि के लिए यह निरापद शोध किया जा रहा है ।

घटक द्रव्य

घटक द्रव्य: इसमे घटक द्रव्य कुल 5 है जिसमे से अधिकतर घटक लोग अपने घर मे उपयोग करते रहते है । जैसे
शिरीष
वासा
कण्टकारी
मूलेठी
तेजपत्र
इन द्रव्यो का सीधा असर श्वास रोग को ठीक करने मे काफी बेहतर प्रदर्शन रहा है । कुछ दिन पूर्व भी इसका प्रयोग COVID19 के माइल्ड केस मे डाक्टर पी एस व्याडगी के निर्देशन मे किया गया , जिसके सकारात्मक परिणाम ने इस प्रोजेक्ट मे अभिरूचि और बढ़ा दिया ।

कम्प्लीट प्रोटोकॉल

इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ बीएचयू के आयुर्वेद विभाग के डाक्टरों ने एक साल पहले कोविड-19 के इलाज का कम्प्लीट प्रोटोकॉल भारत सरकार के नीति आयोग , आयुष मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा था . किन्तु अभी तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है .

देश भर के वैद्य निजी स्तर पर आयुर्वेद के विशिष्ट रसायनों का प्रयोग कर रहे हैं . लाखों लोगों को इनसे लाभ भी है , पर सरकारी क्षेत्र के डाक्टर अपने हाथ बंधे बताते हैं . अब इस प्रोजेक्ट में केवल काढ़े का प्रयोग कोविड-19 मरीज़ों पर करने के लिए कहा गया है.

आयुर्वेद विभाग के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर इस बात पर भी सरकार और बीएचयू प्रशासन से नाराज़ हैं कि अस्पतालों में बेड की कमी के बावजूद आयुर्वेदिक अस्पताल में ताला लगाकर डाक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ़ की ड्यूटी कोविड अस्पताल में लगा दी गयी , जबकि उन्हें एलोपैथी चिकित्सा का ज्ञान होने से वहाँ कोई योगदान नहीं हो पा रहा है.

बीएचयू आयुर्वेदिक अस्पताल में ताला बंद

एक तरफ़ बीएचयू आयुर्वेदिक अस्पताल भवन बंद है दूसरी तरफ़ रक्षा मंत्रालय के अधीन डीआरडीओ ने महँगे टेंट और उपकरणों से कैम्पस में अस्थायी अस्पताल आबादी के बीच में खोला है , जिससे अध्यापकों और कर्मचारियों के परिवार संक्रमण की आशंका से भयभीत हैं .

यह भी कहा जा रहा है कि इस अस्थायी कोविड अस्पताल में बड़ी संख्या में मृत्यु से घबराकर सरकार ने किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में रेस्पिरेटरी विभाग के हेड प्रोफ़ेसर सूर्यकांत को बनारस भेजा .

इस अस्थायी अस्पताल में कई जगह से डाक्टर और स्टाफ आये हैं . अस्पताल में अव्यवस्था और बदइंतज़ामी की चर्चा है . प्रोफ़ेसर सूर्यकांत तीन दिन डीआरडीओ के कोविड अस्पताल का निरीक्षण कर वापस लखनऊ लौट गये हैं .

राम दत्त त्रिपाठी

@Ramdutttripathi

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